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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: बाबा विश्वनाथ की नगरी में आस्था का महाकुंभ | Shri Kashi Vishwanath Temple: The Sacred Jyotirlinga in Varanasi

16,189 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 29 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
4:00 AM - 12:00 PM, 4:00 PM - 11:00 PM दर्शन समय
Mangala Aarti: 4:00 AM, Bhog Aarti: 12:00 PM, Evening Aarti: 7:00 PM, Shayan Aarti: 10:30 PM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
दर्शन समय 4:00 AM - 12:00 PM, 4:00 PM - 11:00 PM
आरती समय Mangala Aarti: 4:00 AM, Bhog Aarti: 12:00 PM, Evening Aarti: 7:00 PM, Shayan Aarti: 10:30 PM
स्थान / पता Shri Kashi Vishwanath Temple, Vishwanath Gali, Varanasi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

बाबा विश्वनाथ की नगरी, आस्था और मोक्ष का अद्वितीय धाम (Shri Kashi Vishwanath Temple, Varanasi)

वाराणसी की पवित्र गंगा तट पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, आस्था और मोक्ष का प्रमुख केंद्र

🌟 परिचय: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाली वाराणसी (काशी) में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह पवित्र धाम न केवल भारत वरन पूरे विश्व में हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन तीर्थ स्थल माना जाता है। इस मंदिर की गणना सनातन धर्म के सर्वोच्च पवित्र स्थलों में की जाती है।

यहाँ विराजमान भगवान शिव को "विश्वनाथ" (विश्व के नाथ) के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से यहाँ आकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। मंदिर की मनमोहक वास्तुकला, यहाँ की गूंजती घंटियाँ, और भगवान शिव का अभिषेक हर भक्त को आध्यात्मिकता के अद्भुत अनुभव से भर देता है।

गंगा के पवित्र तट पर स्थित यह मंदिर प्राचीन काल से ही संतों, विद्वानों, कवियों और भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। आदि शंकराचार्य से लेकर संत तुलसीदास और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने इस पवित्र नगरी में आकर आत्म-साक्षात्कार किया।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित है। यह मंदिर विश्वनाथ गली, विशेश्वरगंज क्षेत्र में स्थित है, जो वाराणसी शहर के हृदय स्थल पर है। यह स्थान अपनी प्राचीन गलियों, गंगा घाटों और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी स्वयं एक प्रमुख महानगर है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (BSB) है, जो देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मंदिर स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर है। काशी विश्वनाथ धाम (केएसी) एक नया स्टेशन है जो मंदिर से सटा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: वाराणसी सड़क मार्ग द्वारा देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) है, जो मंदिर से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

विश्वनाथ गली, विशेश्वरगंज, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी जंक्शन से दूरी: ~4 किमी
गंगा नदी से दूरी: ~500 मीटर (दशाश्वमेध घाट)

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास और पौराणिक महत्व अत्यंत प्राचीन है। स्कंद पुराण के अनुसार, काशी को भगवान शिव का त्रिशूल पर स्थित नगर कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने इस नगरी को बसाया था।

वर्तमान मंदिर का निर्माण सन 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था। इससे पूर्व यहाँ मुगल आक्रमणकारी औरंगजेब द्वारा पुराने मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था, जिसके अवशेष आज भी ज्ञानवापी कुंड के रूप में विद्यमान हैं।

हाल ही में, दिसंबर 2021 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के तहत मंदिर परिसर का भव्य विस्तार किया। अब यह परिसर लगभग 5 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं को अब भीड़ के बीच सहज दर्शन की सुविधा मिलती है।

🕉️

"काशी में रहने वाला, विश्वनाथ का भक्त कभी मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जाता।" - शिव पुराण

मान्यता: यहाँ के ज्ञानवापी कुंड में डुबकी लगाने और विश्वनाथ के दर्शन से सभी पापों का नाश हो जाता है। काशी में मृत्यु होने पर सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक शिखर और गर्भगृह

