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प्रामाणिक मंदिर विवरण

कल्याणेश्वर मंदिर – भदोही: शिव भक्ति का प्राचीन एवं पवित्र धाम | Kalyaneshwar Mandir Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva

470 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Kalyaneshwar Mandir, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 कल्याणेश्वर मंदिर – भदोही

भगवान शिव का प्राचीन, भव्य एवं चमत्कारी धाम (Kalyaneshwar Mandir, Bhadohi)

उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शिव मंदिर

🌟 परिचय: कल्याणेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

भदोही जिला (जिसे अब संत रविदास नगर के नाम से भी जाना जाता है) के हृदय में स्थित कल्याणेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, भव्य और आस्था का केंद्र है। यह मंदिर न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि दूर-दूर से आने वाले शिवभक्तों के लिए भी श्रद्धा का प्रमुख स्थल है।

यहाँ का वातावरण गहरी आध्यात्मिकता, प्राचीन वास्तुकला और नियमित अनुष्ठानों से ओतप्रोत है। मंदिर परिसर में स्थापित भव्य शिवलिंग की पूजा-अर्चना से भक्तों को मानसिक शांति, आरोग्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विशेषकर श्रावण मास, महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के अवसर पर यहाँ हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करने से कल्याण (कल्याण) होता है – जीवन की सभी मुश्किलें दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम “कल्याणेश्वर” पड़ा।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

कल्याणेश्वर मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के मुख्य शहर भदोही में स्थित है। यह शहर वाराणसी और प्रयागराज के बीच स्थित होने के कारण धार्मिक एवं व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी, प्रयागराज – लगभग 90 किमी
  • रेल मार्ग: भदोही का अपना रेलवे स्टेशन भदोही (BOY) है, जो दिल्ली-हावड़ा मुख्य लाइन से जुड़ा है। कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें यहाँ रुकती हैं।
  • सड़क मार्ग: भदोही राष्ट्रीय राजमार्ग NH 19 (पूर्व NH 2) से जुड़ा है। वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर आदि से नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 50 किमी दूर है।
🗺️

भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~90 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कल्याणेश्वर मंदिर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में यह स्थान घने वनों से आच्छादित था। यहाँ एक महान ऋषि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और यहाँ स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से यह स्थान “कल्याणेश्वर” (कल्याण करने वाले ईश्वर) के नाम से विख्यात हो गया।

बाद में स्थानीय राजाओं और भक्तों ने इस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर की वास्तुकला में मुगलकालीन और राजपूत शैली का सम्मिश्रण देखने को मिलता है, जो विभिन्न कालखंडों में हुए जीर्णोद्धार को दर्शाता है।

आज भी यहाँ पर प्राचीन काल से चली आ रही परंपराएँ निभाई जाती हैं, जैसे कि हर सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक, श्रावण मास में कांवड़ियों की भारी भीड़, और महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण।

🕉️

“यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयंभू एवं अत्यंत प्राचीन माना जाता है।”

मान्यता: कल्याणेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से संतान सुख, धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 भव्य शिवलिंग और मंडप

गर्भगृह में स्थापित कल्याणेश्वर शिवलिंग लगभग 3 फुट ऊँचा है और अपने चमकदार, चिकने पत्थर के लिए प्रसिद्ध है। शिवलिंग के ऊपर हमेशा जलधारा बहती रहती है, जो अखंड धारा का प्रतीक है। मंडप में भगवान शिव की सुंदर मूर्तियाँ, नंदी जी की विशाल प्रतिमा और अन्य देवी-देवताओं के चित्र बने हैं।

🎨 नक्काशी और शिल्प कला

मंदिर की दीवारों पर शिव पुराण के दृश्यों की सुंदर नक्काशी की गई है। प्रवेश द्वार पर बने पुष्पाकार अलंकरण और स्तंभों पर की गई बारीक कारीगरी दर्शनीय है।

