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प्रामाणिक मंदिर विवरण

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम – इटहरा उपरवार, भदोही: गंगा तट पर शिव का पावन धाम | Baba Gangeshwarnath Dham Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva on the Ganges Bank

296 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Gangeshwarnath आराध्य देव
05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM दर्शन समय
Evening Ganga Aarti: 6:30 PM, Morning Aarti: 5:30 AM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Gangeshwarnath
दर्शन समय 05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM
आरती समय Evening Ganga Aarti: 6:30 PM, Morning Aarti: 5:30 AM
स्थान / पता Baba Gangeshwarnath Dham, Itahara Uparwar, Gyanpur, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 बाबा गंगेश्वरनाथ धाम – इटहरा उपरवार

गंगा के पवित्र तट पर विराजमान भोलेनाथ का अद्भुत धाम (Baba Gangeshwarnath Dham, Bhadohi)

भदोही जिले के इटहरा उपरवार गाँव में गंगा किनारे स्थित एक प्राचीन एवं दिव्य शिव मंदिर

🌟 परिचय: बाबा गंगेश्वरनाथ धाम का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित इटहरा उपरवार गाँव पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा एक अत्यंत प्राचीन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ स्थित बाबा गंगेश्वरनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं और काशी-प्रयाग की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी आस्था का केंद्र है।

मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी स्थापना प्राचीन काल में किसी महान ऋषि या देवताओं ने की थी। गंगा के निकट होने के कारण इस स्थान को "गंगेश्वरनाथ" नाम से जाना जाता है, जो गंगा और शिव के अटूट संबंध का प्रतीक है। यहाँ का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और सात्विक है, जो साधना और ध्यान के लिए अद्भुत है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के इटहरा उपरवार गाँव में स्थित है। यह गाँव ज्ञानपुर तहसील में आता है और गंगा नदी के तट पर बसा है। यह स्थान काशी (वाराणसी) और प्रयागराज (इलाहाबाद) के मध्य स्थित होने के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (जिला मुख्यालय) – लगभग 35 किमी, वाराणसी – लगभग 45 किमी, प्रयागराज – लगभग 70 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड (GYN) है, जो देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 20 किमी है। टैक्सी या ऑटो द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग: मंदिर सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, भदोही और ज्ञानपुर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी वाहन उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित है।
🏞️

इटहरा उपरवार, भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~70 किमी

गंगा तट पर स्थित

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, यह स्थल कभी घने जंगलों से आच्छादित था और महान ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में महर्षि विश्वामित्र या किसी अन्य ऋषि ने यहाँ गंगा के तट पर घोर तपस्या की थी, जिसके परिणामस्वरूप यह शिवलिंग प्रकट हुआ।

एक अन्य कथा के अनुसार, यह स्थान "गंगा-शिव" के मिलन का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि जब गंगा देवी धरती पर अवतरित हुईं, तो भगवान शिव ने अपनी जटाओं में उन्हें धारण किया। इसी पावन संबंध के प्रतीक के रूप में इस स्थान पर गंगा के तट पर शिवलिंग की स्थापना हुई, जिसे "गंगेश्वरनाथ" कहा गया। यह मंदिर समय के साथ स्थानीय राजाओं और श्रद्धालुओं के सहयोग से विकसित हुआ और आज एक भव्य स्वरूप में है।

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"स्वयंभू शिवलिंग, गंगा के पवित्र जल से सिंचित।"

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 प्राचीन शिवलिंग और मंदिर संरचना

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है। गर्भगृह में एक विशाल और दिव्य शिवलिंग विराजमान है, जो प्राचीन काल से यहाँ स्थापित है। शिवलिंग के चारों ओर सुंदर नक्काशीदार चांदी की परिक्रमा मार्ग है। मंदिर का शिखर ऊंचा और भव्य है, जो दूर से ही दर्शनीय है।

⛲ गंगा तट और घाट

मंदिर से सटा हुआ गंगा नदी का पवित्र तट है। यहाँ पर एक सुंदर घाट बना हुआ है, जहाँ भक्त स्नान कर सकते हैं और गंगा आरती का आनंद ले सकते हैं। गंगा के निर्मल जल में स्नान करने का अपना ही अलग महत्व है।

🌳 शांत और प्राकृतिक परिसर

मंदिर का परिसर विशाल है और हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ बरगद और पीपल के प्राचीन वृक्ष हैं, जिनके नीचे बैठकर ध्यान और भजन करने का अलग ही आनंद है। नदी के किनारे होने के कारण यहाँ का वातावरण अत्यंत शीतल और सात्विक है।

🧘 साधना, ध्यान और आध्यात्मिकता का केंद्र

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह साधना और आध्यात्मिकता का एक जीवंत केंद्र भी है। गंगा के तट पर स्थित होने के कारण यह स्थान साधकों और मोक्ष की इच्छा रखने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ नियमित रूप से:

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गंगा आरती

प्रतिदिन शाम को गंगा तट पर भव्य आरती का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु दीपदान करते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

