श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2 (सांख्य योग (Sankhya Yoga))

अध्याय 2 · श्लोक 56

सांख्य योग (Sankhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 72 3 मिनट का पठन 125 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः | वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ||५६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

8 पद
दुःखेषु
दुःखों में
अनुद्विग्नमनाः
उद्विग्न न हुए मन वाला
सुखेषु
सुखों में
विगतस्पृहः
स्पृहा (इच्छा) से रहित
वीतरागभयक्रोधः
राग, भय और क्रोध से रहित
स्थितधीः
स्थिर बुद्धि
मुनिः
मुनि
उच्यते
कहा जाता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

दुःखों में जिसका मन उद्विग्न नहीं होता, सुखों में जिसकी स्पृहा (इच्छा) नहीं रहती, और जो राग, भय तथा क्रोध से रहित है, वह स्थिर बुद्धि मुनि कहा जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

स्थितप्रज्ञ के और लक्षण – दुःख में विचलित नहीं, सुख में आसक्त नहीं, राग, भय, क्रोध से मुक्त।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

दुःखों में जिसका मन उद्विग्न नहीं होता, सुखों में जिसकी इच्छा नहीं रहती, और जो राग, भय तथा क्रोध से रहित है, वह स्थिर बुद्धि मुनि कहा जाता है। He whose mind is not distressed in calamities, who has no longing for pleasures, and who is free from attachment, fear, and anger – he is called a sage of steady mind.

समत्व / Equanimity

स्थितप्रज्ञ सुख-दुःख में समान रहता है और सभी विकारों से मुक्त होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 2: सांख्य योग (Sankhya Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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