श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 42

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः | मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ||४२||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
इन्द्रियाणि
इन्द्रियाँ
पराणि
श्रेष्ठ (स्थूल से सूक्ष्म)
आहु
कहते हैं
इन्द्रियेभ्य
इन्द्रियों से
परम्
श्रेष्ठ
मन
मन
मनस
मन से
तु
तो
परा
श्रेष्ठ
बुद्धि
बुद्धि
य
जो
बुद्धे
बुद्धि से
परत
परे
तु
तो
स
वह (आत्मा)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इन्द्रियाँ (शरीर से) श्रेष्ठ कही जाती हैं, इन्द्रियों से मन श्रेष्ठ है, मन से बुद्धि श्रेष्ठ है, और जो बुद्धि से परे है – वह (आत्मा) है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अब तत्त्वों की श्रेणी बताते हैं – स्थूल से सूक्ष्म की ओर बढ़ते हुए। इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि और उससे परे आत्मा। यह जानकर कि आत्मा इन सबसे परे है, साधक को काम पर विजय पानी चाहिए। The Lord now gives a hierarchy from gross to subtle – senses, mind, intellect, and beyond them the Self. Knowing that the Self is beyond all, the seeker should conquer desire.

श्लोक का अर्थ / Meaning

इन्द्रियाँ शरीर से श्रेष्ठ, मन इन्द्रियों से श्रेष्ठ, बुद्धि मन से श्रेष्ठ, और बुद्धि से परे आत्मा है। The senses are superior to the body, the mind superior to the senses, the intellect superior to the mind, and beyond the intellect is the Self.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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