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प्रामाणिक मंदिर विवरण

संत रविदास मंदिर – भदोही: संत रविदास की तपोभूमि और सामाजिक समरसता का प्रतीक | Sant Ravidas Mandir Bhadohi: A Sacred Land of Equality and Devotion

463 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Sant Ravidas आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Sant Ravidas
स्थान / पता Sant Ravidas Mandir, Bhadohi, Sant Ravidas Nagar, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 संत रविदास मंदिर – भदोही

संत रविदास की तपोभूमि, भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्वितीय केंद्र (Sant Ravidas Mandir, Bhadohi)

उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर (भदोही) में स्थित ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धाम

🌟 परिचय: संत रविदास मंदिर का आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व

उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर (भदोही) जिले में स्थित संत रविदास मंदिर महान संत, समाज सुधारक और भक्ति कवि संत रविदास को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह मंदिर न केवल रविदासिया समुदाय के लिए, बल्कि समस्त मानवता के लिए प्रेम, समानता और भक्ति का संदेश देने वाला प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है।

संत रविदास का जीवन और उनकी वाणी आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देती है। यह मंदिर उनकी तपोभूमि मानी जाती है, जहाँ उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और मानवता की सेवा का मार्ग दिखाया। यहाँ की शांत वातावरण, नियमित सत्संग, भजन-कीर्तन और संत रविदास के दोहों का पाठ भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-शुद्धि का अनुभव कराता है।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से संत रविदास का स्मरण करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं, सामाजिक सम्मान मिलता है और भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह स्थान अपने आप में एक सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जहाँ जाति, धर्म और वर्ग के बंधनों से ऊपर उठकर सभी एकता के सूत्र में बंधते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुँचें (Location & How to Reach)

संत रविदास मंदिर उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर (भदोही) जिले के मुख्यालय भदोही नगर में स्थित है। यह जिला वाराणसी मण्डल का भाग है और ऐतिहासिक रूप से संत रविदास की कर्मभूमि रहा है। आज यह जिला उनके नाम पर ही "संत रविदास नगर" के नाम से जाना जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी, इलाहाबाद (प्रयागराज) – लगभग 115 किमी
  • रेल मार्ग: भदोही रेलवे स्टेशन (BDHI) शहर में ही स्थित है, जो कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। वाराणसी जंक्शन (BSB) सबसे नज़दीकी बड़ा स्टेशन है, जो लगभग 45 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: भदोही राष्ट्रीय राजमार्ग NH-31 (पुराना NH-2) पर स्थित है, जो वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ आदि शहरों से सीधे जुड़ा है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

भदोही, संत रविदास नगर, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~115 किमी

📜 संत रविदास का जीवन दर्शन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

संत रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में वाराणसी के समीप एक गाँव में हुआ था, लेकिन उनकी साधना और शिक्षाओं का केंद्र भदोही क्षेत्र रहा। वे एक महान संत, कवि और समाज सुधारक थे, जिन्होंने जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उनके दोहे और पद आज भी "गुरु ग्रंथ साहिब" में सम्मिलित हैं और समस्त मानवता को प्रेम, भक्ति और समानता का संदेश देते हैं।

संत रविदास ने "मन चंगा तो कठौती में गंगा" जैसी अमर वाणी से यह सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति और आंतरिक शुद्धता ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है, न कि बाहरी आडंबर। उन्होंने समाज के हर वर्ग को भक्ति का अधिकारी बताया और अपने जीवन से यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि सेवा और सद्भावना ही सच्ची पूजा है।

भदोही क्षेत्र में उनके अनुयायियों ने उनकी स्मृति में इस मंदिर का निर्माण करवाया, जो आज उनके दर्शन, उपदेश और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। यहाँ आज भी संत रविदास के मूल उपदेशों के अनुसार सभी जाति-धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के पूजा-अर्चना करते हैं।

🕊️

"मन चंगा तो कठौती में गंगा।"
– संत रविदास

मान्यता: यहाँ आकर संत रविदास के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने से मन की शुद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

🏛️ मंदिर की भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मूर्तियाँ और प्रतीकात्मकता

संत रविदास मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सफेद संगमरमर का प्रयोग किया गया है। गर्भगृह में संत रविदास की प्रतिमा विराजमान है, जिसमें वे भक्ति भाव से अपने हाथों में पवित्र ग्रंथ और तुलसी की माला लिए दिखाई देते हैं। मंदिर परिसर में उनके जीवन की झाँकियाँ और उनके दोहों की पट्टिकाएँ लगाई गई हैं।

🎨 भित्ति चित्र और दृश्यात्मक आकर्षण

मंदिर की दीवारों पर संत रविदास के जीवन की प्रमुख घटनाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो आगंतुकों को उनके दर्शन और शिक्षाओं से परिचित कराते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और ध्यान केंद्र

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका और ध्यान केंद्र है, जहाँ भक्त बैठकर संत रविदास के दोहों का मनन और ध्यान कर सकते हैं। परिसर में एक पवित्र कुआँ भी है, जो संत रविदास के काल से जुड़ा माना जाता है।