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, भव्य शिखर और सोने से मढ़े हुए गुंबद देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग स्वरूप विराजमान है, जिस पर प्रतिदिन गंगाजल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है।

🪙 ज्ञानवापी कुंड

मंदिर परिसर के भीतर स्थित यह पवित्र कुंड अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव का ज्ञान स्वरूप (शिवलिंग) सुरक्षित था। मुगल आक्रमण के समय पुजारियों ने इस कुंड में शिवलिंग छुपा दिया था, जो आज भी यहाँ विद्यमान है।

🏛️ काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर

नवनिर्मित कॉरिडोर ने मंदिर को गंगा नदी से सीधे जोड़ दिया है। यह विशाल प्रांगण, दुर्गा मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और कालभैरव मंदिर सहित 23 से अधिक मंदिरों से युक्त है। यह स्थान अब एक विश्व स्तरीय आध्यात्मिक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है।

🪔 दर्शन, आरती और विशेष अनुष्ठान

⏰ दर्शन का समय

  • प्रातःकाल: 4:00 बजे से 12:00 बजे तक
  • सायंकाल: 4:00 बजे से 11:00 बजे तक (भोग आरती के बाद)
  • भस्म आरती: प्रातः 3:30 बजे से 4:00 बजे तक

🎵 प्रमुख आरतियाँ

  • मंगला आरती: प्रातः 4:00 बजे
  • भोग आरती: दोपहर 12:00 बजे
  • सायं आरती: शाम 7:00 बजे
  • शयन आरती: रात 10:30 बजे
📌 विशेष सुझाव: भस्म आरती और सायं आरती सबसे आकर्षक होती हैं। इनमें शामिल होने के लिए कम से कम 1 घंटा पहले पहुंच जाएं। सर्दियों में भस्म आरती के दर्शन विशेष रूप से श्रद्धेय हैं।

📿 विशेष पूजा और अनुष्ठान

यहाँ रूद्राभिषेक, लघु रुद्र, महारुद्र, और स्पेशल भोग जैसी विशेष पूजाएँ कराई जाती हैं। मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय से संपर्क कर इनकी बुकिंग की जा सकती है। श्रद्धालु गंगा नदी में पिंडदान, तर्पण और मोक्षदायिनी श्राद्ध कर्म भी कर सकते हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

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महाशिवरात्रि

यह मंदिर का सबसे भव्य उत्सव है। इस दिन लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं और रात्रि जागरण के साथ भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। पूरा शहर शिवमय हो जाता है।

🪔

देव दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार अद्वितीय होता है। इस दिन गंगा घाटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं और देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

🌾

सावन मास

श्रावण मास में पूरे महीने यहाँ शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। कांवड़ यात्रा का यह केंद्र बिंदु होता है, और प्रतिदिन विशेष रुद्राभिषेक होते हैं।

🌸

नाग पंचमी

इस दिन भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाता है, क्योंकि नागों का शिव से विशेष संबंध माना जाता है।

🎭

रामलीला और रंगभरी एकादशी

वाराणसी की रामलीला विश्व प्रसिद्ध है, और रंगभरी एकादशी (होली के बाद) का आयोजन भी अद्वितीय होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • दशाश्वमेध घाट: गंगा आरती के लिए विश्व प्रसिद्ध, मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर।
  • कालभैरव मंदिर: काशी के कोतवाल कालभैरव का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ बिना दर्शन किए काशी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
  • अन्नपूर्णा मंदिर: माता अन्नपूर्णा का मंदिर, जहाँ अन्न और समृद्धि की कामना की जाती है।
  • तुलसी मानस मंदिर: संत तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की पाण्डुलिपि यहाँ सुरक्षित है।
  • संकट मोचन मंदिर: हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर, जो काशी की रक्षा करने वाला माना जाता है।
  • दुर्गा कुंड मंदिर: माता दुर्गा का प्राचीन मंदिर, जहाँ नवरात्रि में विशेष पूजा होती है।
  • सारनाथ: बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। (लगभग 10 किमी दूर)
  • रामनगर किला: गंगा तट पर स्थित ऐतिहासिक किला और संग्रहालय।
📌 यात्रा टिप: काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अवश्य देखें। यहाँ से आप नाव की सवारी करके गंगा में डुबकी लगा सकते हैं और संपूर्ण घाटों का भ्रमण कर सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

