आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री शिव मंदिर – औराई, प्रयागराज: भोलेनाथ का भव्य धाम, आस्था और आराधना का केंद्र | Shri Shiv Mandir Aurai Prayagraj: A Sacred Abode of Lord Shiva

579 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 25 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Shri Shiv Mandir, Aurai, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री शिव मंदिर – औराई, प्रयागराज

जय भोलेनाथ! महादेव की कृपा का साक्षात् धाम (Shri Shiv Mandir, Aurai)

प्रयागराज के औराई क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य शिव मंदिर, आस्था का महाकेंद्र

🌟 परिचय: श्री शिव मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज जिले के औराई क्षेत्र में स्थित श्री शिव मंदिर भगवान शंकर (भोलेनाथ) को समर्पित एक अत्यंत पवित्र, प्राचीन एवं भव्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की प्राचीन वास्तुकला, भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, भजन-कीर्तन तथा शिव महापुराण के प्रवचन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, और सावन सोमवार के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं, जब हजारों की संख्या में भक्त जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़ते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, रोगों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक लघु कैलाश के समान है, जहाँ भगवान शंकर का साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई में स्थित है। औराई प्रयागराज का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए भी जाना जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 40 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन औराई रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड: AY) है, जो कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) सबसे नज़दीकी बड़ा स्टेशन है, जो लगभग 40 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: औराई सड़क मार्ग द्वारा प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है, जो लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

औराई, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज से दूरी: ~40 किमी
वाराणसी से दूरी: ~110 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्री शिव मंदिर, औराई का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, यह स्थल प्राचीन काल में महान ऋषियों और मुनियों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने एक भक्त को स्वप्न में दर्शन देकर इस स्थान पर एक स्वयंभू शिवलिंग की खोज करने का निर्देश दिया। भक्त ने जब खुदाई की तो एक अद्भुत, दिव्य और चमकता हुआ शिवलिंग प्राप्त हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह शिवलिंग अपने आप में अद्वितीय है। मान्यता है कि यहाँ नियमित रूप से दूध, जल, बेलपत्र और भांग चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया। यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🔱

"यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन, चमत्कारी और स्वयंभू माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ आकर सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाने और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 दिव्य शिवलिंग और नक्काशी

श्री शिव मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, प्राचीन चित्रकारी और भव्य शिखर देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान शिव का प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिस पर सदैव जलधारा बहती रहती है। शिवलिंग के समीप भगवान गणेश और माता पार्वती की भी मनमोहक प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं, दक्ष यज्ञ, भस्मासुर वध, और शिव-पार्वती विवाह को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित नंदी की विशाल प्रतिमा और पीपल का वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है।

🧘 ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना का केंद्र

श्री शिव मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन और शिव स्तोत्र का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का सामूहिक रूप से जाप करते हैं।

📖

शिव महापुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • सावन सोमवार व्रत: श्रावण मास में यहाँ जलाभिषेक करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • महाशिवरात्रि: इस दिन रात्रि जागरण और विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन होता है, जिसमें सहभागिता करने से अगणित पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और शिवलिंग से प्राप्त चरणामृत (जल) ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और शिव चालीसा का पाठ करने से आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व। यहाँ रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और भव्य शोभायात्रा का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

💧

सावन (श्रावण मास)

पूरे सावन माह में यहाँ विशेष जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। प्रत्येक सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

🔱

श्रावणी मेला

श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जहाँ दूर-दूर से व्यापारी और श्रद्धालु आते हैं।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

शिव महापुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन, इलाहाबाद किला आदि। (लगभग 40 किमी)
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 20 किमी)
  • भीटी माता मंदिर: प्रसिद्ध शक्तिपीठ, लगभग 15 किमी दूर।
  • मंकापुर: यहाँ का प्राचीन हनुमान मंदिर लगभग 25 किमी दूर है।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 110 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज के दर्शन करते हुए आप श्री शिव मंदिर, औराई की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से प्रयागराज संगम, श्रृंगवेरपुर और भीटी माता मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

औराई में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं। विशेष रूप से:

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • सावन मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप भोलेनाथ का विशेष जलाभिषेक और मेले का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • सावन मास में सोमवार के दिन जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग सकती हैं, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचें।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय और प्रसाद की व्यवस्था उपलब्ध है।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भांग" और "बेलपत्र" विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री शिव मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई में स्थित है। प्रयागराज शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन एवं शिव महापुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: औराई में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: औराई कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: औराई रोड रेलवे स्टेशन (AY) कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या विशेष पूजा का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री शिव मंदिर, औराई की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री शिव मंदिर, औराई प्रयागराज का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शंकर की कृपा प्राप्त करने का अवसर भी देता है।

यहाँ का प्राचीन शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।।

🔱 श्री शिव मंदिर – औराई, प्रयागराज
भोलेनाथ की कृपा का साक्षात् धाम, आस्था और आराधना का महाकेंद्र

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 25 Mar 2026

दर्शनार्थियों के अनुभव (0)

अपना दर्शन अनुभव व समीक्षा साझा करें

विवरण कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });