श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga))

अध्याय 15 · श्लोक 19

पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् । स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥ १९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
यः
जो
माम्
मुझे
एवम्
इस प्रकार
असम्मूढः
मोहरहित (सम्मोह से रहित)
जानाति
जानता है
पुरुषोत्तमम्
पुरुषोत्तम के रूप में
सः
वह
सर्ववित्
सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाला)
भजति
भजता है
माम्
मुझे
सर्वभावेन
सब प्रकार से (सम्पूर्ण भाव से)
भारत
हे भारत (अर्जुन)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! जो मोहरहित (असम्मूढ) पुरुष मुझे इस प्रकार पुरुषोत्तम के रूप में जान लेता है, वह सर्वज्ञ होकर (सब कुछ जानकर) सब भावों से मेरी भक्ति करता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जो मनुष्य भगवान को पुरुषोत्तम के रूप में समझ लेता है (अर्थात उनके स्वरूप को जान लेता है), वह मोह से मुक्त हो जाता है, सब कुछ जान लेता है और पूर्ण भाव से भगवान की भक्ति करता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: हे भारत! जो मनुष्य मोहरहित होकर मुझे इस प्रकार (क्षर-अक्षर से परे) पुरुषोत्तम के रूप में जान लेता है, वह सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाला) हो जाता है और सब भावों से (अपने सम्पूर्ण अस्तित्व से) मेरी भक्ति करता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान के सच्चे स्वरूप को जानना ही सच्चा ज्ञान है। यह ज्ञान सब कुछ जानने के समान है। ऐसा ज्ञानी मोह से मुक्त होकर पूर्ण समर्पण भाव से भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है, जो मोक्ष का मार्ग है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 19 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 19/20 95% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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