🌳 विशाल परिसर और वाटिका

मंदिर का प्रांगण अत्यंत विशाल है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान, भजन और प्रवचन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में एक पुराना बरगद का पेड़ है, जिसके नीचे नियमित रूप से सत्संग आयोजित होते हैं।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

कल्याणेश्वर मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

भजन-कीर्तन

प्रतिदिन संध्या को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु शिव स्तुति और भजन गाते हैं।

📖

शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में निःशुल्क योग शिविर और ध्यान सत्र लगाए जाते हैं।

ये सभी गतिविधियाँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोकामना सिद्धि: मान्यता है कि सोलह सोमवार व्रत यहाँ आकर पूजन करने से मनोवांछित फल अवश्य मिलता है।
  • कल्याण की प्राप्ति: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यहाँ पूजा करने से जीवन का कल्याण होता है और सभी विघ्न दूर होते हैं।
  • आरोग्य लाभ: भक्तों का विश्वास है कि यहाँ के जल से स्नान और अभिषेक करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • पितृ दोष निवारण: यहाँ पिंडदान और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🌊

श्रावण मास

पूरे सावन माह में यहाँ विशेष रुद्राभिषेक होता है और कांवड़ियों की अटूट भीड़ रहती है।

🕉️

महाशिवरात्रि

इस दिन मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। रात्रि जागरण और भव्य भंडारे का आयोजन होता है।

🗓️

सोमवार व्रत

प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा और सामूहिक रुद्राभिषेक आयोजित किया जाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, आनंद भवन – लगभग 90 किमी।
  • मिर्जापुर: विंध्याचल मंदिर, आशापुरी देवी मंदिर – लगभग 65 किमी।
  • सीतामढ़ी-हरदत्तपुर (भदोही): यहाँ का प्राचीन सीता कुंड और हनुमान मंदिर भी दर्शनीय है।
  • भदोही संत रविदास मंदिर: संत रविदास जी का प्रसिद्ध स्थल – लगभग 12 किमी।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी, प्रयागराज या मिर्जापुर की यात्रा के दौरान कल्याणेश्वर मंदिर, भदोही आसानी से जोड़ा जा सकता है। यह सभी प्रमुख शहरों से सड़क और रेल मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। यदि आप श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में शिव भक्ति का अनूठा उत्सव देखना चाहते हैं तो यह समय भी अत्यंत विशेष है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास और महाशिवरात्रि: त्योहारी धूम का अनुभव करने के लिए सर्वोत्तम।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में अवश्य शामिल हों।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का “भांग” और “महाप्रसाद” प्रसिद्ध है, लेकिन कानूनी सीमाओं का ध्यान रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: कल्याणेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले के मुख्य शहर भदोही में स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग, प्राचीन वास्तुकला, और श्रावण मास में होने वाला विशाल कांवड़ मेला प्रमुख आकर्षण हैं।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च का समय मौसम की दृष्टि से सर्वोत्तम है, जबकि श्रावण मास और महाशिवरात्रि में विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई होटल और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी भी निकट है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था है।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BOY) कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से NH 19 (पूर्व NH 2) से आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी (VNS) है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत, और विशेष अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं।

📝 कल्याणेश्वर मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

कल्याणेश्वर मंदिर, भदोही उत्तर प्रदेश के उन प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भगवान शिव की असीम कृपा का अनुभव कराता है।

यहाँ का भव्य शिवलिंग, मनमोहक आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को आध्यात्मिक आनंद से भर देते हैं। चाहे आप शिव भक्त हों, साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, कल्याणेश्वर मंदिर आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

वाराणसी और प्रयागराज के बीच स्थित यह पवित्र धाम उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

ॐ नमः शिवाय ।। जय कल्याणेश्वर महादेव ।।

🕉️ कल्याणेश्वर मंदिर – भदोही
शिव भक्ति, संस्कृति और कल्याण का साक्षात् धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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