आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
प्रामाणिक मंदिर विवरण

काली माता मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र: शक्ति का प्राचीन एवं भव्य धाम | Kali Mata Temple Bhadohi Railway Station: A Sacred Abode of Divine Power

1,135 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Kali Mata आराध्य देव
प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक दर्शन समय
शाम: लगभग 7:00 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Kali Mata
दर्शन समय प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक
आरती समय शाम: लगभग 7:00 बजे
स्थान / पता Kali Mata Mandir, Bhadohi Railway Station Area, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 काली माता मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र

शक्ति, भक्ति और सिद्धि का साक्षात् धाम (Kali Mata Mandir, Bhadohi Railway Station)

भदोही रेलवे स्टेशन के समीप स्थित एक प्राचीन एवं शक्तिशाली काली माता मंदिर

🌟 परिचय: काली माता मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

भदोही जिले के भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र में स्थित काली माता मंदिर आदि शक्ति माँ काली को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक एवं चमत्कारी धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की शांत वातावरण, माँ की भव्य मूर्ति, और नियमित रूप से होने वाली आरती, भजन-कीर्तन तथा विशेष अनुष्ठान भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि और अमावस्या के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से माँ काली भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और उन्हें नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति दिलाती हैं। यह स्थान अपने आप में एक सिद्ध पीठ के समान है, जहाँ माँ की करुणा और शक्ति का साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

यह प्राचीन काली माता मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के मुख्यालय भदोही नगर में रेलवे स्टेशन के अत्यंत निकट स्थित है। भदोही, जिसे संत रविदास नगर के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐतिहासिक और औद्योगिक रूप से समृद्ध शहर है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी, इलाहाबाद (प्रयागराज) – लगभग 120 किमी
  • रेल मार्ग: मंदिर भदोही रेलवे स्टेशन (BOY) से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्टेशन दिल्ली-कोलकाता मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है, जिससे देश के सभी प्रमुख शहरों से यहाँ पहुँचना अत्यंत सुगम है।
  • सड़क मार्ग: भदोही सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

भदोही रेलवे स्टेशन, भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~120 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

काली माता मंदिर, भदोही का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल प्राचीन काल में सिद्ध संतों और तांत्रिकों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक बार यहाँ घोर अराजकता और अत्याचार का वातावरण था। तब एक महान संत ने यहाँ आकर माँ काली की कठोर तपस्या की। माँ प्रसन्न हुईं और उन्होंने संत को दर्शन देकर इस स्थान पर उनकी एक चमत्कारी मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया।

मान्यता है कि उसी समय से यह मंदिर अस्तित्व में आया और तब से आज तक यह स्थान शक्ति का एक जीवंत केंद्र बना हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माँ काली की प्रतिमा अत्यंत भव्य और दिव्य है, जो अपने भक्तों को सभी प्रकार के भय से मुक्ति प्रदान करती है। समय के साथ, स्थानीय राजाओं और भक्तों के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख शक्तिपीठ बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"यह माँ काली की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन, सिद्ध एवं चमत्कारी मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर माँ काली का सच्चे मन से स्मरण करने से भय, शत्रु और रोगों से मुक्ति मिलती है और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

काली माता मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य शिखर देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में माँ काली की भव्य मूर्ति विराजमान हैं, जिनके साथ भैरव और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर दुर्गा सप्तशती और देवी महात्म्य की घटनाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान, जाप और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित विशाल पीपल का वृक्ष भी आकर्षण का केंद्र है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

काली माता मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह शक्ति साधना और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

दुर्गा सप्तशती पाठ

प्रतिदिन और विशेष रूप से नवरात्रि में श्रद्धालु सामूहिक रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं।

📖

श्रीरामचरितमानस एवं देवी भागवत कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली भागवत और देवी कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • भय से मुक्ति: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से सभी प्रकार के भय (भूत-प्रेत, शत्रु, आदि) से मुक्ति मिलती है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से माँ काली की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और दुर्गा पाठ से शक्ति साधना में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🪔

चैत्र/शारदीय नवरात्रि

वर्ष में दो बार होने वाले नवरात्रि उत्सव यहाँ अत्यंत धूमधाम से मनाए जाते हैं। कलश स्थापना, दुर्गा पाठ, हवन और रात्रि जागरण का आयोजन होता है।

🕯️

दीपावली (काली पूजा)

दीपावली के दिन यहाँ काली पूजा का विशेष आयोजन होता है। हजारों की संख्या में भक्त माँ के दर्शन करने आते हैं।

🌑

प्रत्येक अमावस्या

प्रत्येक अमावस्या के दिन माँ काली की विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माँ के दर्शन करते हैं।

🙏

दुर्गाष्टमी एवं शनि अमावस्या

इन विशेष अवसरों पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, काल भैरव मंदिर, सारनाथ आदि। (लगभग 45 किमी)
  • सीतामढ़ी (भदोही): सीता समाहित स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह स्थान भदोही शहर से लगभग 8 किमी दूर है।
  • माँ विंध्यवासिनी धाम (विंध्याचल): प्रसिद्ध शक्तिपीठ विंध्याचल मंदिर, लगभग 70 किमी दूर।
  • प्रयागराज (त्रिवेणी संगम): पवित्र संगम स्थल लगभग 120 किमी दूर है।
  • भदोही के हस्तनिर्मित कालीन बाजार: भदोही अपने विश्व प्रसिद्ध कालीनों के लिए जाना जाता है। यहाँ की कालीन बाजार की यात्रा भी एक अलग अनुभव है।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी के दर्शन करते हुए आप काली माता मंदिर, भदोही की यात्रा आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से सीतामढ़ी और विंध्याचल धाम भी निकट हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • नवरात्रि (मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक और ऊर्जावर्धक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय और प्रसादालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "काली चूरमा" और सिंदूर प्रसिद्ध है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: काली माता मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के भदोही नगर में भदोही रेलवे स्टेशन के अत्यंत निकट स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन, सिद्ध और चमत्कारी माँ काली की मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ नवरात्रि एवं अमावस्या पर आयोजित होने वाले विशेष अनुष्ठान हैं। साथ ही, रेलवे स्टेशन से इसकी निकटता इसे अत्यंत सुलभ बनाती है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। नवरात्रि और दीपावली के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही शहर में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास और अधिक विकल्पों के लिए वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BOY) दिल्ली-कोलकाता मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है, जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन, या अन्य अनुष्ठान करवा सकते हैं।

📝 काली माता मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र में स्थित काली माता मंदिर, शक्ति, भक्ति और सिद्धि का एक अद्भुत संगम है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति दिलाकर उन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर देता है।

यहाँ की भव्य मूर्तियाँ, मनमोहक आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले दुर्गा पाठ एवं सत्संग हर किसी को शक्ति साधना के रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय और ऊर्जावर्धक अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की इस पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो आदि शक्ति माँ काली की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं सुरक्षा की कामना रखते हैं।

🙏 जय माँ काली ।। ॐ काली काली महाकाली ।।

🕊️ काली माता मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र, भदोही
शक्ति, भक्ति और सिद्धि का साक्षात् धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

दर्शनार्थियों के अनुभव (0)

अपना दर्शन अनुभव व समीक्षा साझा करें

विवरण कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });