श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 43

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 95 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना | जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ||४३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
एवम्
इस प्रकार
बुद्धे
बुद्धि से
परम्
परे (आत्मा) को
बुद्ध्वा
जानकर
संस्तभ्य
स्थिर करके
आत्मानम्
मन को
आत्मना
अपने (बुद्धि) द्वारा
जहि
मार
शत्रुम्
शत्रु को
महाबाहो
हे महाबाहो
कामरूपम्
काम के रूप में
दुरासदम्
दुर्जय।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इस प्रकार बुद्धि से परे (आत्मा) को जानकर, बुद्धि द्वारा मन को स्थिर करके, हे महाबाहो! इस दुर्जय कामरूपी शत्रु को मार डाल।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह अध्याय का समापन श्लोक है – आत्म-ज्ञान द्वारा बुद्धि से मन को वश में करके काम पर विजय पाओ। This is the concluding verse of the chapter – by knowing the Self, and controlling the mind with the intellect, conquer the formidable enemy called desire.

श्लोक का अर्थ / Meaning

बुद्धि से परे आत्मा को जानकर, बुद्धि द्वारा मन को स्थिर करके, इस दुर्जय कामरूपी शत्रु को मार डाल। Knowing the Self beyond the intellect, and restraining the mind with the intellect, slay this formidable enemy, desire.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 43 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 43/43 100% पूर्ण
पिछला
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!