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तरकुल्हा देवी धाम – भदोही जिला (गोरखपुर सीमा): शक्ति का अद्भुत धाम | Tarkulha Devi Dham Bhadohi: A Sacred Abode of Divine Power

1,994 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Tarkulha Devi आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Tarkulha Devi
स्थान / पता Tarkulha Devi Dham, Tarkulha, Bhadohi District, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 तरकुल्हा देवी धाम – भदोही जिला (गोरखपुर सीमा)

शक्ति, भक्ति और आस्था का सिद्ध पीठ (Tarkulha Devi Dham, Bhadohi)

भदोही जिले में गोरखपुर सीमा पर स्थित एक प्राचीन एवं दिव्य शक्तिपीठ

🌟 परिचय: तरकुल्हा देवी धाम का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, गोरखपुर सीमा के समीप स्थित तरकुल्हा देवी धाम माँ दुर्गा के एक अत्यंत प्राचीन, दिव्य एवं चमत्कारी स्वरूप को समर्पित है। यह स्थान न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र है।

तरकुल्हा देवी धाम अपनी शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और यहाँ होने वाले विशेष अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान मान्यताओं के अनुसार एक सिद्ध पीठ है, जहाँ सच्चे मन से माँ की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गाष्टमी और चैत्र मास में यहाँ विशाल मेले और झाँकियों का आयोजन होता है, जिसमें हजारों भक्त सहभागिता करते हैं।

यह धाम अपने आप में एक अद्भुत तांत्रिक एवं आध्यात्मिक साधना स्थल भी माना जाता है, जहाँ सिद्ध संतों और साधकों ने अपनी साधना पूर्ण की है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

तरकुल्हा देवी धाम उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, गोरखपुर सीमा (उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा के निकट) पर स्थित है। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (लगभग 30 किमी), वाराणसी (लगभग 60 किमी), गोरखपुर (लगभग 100 किमी)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (स्टेशन कोड: BHB) या वाराणसी (BSB) है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
  • सड़क मार्ग: यह स्थान सड़क मार्ग द्वारा भदोही, वाराणसी, गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 60 किमी दूर है।
🗺️

तरकुल्हा, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~30 किमी
वाराणसी से दूरी: ~60 किमी
गोरखपुर से दूरी: ~100 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तरकुल्हा देवी धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल उस समय से पूजित है जब यह क्षेत्र कोसल और मगध की सीमा पर एक घने जंगल के रूप में था। कहा जाता है कि एक प्राचीन संत को यहाँ माँ दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन दिए और उन्हें इस स्थान पर अपनी एक चमत्कारी प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने खुदाई करवाई तो माँ की एक अद्भुत और स्वयंभू प्रतिमा प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह प्रतिमा माँ दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की है, जो अपने हाथों में त्रिशूल, खड्ग, चक्र और शंख धारण किए हुए हैं। समय के साथ, स्थानीय राजाओं और भक्तों के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख शक्तिपीठ बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई साधना परंपराएँ और अनुष्ठान निभाए जाते हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🔱

"तरकुल्हा देवी की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन एवं स्वयंभू मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर माँ तरकुल्हा देवी की सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 दिव्य प्रतिमा और शिखर

तरकुल्हा देवी मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जिसमें ऊँचा शिखर, सुंदर नक्काशी और भव्य प्रवेश द्वार देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में माँ दुर्गा की करीब 3 फीट ऊँची मनमोहक प्रतिमा विराजमान हैं, जो काले पत्थर से बनी हुई है और अत्यंत प्रभावशाली दिखती है।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और देवी-देवताओं के चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और यज्ञशाला

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका और विशाल यज्ञशाला है, जहाँ नियमित रूप से हवन-यज्ञ और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। परिसर में स्थित पीपल का वृक्ष भी विशेष पूजनीय है।

🧘 साधना, यज्ञ और भक्ति का केंद्र

तरकुल्हा देवी धाम केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह तांत्रिक साधना, यज्ञ और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

