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प्रामाणिक मंदिर विवरण

शिव मंदिर – सुरियावां, भदोही: भगवान शिव का प्राचीन एवं भव्य धाम | Shiv Mandir Suriyawan Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva

855 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 25 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Shiv Mandir, Suriyawan, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 शिव मंदिर – सुरियावां, भदोही

भगवान शिव की तपोभूमि, आस्था और शांति का अनुपम केंद्र (Shiv Mandir, Suriyawan, Bhadohi)

भदोही जिले के सुरियावां नगर में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य शिव मंदिर

🌟 परिचय: शिव मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

भदोही जिले के प्रसिद्ध नगर सुरियावां में स्थित शिव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, भव्य एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की शांत वातावरण, प्राचीन शिवलिंग, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, तथा भजन-कीर्तन मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि के समान है, जहाँ भक्ति और साधना का अनुभव साक्षात् किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (जिसे संत रविदास नगर भी कहा जाता है) के सुरियावां नगर में स्थित है। सुरियावां भदोही का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही – लगभग 15 किमी, वाराणसी – लगभग 45 किमी, इलाहाबाद (प्रयागराज) – लगभग 90 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन सुरियावां रेलवे स्टेशन (SRWN) है, जो कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए भदोही रेलवे स्टेशन (BOY) लगभग 15 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: सुरियावां सड़क मार्ग द्वारा भदोही, वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुरियावां, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~15 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शिव मंदिर, सुरियावां का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी महर्षियों और संतों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनका स्वयंभू शिवलिंग स्थापित करने का आदेश दिया। जब संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत, स्वयंभू शिवलिंग प्राप्त हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह शिवलिंग अपनी अनूठी बनावट और दिव्य ऊर्जा के लिए जाना जाता है। समय के साथ, स्थानीय शासकों और श्रद्धालुओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया। यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार, सुरियावां का नाम सूर्य ऋषि से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने यहाँ घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। तब से यह स्थान शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया।

🕉️

"यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी माना जाता है।"

मान्यता: इस मंदिर में जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और कठिन से कठिन रोगों से मुक्ति मिलती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 स्वयंभू शिवलिंग और प्राचीन मूर्तियाँ

शिव मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, गुंबद और भव्य प्रवेश द्वार देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिस पर सदैव जल अर्पित किया जाता है। शिवलिंग के साथ भगवान गणेश, माता पार्वती और नंदी जी की भी अलंकृत प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और नक्काशी

मंदिर की दीवारों पर शिव-पुराण की घटनाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना में लीन कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित बरगद का प्राचीन वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

शिव मंदिर, सुरियावां केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान शिव के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

📖

शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • रोग निवारण: मान्यता है कि यहाँ जलाभिषेक करने और भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र जपने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • विवाह में सुख-शांति: विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यहाँ विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🪔

महाशिवरात्रि

भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व। यहाँ रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

💧

श्रावण मास

सावन के पूरे महीने यहाँ विशेष रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा और भोलेनाथ का श्रृंगार किया जाता है। सोमवार के दिन विशेष रूप से भीड़ उमड़ती है।

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शिवरात्रि (प्रति मास)

हर महीने की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसमें विशेष पूजा और हवन का आयोजन होता है।

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शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🚩

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • श्री रविदास जन्मस्थान (सीर गोवर्धनपुर): संत रविदास का जन्मस्थान, भदोही से लगभग 12 किमी।
  • भदोही शहर: यहाँ के प्राचीन शिव मंदिर और काली मंदिर दर्शनीय हैं। (लगभग 15 किमी)
  • गोपीगंज: प्राचीन शिव मंदिरों के लिए प्रसिद्ध। (लगभग 20 किमी)
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी दूर।
  • ज्ञानपुर: ऐतिहासिक नगर, जहाँ कई प्राचीन मंदिर हैं। (लगभग 25 किमी)
📌 यात्रा टिप: वाराणसी या भदोही की यात्रा के दौरान आप शिव मंदिर, सुरियावां आसानी से जोड़ सकते हैं। यहाँ से वाराणसी, भदोही, और रविदास जन्मस्थान एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

सुरियावां में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप सावन की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भांग-धतूरा" प्रसिद्ध है, लेकिन संयम से ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शिव मंदिर, सुरियावां कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरियावां नगर में स्थित है। भदोही शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग, प्राचीन वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले भजन-कीर्तन एवं शिव पुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुरियावां में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए भदोही या वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुरियावां कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: सुरियावां रेलवे स्टेशन (SRWN) कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से भदोही, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या विशेष पूजा का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 शिव मंदिर, सुरियावां की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

शिव मंदिर, सुरियावां भदोही जिले का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शिव की आराधना में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर हर महादेव ।। जय भोलेनाथ ।।

🕉️ शिव मंदिर – सुरियावां, भदोही
भक्ति, संस्कृति और आस्था का साक्षात् धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 25 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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