श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2 (सांख्य योग (Sankhya Yoga))

अध्याय 2 · श्लोक 55

सांख्य योग (Sankhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 72 3 मिनट का पठन 118 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच | प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् | आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ||५५||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
श्रीभगवान्
भगवान
उवाच
बोले
प्रजहाति
त्याग देता है
यदा
जब
कामान्
कामनाओं को
सर्वान्
सब
पार्थ
हे पार्थ
मनोगतान्
मन में स्थित
आत्मनि
आत्मा में
एव
ही
आत्मना
आत्मा द्वारा
तुष्टः
सन्तुष्ट
स्थितप्रज्ञः
स्थितप्रज्ञ
तदा
तब
उच्यते
कहा जाता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रीभगवान् बोले: हे पार्थ! जब पुरुष मन में स्थित सब कामनाओं को पूर्णतः त्याग देता है और आत्मा द्वारा आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है, तब वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

स्थितप्रज्ञ की पहली पहचान – उसने सभी मानसिक कामनाओं का त्याग कर दिया है, और वह आत्मा में ही आत्मा से सन्तुष्ट है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे पार्थ! जब पुरुष मन में स्थित सब कामनाओं को पूर्णतः त्याग देता है और आत्मा द्वारा आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है, तब वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है। When one completely casts off all desires of the mind and is satisfied in the Self by the Self, then he is said to be a man of steady wisdom.

आत्मसंतुष्टि / Self-satisfaction

स्थितप्रज्ञ बाह्य वस्तुओं से नहीं, अपितु अपने आत्मा से सन्तुष्ट रहता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 2: सांख्य योग (Sankhya Yoga)
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श्लोक 55/72 76% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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