दुर्गा सप्तशती पाठ

प्रतिदिन सुबह-शाम दुर्गा सप्तशती का पाठ और चंडी पाठ का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

📖

श्री दुर्गा भागवत कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली दुर्गा भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🔥

हवन और यज्ञ

विशेष अवसरों पर विशाल हवन-यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जो सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से माँ की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।
  • विवाह में सुख-शांति: यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है और विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
  • तांत्रिक साधना का केंद्र: यह स्थान सिद्ध साधकों और तांत्रिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ विशिष्ट अनुष्ठान किए जाते हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🌸

चैत्र नवरात्रि

चैत्र मास में शारदीय नवरात्रि की तरह ही भव्य आयोजन होता है। यहाँ 9 दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ, जागरण और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

🪔

शारदीय नवरात्रि

आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि का मेला विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है। अष्टमी और नवमी के दिन विशाल श्रृंगार और भंडारे का आयोजन होता है।

🔱

दुर्गाष्टमी

प्रत्येक मास की अष्टमी तिथि को विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाता है। इस दिन हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

🎨

चैत्र मेला

चैत्र मास में यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और झाँकियाँ आकर्षण का केंद्र होती हैं।

📿

दुर्गा सप्तशती पाठ सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ और भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • भदोही (संत रविदास नगर): यहाँ के प्रसिद्ध संत रविदास मंदिर, माँ दुर्गा मंदिर और रामलीला मैदान दर्शनीय हैं। (लगभग 30 किमी)
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ, भारत माता मंदिर आदि। (लगभग 60 किमी)
  • गोरखपुर: गोरखनाथ मंदिर, इमामबाड़ा, और आस-पास के प्राकृतिक स्थल। (लगभग 100 किमी)
  • जौनपुर: जौनपुर का शाही किला, अटाला मस्जिद, और यमुना नदी के घाट। (लगभग 80 किमी)
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन। (लगभग 120 किमी)
📌 यात्रा टिप: वाराणसी, भदोही और गोरखपुर के दर्शन करते हुए आप तरकुल्हा देवी धाम की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से वाराणसी और भदोही एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

तरकुल्हा देवी धाम की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • नवरात्रि (चैत्र और आश्विन): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • नवरात्रि के दौरान यहाँ भीड़ अधिक होती है, अत: पहले से योजना बनाएँ।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था रहती है।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "बूंदी का प्रसाद" और "चुनरी" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: तरकुल्हा देवी धाम कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में, गोरखपुर सीमा के समीप स्थित है। भदोही शहर से लगभग 30 किलोमीटर और वाराणसी से लगभग 60 किलोमीटर दूर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन स्वयंभू दुर्गा प्रतिमा, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन-यज्ञ एवं तांत्रिक साधना परंपराएँ हैं। यह स्थान अपनी सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। नवरात्रि (चैत्र और आश्विन) के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर में भक्तों के लिए धर्मशाला और भोजनालय की सुविधा उपलब्ध है। बेहतर आवास के लिए वाराणसी या भदोही जाना अधिक सुविधाजनक रहता है।

प्रश्न 6: तरकुल्हा देवी धाम कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BHB) और वाराणसी (BSB) हैं। सड़क मार्ग से भदोही, वाराणसी, गोरखपुर और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, हवन, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 तरकुल्हा देवी धाम की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

तरकुल्हा देवी धाम, भदोही जिले का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को माँ दुर्गा की असीम कृपा का अनुभव करने का अवसर भी देता है।

यहाँ की दिव्य प्रतिमा, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ एवं हवन-यज्ञ हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही जिले की इस पवित्र भूमि पर स्थित यह धाम उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो माँ दुर्गा की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय माँ दुर्गा ।। जय तरकुल्हा देवी ।।

🕊️ तरकुल्हा देवी धाम – भदोही जिला (गोरखपुर सीमा)
शक्ति, भक्ति और साधना का सिद्ध पीठ

आदिशक्ति माता दुर्गा के ५१ पवित्र धामों की पौराणिक कथाओं के लिए शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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