🧘 सत्संग, भजन और सामाजिक समरसता का केंद्र

संत रविदास मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को संत रविदास के दोहों और भजनों का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु सामूहिक रूप से भक्ति में डूब जाते हैं।

📖

प्रवचन और सत्संग

प्रत्येक रविवार और विशेष अवसरों पर संत रविदास के दर्शन और जीवन पर प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।

🤝

सामाजिक कार्य

मंदिर परिसर से सामूहिक भोज (लंगर), निःशुल्क चिकित्सा शिविर और शैक्षिक सहायता जैसे कार्य चलाए जाते हैं, जो संत रविदास के सेवा भाव को दर्शाते हैं।

ये सभी गतिविधियाँ भक्तों में आपसी प्रेम, समानता और सेवा की भावना को विकसित करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएँ

  • मन की शुद्धि: यहाँ आकर संत रविदास के दोहों का पाठ करने से मन शुद्ध होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
  • सामाजिक सम्मान: मान्यता है कि संत रविदास की कृपा से समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान की प्राप्ति होती है।
  • रोग निवारण: यहाँ की पवित्र जलधारा और प्रसाद ग्रहण करने से शारीरिक व मानसिक रोगों में राहत मिलती है।
  • भक्ति में रुचि: नियमित सत्संग से भक्ति मार्ग में रुचि बढ़ती है और जीवन सार्थक होता है।
  • सामाजिक एकता: यह स्थान सभी जातियों और वर्गों के लोगों को एक साथ लाने वाला अद्भुत केंद्र है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

संत रविदास जयंती

फाल्गुन मास की पूर्णिमा (फरवरी-मार्च) को पूरे भारत में संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस दिन मंदिर में भव्य शोभायात्रा, प्रवचन, भजन-कीर्तन और सामूहिक भोज का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

📿

गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष सत्संग और गुरु-वंदना का आयोजन किया जाता है।

🎨

रविदास महोत्सव

हर वर्ष संत रविदास जयंती के उपलक्ष्य में सप्ताह भर चलने वाला सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें देशभर से कलाकार भाग लेते हैं।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📖

रविदास सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय प्रवचन श्रृंखला आयोजित की जाती है, जिसमें संत रविदास के साहित्य पर गहन चर्चा होती है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ, संत रविदास गुरु घाट (लगभग 45 किमी)।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन (लगभग 115 किमी)।
  • जौनपुर: जामा मस्जिद, शाही किला, अटाला मस्जिद (लगभग 60 किमी)।
  • गोपीगंज (भदोही): यहाँ स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर भी दर्शनीय है।
  • सीतामढ़ी (भदोही): एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल।
📌 यात्रा टिप: संत रविदास मंदिर भदोही की यात्रा के साथ-साथ आप वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं। वाराणसी में संत रविदास गुरु घाट दर्शन अवश्य करें।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। संत रविदास जयंती (फरवरी-मार्च) के अवसर पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, जो यात्रा के लिए आदर्श समय है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय।
  • संत रविदास जयंती (फाल्गुन पूर्णिमा): यदि आप उत्सव की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और सायं 4:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में अवश्य शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था (लंगर) उपलब्ध है।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "चरणामृत" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: संत रविदास मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर (भदोही) जिले के मुख्यालय भदोही नगर में स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर का विशेष महत्व क्या है?

उत्तर: यह मंदिर महान संत रविदास को समर्पित है और उनकी तपोभूमि माना जाता है। यहाँ सामाजिक समरसता, भक्ति और संत रविदास के उपदेशों को जीवित रखा जाता है। यह स्थान सभी जाति-धर्म के लोगों के लिए समान रूप से पवित्र है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। संत रविदास जयंती (फाल्गुन पूर्णिमा) के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर में सामूहिक भोज (लंगर) की व्यवस्था रहती है।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BDHI) ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से NH-31 पर वाराणसी, प्रयागराज आदि शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, हवन या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 संत रविदास मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक एवं सामाजिक लाभ

संत रविदास मंदिर, भदोही केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र है जहाँ भक्ति के साथ-साथ सामाजिक समरसता और मानवता का संदेश मिलता है। संत रविदास की वाणी आज भी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति मन की शुद्धि और दूसरों की सेवा में निहित है।

यहाँ की शांत वाटिका, भक्तिमय वातावरण, नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन हर आगंतुक को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। चाहे आप संत रविदास के अनुयायी हों, आध्यात्मिक साधक हों, या सामाजिक समानता के पक्षधर हों, यह स्थान आपको अविस्मरणीय अनुभव देगा।

संत रविदास नगर (भदोही) की यह धरती महान संत की स्मृतियों से सजी है, और यह मंदिर उनके सिद्धांतों को सहेजे हुए है। यहाँ आकर आप न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करते हैं, बल्कि एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा बनते हैं जो जाति-पाति से ऊपर उठकर सभी को एक समान देखता है।

🙏 जय संत रविदास ।। जय मानवता ।।

🕊️ संत रविदास मंदिर – भदोही, उत्तर प्रदेश
सामाजिक समरसता, भक्ति और मानवता का अनुपम धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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