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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री शिवालय, सुंदरपुर: भगवान शिव का पवित्र धाम | Shri Shivalay Sundarpur: A Sacred Abode of Lord Shiva

299 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Shri Shivalay, Sundarpur, Varanasi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री शिवालय – सुंदरपुर, वाराणसी

भोलेनाथ की कृपा का साक्षात् धाम (Shri Shivalay, Sundarpur)

वाराणसी के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य शिव मंदिर

🌟 परिचय: श्री शिवालय का आध्यात्मिक महत्व

वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित श्री शिवालय भगवान शंकर को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की प्राचीन शिवलिंग, भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, जलाभिषेक तथा भजन-कीर्तन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, श्रावण मास, और सोमवारी व्रत के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जल चढ़ाने और भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक लघु काशी के समान है, जहाँ भगवान शिव का साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री शिवालय उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। सुंदरपुर वाराणसी शहर का एक प्रमुख आवासीय एवं धार्मिक क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही शिव भक्ति का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 8 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (BSB) है, जो लगभग 8 किमी दूर है। अन्य निकटवर्ती स्टेशन मंडुआडीह (MUV) और काशी (KEI) भी हैं।
  • सड़क मार्ग: सुंदरपुर सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी शहर, लखनऊ, प्रयागराज और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (बबतपुर) है, जो लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुंदरपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी जंक्शन से दूरी: ~8 किमी
काशी विश्वनाथ मंदिर से दूरी: ~5 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्री शिवालय, सुंदरपुर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी महर्षियों और सिद्ध पुरुषों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान तपस्वी को यहाँ भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनके अवतरण का आदेश दिया। तपस्वी ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत और दिव्य शिवलिंग प्राप्त हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और इसकी चमक तथा ऊर्जा अद्वितीय है। मान्यता है कि यहाँ स्थापित शिवलिंग पर नियमित जलाभिषेक करने से भगवान शिव अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जैसे श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का स्वागत, महाशिवरात्रि पर जागरण, और प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा।

🕊️

"यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ आकर शिवलिंग पर जल चढ़ाने और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 प्राचीन शिवलिंग और नक्काशी

श्री शिवालय की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और एक भव्य शिखर देखने को मिलता है। गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिस पर प्रतिदिन जल, दूध, बेलपत्र और भांग-धतूरे का अर्पण किया जाता है।

🎨 मंडप और भित्ति चित्र

मंदिर के मुख्य मंडप में भगवान शिव के विभिन्न रूपों (भैरव, नटराज, अर्धनारीश्वर) के मनोहर चित्र बने हैं। मंडप में बैठकर भक्त घंटा-घड़ियाल और भजन की ध्वनि का आनंद ले सकते हैं।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण वृक्षों से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। परिसर में एक प्राचीन वटवृक्ष भी है, जो पूजनीय है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

श्री शिवालय केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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शिव भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को शिव भजन, चालीसा और कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु "ॐ नमः शिवाय" का सामूहिक जाप करते हैं।

📖

शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और शिव-भक्ति में गहराई प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक करवाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ विधिवत पूजा-अर्चना करने और विभूति ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • ग्रह दोष निवारण: शिव पूजा से शनि, मंगल आदि ग्रहों के दोष शांत होते हैं। यह मंदिर इस दृष्टि से भी प्रसिद्ध है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।
  • विवाह में सुख-शांति: यहाँ विवाहित जोड़े नियमित पूजा करके वैवाहिक जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाते हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🔱

महाशिवरात्रि

फाल्गुन मास की चतुर्दशी को यहाँ रात्रि जागरण, भव्य रुद्राभिषेक, और भंडारे का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

💧

श्रावण मास

सावन के सोमवारों पर मंदिर विशेष रूप से सजाया जाता है। कांवड़िए यहाँ जल चढ़ाने आते हैं और पूरे मास विशेष आयोजन होते हैं।

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सोमवारी व्रत

प्रत्येक सोमवार को शिवालय में विशेष अभिषेक और सामूहिक रुद्र पाठ का आयोजन किया जाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर, लगभग 5 किमी दूर।
  • दशाश्वमेध घाट और गंगा आरती: वाराणसी का प्रमुख घाट, लगभग 5 किमी दूर।
  • श्री अन्नपूर्णा मंदिर: वाराणसी में स्थित माता अन्नपूर्णा का प्रसिद्ध मंदिर।
  • सारनाथ: बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण स्थल, लगभग 12 किमी दूर।
  • रामनगर किला: वाराणसी के रामनगर में स्थित ऐतिहासिक किला, लगभग 10 किमी दूर।
  • संकट मोचन हनुमान मंदिर: लगभग 7 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ-साथ आप श्री शिवालय, सुंदरपुर की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, और सारनाथ एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

वाराणसी में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप शिव भक्ति की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • सुबह की आरती (लगभग 5:30 बजे) और शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर विशेष व्यवस्थाएँ होती हैं, तब भीड़ अधिक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भोलेनाथ का भांग-धतूरा" और "विभूति" प्रसिद्ध है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री शिवालय, सुंदरपुर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी शहर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का स्वयंभू प्राचीन शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रुद्राभिषेक एवं शिव पुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और शिव भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुंदरपुर और आसपास कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। वाराणसी शहर में आवास की व्यापक सुविधाएँ हैं। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुंदरपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: वाराणसी जंक्शन (BSB) से टैक्सी या ऑटो द्वारा सुंदरपुर पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से वाराणसी के सभी प्रमुख क्षेत्रों से बसें और ऑटो उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, विशेष अभिषेक, या शिव पुराण कथा का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री शिवालय की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री शिवालय, सुंदरपुर वाराणसी का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शिव के करुणामय स्वरूप का साक्षात्कार करने का अवसर भी देता है।

यहाँ की प्राचीन शिवलिंग, भव्य रुद्राभिषेक, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं शिव भजन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

वाराणसी की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।।

🕊️ श्री शिवालय – सुंदरपुर, वाराणसी
भक्ति, संस्कृति और शिवमयता का साक्षात् धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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