मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना | जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ||४३||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदएवम्
इस प्रकार
बुद्धे
बुद्धि से
परम्
परे (आत्मा) को
बुद्ध्वा
जानकर
संस्तभ्य
स्थिर करके
आत्मानम्
मन को
आत्मना
अपने (बुद्धि) द्वारा
जहि
मार
शत्रुम्
शत्रु को
महाबाहो
हे महाबाहो
कामरूपम्
काम के रूप में
दुरासदम्
दुर्जय।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इस प्रकार बुद्धि से परे (आत्मा) को जानकर, बुद्धि द्वारा मन को स्थिर करके, हे महाबाहो! इस दुर्जय कामरूपी शत्रु को मार डाल।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह अध्याय का समापन श्लोक है – आत्म-ज्ञान द्वारा बुद्धि से मन को वश में करके काम पर विजय पाओ। This is the concluding verse of the chapter – by knowing the Self, and controlling the mind with the intellect, conquer the formidable enemy called desire.
श्लोक का अर्थ / Meaning
बुद्धि से परे आत्मा को जानकर, बुद्धि द्वारा मन को स्थिर करके, इस दुर्जय कामरूपी शत्रु को मार डाल। Knowing the Self beyond the intellect, and restraining the mind with the intellect, slay this formidable enemy, desire.