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प्रामाणिक मंदिर विवरण

महादेव मंदिर – भदोही: शिव भक्ति और आस्था का अद्भुत केंद्र | Mahadev Mandir Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva

2,537 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Mahadev आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Mahadev
स्थान / पता Mahadev Mandir, Bhadohi, Uttar Pradesh, India
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 महादेव मंदिर – भदोही

भगवान शिव की कृपा का साक्षात् धाम (Mahadev Mandir, Bhadohi)

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य शिव मंदिर

🌟 परिचय: महादेव मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, शांत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, शिव चालीसा, भजन-कीर्तन तथा प्रवचन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार, और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जल चढ़ाने, बिल्वपत्र अर्पित करने और शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक लघु कैलाश के समान है, जहाँ भोलेनाथ की उपस्थिति साक्षात् अनुभव की जा सकती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित है। यह शहर अपनी हस्तशिल्प उद्योग के लिए प्रसिद्ध है और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी, प्रयागराज – लगभग 100 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BDHI) है, जो कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए वाराणसी जंक्शन (BSB) या जौनपुर जंक्शन (JNU) सबसे नज़दीकी बड़े स्टेशन हैं।
  • सड़क मार्ग: भदोही सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

भदोही, उत्तर प्रदेश, भारत

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~100 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

महादेव मंदिर, भदोही का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी महान ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी मनमोहक शिवलिंग स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत और दिव्य शिवलिंग प्राप्त हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और इसकी चमकदार छटा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया। यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

कहा जाता है कि यहाँ पांडवों ने भी अपने वनवास काल में कुछ समय बिताया था और शिव की उपासना की थी, जिसके चलते इस स्थान की महिमा और बढ़ गई।

🕊️

"यहाँ का शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ आकर भगवान शिव का सच्चे मन से जलाभिषेक करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक शिवलिंग और नक्काशी

महादेव मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य शिखर देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिसके साथ माता पार्वती की भी एक सुंदर प्रतिमा स्थापित है।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर शिव-पुराण की घटनाओं और भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित बेल वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि शिव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

महादेव मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु शिव भजनों और मंत्रों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

📖

शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • रोग निवारण: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जल चढ़ाने और बिल्वपत्र अर्पित करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से शिव पंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • कर्ज मुक्ति: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और शिव चालीसा का पाठ करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व। यहाँ रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, और महाभोग का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌧️

सावन सोमवार

सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक और जल चढ़ाने का आयोजन किया जाता है। यहाँ शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है, साथ ही मंदिर के जलाशय में दीपदान का विशेष महत्व है।

📿

शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

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श्रावणी मेला

सावन के महीने में यहाँ भव्य मेला लगता है, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति संध्या का आयोजन होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ, माँ अन्नपूर्णा मंदिर – लगभग 45 किमी दूर।
  • श्री रविदास जन्मस्थान: संत रविदास का जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर, भदोही से लगभग 10 किमी दूर है।
  • जौनपुर: शाही किला, अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद – लगभग 40 किमी दूर।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, हनुमान मंदिर, आनंद भवन, इलाहाबाद किला – लगभग 100 किमी दूर।
  • चुनारगढ़ किला: ऐतिहासिक चुनार किला और मां दुर्गा मंदिर – लगभग 35 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी की यात्रा के साथ-साथ आप महादेव मंदिर, भदोही की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से श्री रविदास जन्मस्थान और चुनारगढ़ किला एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • सावन का महीना (जुलाई-अगस्त): यदि आप सावन सोमवार की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "शिवजी का भभूत" (विभूति) प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित है। वाराणसी से लगभग 45 किलोमीटर और प्रयागराज से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रुद्राभिषेक एवं शिव पुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BDHI) कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी (VNS) है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 महादेव मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

महादेव मंदिर, भदोही एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शिव की कृपा का अनुभव करने का अवसर भी देता है।

यहाँ की मनमोहक शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर हर महादेव ।। ॐ नमः शिवाय ।।

🕊️ महादेव मंदिर – भदोही (संत रविदास नगर)
भक्ति, संस्कृति और शिवमयी चेतना का साक्षात् धाम

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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