📿

रुद्राभिषेक

विशेष अवसरों और सोमवार के दिन सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों शिवभक्त सहभागिता करते हैं।

🧘

ध्यान एवं योग

प्रातःकाल गंगा के शांत वातावरण में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय चेतना से जोड़ती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • गंगा स्नान का महत्व: मान्यता है कि यहाँ गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में यहाँ पितरों को तर्पण देने का विशेष महत्व है।
  • मनोवांछित फल: सोमवार के दिन बाबा गंगेश्वरनाथ पर जल चढ़ाने और विधिवत पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • रोग निवारण: कई भक्तों का विश्वास है कि यहाँ की गंगा का जल पीने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • साधना स्थली: यह स्थान प्राचीन काल से ही ऋषियों-मुनियों और साधकों की तपोभूमि रहा है। यहाँ ध्यान करने से मन को असीम शांति मिलती है।
  • गंगा-शिव का मिलन: यह स्थान गंगा और शिव के अटूट संबंध का प्रतीक है। यहाँ दोनों की एक साथ पूजा का विशेष लाभ मिलता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

यहाँ का सबसे भव्य त्योहार महाशिवरात्रि है। इस दिन रात्रि जागरण, भव्य रुद्राभिषेक और सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌊

सावन सोमवार

सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार को यहाँ विशेष मेला लगता है। कांवड़िए और शिवभक्त दूर-दूर से जल चढ़ाने के लिए आते हैं। पूरे माह मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। मंदिर में भव्य आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

📿

श्राद्ध पक्ष

पितृ पक्ष के दौरान यहाँ पितरों को तर्पण देने और पिंडदान करने का विशेष महत्व है। इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

🎭

रामलीला

दशहरे के अवसर पर मंदिर परिसर में रामलीला का आयोजन किया जाता है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ, गंगा आरती – लगभग 45 किमी दूर।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन – लगभग 70 किमी।
  • ज्ञानपुर: ज्ञानपुर का ऐतिहासिक शहर और यहाँ के प्राचीन मंदिर – लगभग 20 किमी।
  • भदोही (जिला मुख्यालय): भदोही शहर अपने कालीन उद्योग और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है – लगभग 35 किमी।
  • सीतामढ़ी-हरदत्तपुर: यहाँ का प्राचीन देवी मंदिर और किला – लगभग 30 किमी।
📌 यात्रा टिप: काशी (वाराणसी) या प्रयागराज की यात्रा पर आते समय बाबा गंगेश्वरनाथ धाम की यात्रा अवश्य करें। यह दोनों प्रमुख तीर्थ स्थलों के मध्य में स्थित है। गंगा स्नान और शिव दर्शन का अद्भुत संगम यहाँ उपलब्ध है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे गंगा स्नान और मंदिर दर्शन सुखद रहते हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा और ध्यान के लिए आदर्श।
  • सावन (जुलाई-अगस्त): यदि आप शिव भक्तों की भव्य शोभायात्रा और मेले का अनुभव करना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।
  • महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च): त्योहारी धूम देखने के लिए सबसे अच्छा समय।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को विशेष पूजा का समय रहता है।
  • शाम की गंगा आरती (लगभग 6:30 बजे) में अवश्य शामिल हों।
  • गंगा स्नान करने के लिए घाट पर उचित व्यवस्था है। प्रसाद और पूजा सामग्री मंदिर के बाहर उपलब्ध है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था है। रहने के लिए धर्मशाला भी उपलब्ध है।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "गंगा जल" और "भभूत" अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: बाबा गंगेश्वरनाथ धाम कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के इटहरा उपरवार गाँव में गंगा नदी के तट पर स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग और गंगा नदी के तट पर स्थित होना है। गंगा-शिव का यह अद्भुत संगम इसे अत्यंत पवित्र और दिव्य बनाता है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। पूजा और विशेष अनुष्ठानों के लिए अलग से व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ रहने और खाने की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर में एक साधारण धर्मशाला और भोजनालय उपलब्ध है। बेहतर आवास के लिए ज्ञानपुर या भदोही जाना अधिक सुविधाजनक रहता है।

प्रश्न 6: इटहरा उपरवार कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड (GYN) है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, भदोही और ज्ञानपुर से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या विशेष पूजा का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 बाबा गंगेश्वरनाथ धाम की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

बाबा गंगेश्वरनाथ धाम, इटहरा उपरवार, भदोही एक ऐसा दिव्य स्थल है जहाँ गंगा और शिव का अद्भुत मिलन होता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी दिखाता है।

यहाँ की प्राचीन शिवलिंग, पवित्र गंगा तट, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले रुद्राभिषेक एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे शिवभक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

काशी-प्रयाग की पवित्र भूमि के मध्य स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर हर महादेव ।। जय गंगेश्वरनाथ ।।

🕊️ बाबा गंगेश्वरनाथ धाम – इटहरा उपरवार, भदोही
गंगा तट पर विराजमान भोलेनाथ का पावन धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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