वाराणसी की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर दर्शन और शहर भ्रमण सुखद रहता है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श। इस समय देव दीपावली, महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं।
  • सावन मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप शिवभक्त हैं और कांवड़ यात्रा का अनुभव लेना चाहते हैं तो यह समय सर्वोत्तम है, हालांकि भीड़ अधिक होती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर के दर्शन के लिए आप "काशी विश्वनाथ धाम ऐप" से ऑनलाइन पास बुक कर सकते हैं, जिससे लंबी कतारों से बचा जा सकता है।
  • भस्म आरती के दर्शन के लिए रात 2:30 बजे से ही कतार में लग जाएं। यह अनुभव अद्वितीय है।
  • मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को मंदिर परिसर में अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। बाहर लॉकर की सुविधा उपलब्ध है।
  • शुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए "विश्वनाथ भोजनालय" और आसपास की प्रसिद्ध दुकानें उपलब्ध हैं। काशी की "कचौड़ी-जलेबी" का स्वाद अवश्य लें।
  • गंगा स्नान का विशेष महत्व है। दशाश्वमेध घाट या अस्सी घाट पर स्नान कर मंदिर दर्शन के लिए जाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में विश्वनाथ गली, विशेश्वरगंज क्षेत्र में स्थित है। यह वाराणसी शहर के मध्य भाग में है और दशाश्वमेध घाट से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे हिंदू धर्म का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यहाँ की भस्म आरती, ज्ञानवापी कुंड, और नवनिर्मित काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में सामान्य दर्शन के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। हालांकि, विशेष पूजा और सुगम दर्शन (लाइन से बचने) के लिए टिकट उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें अलग-अलग हैं।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है। दर्शन के लिए प्रातः 4:00 बजे की मंगला आरती और शाम 7:00 बजे की सायं आरती सबसे श्रेष्ठ हैं। भीड़ कम करने के लिए दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच का समय उपयुक्त है।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: वाराणसी में प्रसिद्ध धर्मशालाएँ, होटल और गेस्ट हाउस सभी बजट में उपलब्ध हैं। मंदिर के आसपास शुद्ध शाकाहारी भोजन की कई दुकानें हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा भी सस्ते आवास की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 6: वाराणसी कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: वाराणसी हवाई मार्ग (बाबतपुर हवाई अड्डा), रेल मार्ग (वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, केएसी), और सड़क मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग) द्वारा देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों या मंदिर ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क करके आप रूद्राभिषेक, महारुद्र, लघु रुद्र, स्पेशल भोग और श्रृंगार जैसी विशेष पूजाएँ करवा सकते हैं।

📝 श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्वितीय केंद्र है। यह स्थान हर भक्त को मोक्ष, शांति और आंतरिक परिवर्तन का अनुभव कराता है।

यहाँ की प्राचीन गलियाँ, गंगा की पवित्र धारा, शिवालयों की गूंजती घंटियाँ, और भक्तों की अटूट श्रद्धा एक ऐसा वातावरण निर्मित करती हैं जो अलौकिक है। चाहे आप एक सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको जीवन भर याद रहेगा।

काशी की यात्रा का अर्थ केवल दर्शन भर नहीं है; यह आत्मा की यात्रा है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर के शिव से मिलता है। भगवान विश्वनाथ की नगरी में आपका स्वागत है।

🕉️ हर हर महादेव ।। जय श्री काशी विश्वनाथ ।।

🕉️ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
मोक्ष की नगरी, विश्वनाथ की पावन धरा

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 29 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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