श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga))

अध्याय 15 · श्लोक 20

पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ । एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥ २०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
इति
इस प्रकार
गुह्यतमम्
अति गोपनीय
शास्त्रम्
शास्त्र (ज्ञान)
इदम्
यह
उक्तम्
कहा गया
मया
मेरे द्वारा
अनघ
हे निष्पाप (अर्जुन)
एतत्
इस (ज्ञान) को
बुद्ध्वा
समझकर
बुद्धिमान्
बुद्धिमान्
स्यात्
हो जाता है
कृतकृत्यः
कृतकृत्य (कृतार्थ, सफल)
च
और
भारत
हे भारत।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे अनघ (निष्पाप अर्जुन)! इस प्रकार यह अति गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया। इसे समझकर मनुष्य बुद्धिमान् और कृतकृत्य (कृतार्थ) हो जाता है, हे भारत।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अध्याय १५ का उपसंहार करते हुए कहते हैं कि यह अति गोपनीय ज्ञान है। इसे समझ लेने पर मनुष्य बुद्धिमान और कृतार्थ हो जाता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: हे अनघ (निष्पाप)! इस प्रकार मेरे द्वारा यह अत्यन्त गोपनीय शास्त्र (ज्ञान) कहा गया है। हे भारत! इस (ज्ञान) को समझकर मनुष्य बुद्धिमान् हो जाता है और उसके सभी कर्तव्य पूर्ण हो जाते हैं (वह कृतकृत्य हो जाता है)।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह अध्याय अत्यन्त गोपनीय ज्ञान से भरा है। इसे समझना और आत्मसात करना ही मानव जीवन की सफलता है। जो इस ज्ञान को प्राप्त कर लेता है, वह सच्चा बुद्धिमान है और उसका जीवन धन्य हो जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 20 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 20/20 100% पूर्ण
पिछला
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!