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प्रामाणिक मंदिर विवरण

माँ दुर्गा मंदिर – औराई, प्रयागराज: शक्ति और भक्ति का पावन धाम | Maa Durga Mandir Aurai Prayagraj: A Sacred Abode of Divine Power

1,456 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 25 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Durga आराध्य देव
सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन समय
सुबह: 6:00 बजे, शाम: 7:00 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Durga
दर्शन समय सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
आरती समय सुबह: 6:00 बजे, शाम: 7:00 बजे
स्थान / पता Maa Durga Mandir, Aurai, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 माँ दुर्गा मंदिर – औराई, प्रयागराज

शक्ति, करुणा और माँ दुर्गा की अद्भुत लीला का साक्षात् धाम (Maa Durga Mandir, Aurai)

प्रयागराज के औराई क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं शक्तिपीठ के समान पवित्र दुर्गा मंदिर

🌟 परिचय: माँ दुर्गा मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज जिले के औराई क्षेत्र में स्थित माँ दुर्गा मंदिर आदिशक्ति माँ भवानी को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, पवित्र एवं भव्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था, शक्ति और भक्ति का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की शांतिपूर्ण वातावरण, माँ दुर्गा की दिव्य मूर्ति, और नियमित रूप से होने वाली आरती, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा भजन-कीर्तन मन को शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें माँ दुर्गा का असीम आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह स्थान अपने आप में एक सिद्ध पीठ के समान है, जहाँ माँ दुर्गा की करुणा और शक्ति का साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

माँ दुर्गा मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई तहसील में स्थित है। औराई प्रयागराज का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 45 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन औराई (स्टेशन कोड: ARI) है, जो कई पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) सबसे नज़दीकी बड़ा स्टेशन है, जो लगभग 45 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: औराई सड़क मार्ग द्वारा प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

औराई, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज से दूरी: ~45 किमी
वाराणसी से दूरी: ~115 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

माँ दुर्गा मंदिर, औराई का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी सिद्ध संतों और महात्माओं की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान तपस्वी को यहाँ माँ दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी शक्तिपीठ स्थापित करने का आदेश दिया। तपस्वी ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत और दिव्य मूर्ति प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह मूर्ति माँ दुर्गा को "महिषासुरमर्दिनी" के स्वरूप में दर्शाती है, जहाँ माँ ने महिषासुर का वध करते हुए अपना भयंकर रूप धारण किया है। मूर्ति की अद्भुत छटा और माँ के नेत्रों में विद्यमान करुणा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🔱

"माँ दुर्गा की यह मूर्ति अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर माँ दुर्गा का सच्चे मन से स्मरण करने से सभी कष्टों का नाश होता है और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

माँ दुर्गा मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य शिखर देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में माँ दुर्गा की महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा विराजमान हैं, जिनके साथ भगवान शिव, भगवान गणेश, कार्तिकेय और माँ सरस्वती की भी अलंकृत प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर दुर्गा सप्तशती की कथाओं और देवी-देवताओं के रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित शिव मंदिर और हवन कुंड विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

माँ दुर्गा मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

दुर्गा चालीसा और भजन-कीर्तन

प्रतिदिन सायंकाल दुर्गा चालीसा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु माँ दुर्गा के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

📖

दुर्गा सप्तशती पाठ

नवरात्रि में और प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष में दुर्गा सप्तशती का पाठ आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और माँ दुर्गा की कृपा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • सभी कष्टों का नाश: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोबल बढ़ता है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🌺

चैत्र नवरात्रि

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में नवरात्रि के अवसर पर यहाँ भव्य कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन और महाभोग का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🍂

शारदीय नवरात्रि

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली शारदीय नवरात्रि में मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दौरान रामलीला और माँ दुर्गा की झाँकियाँ आकर्षण का केंद्र होती हैं।

🔱

दुर्गाष्टमी

प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को विशेष पूजा और कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। यह दिन माँ दुर्गा की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

🪔

आश्विन पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है, जो कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी जानी जाती है।

📿

दुर्गा सप्तशती पाठ सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ और हवन का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन, इलाहाबाद किला आदि। (लगभग 45 किमी)
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 35 किमी)
  • हंडिया का प्राचीन राधा रमण मंदिर: हंडिया शहर में स्थित एक प्रसिद्ध राधा-कृष्ण मंदिर है। (लगभग 20 किमी)
  • भीटी (प्रयागराज): यहाँ का प्रसिद्ध भीटी माता मंदिर लगभग 30 किमी दूर है।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 115 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज के दर्शन करते हुए आप माँ दुर्गा मंदिर, औराई की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से प्रयागराज संगम, श्रृंगवेरपुर और भीटी माता मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🎶 माँ दुर्गा की प्रसिद्ध वंदना (Lyrics in Hindi)

"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"


"अम्बे तू है जगदम्बे काली,
तेरे दास हैं हम सारे,
भक्तों पर कृपा करो माँ,
दुखियों के दुख निवारे।।"


"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।"

इन पवित्र वंदनाओं और भजनों का नियमित रूप से मंदिर में गायन किया जाता है, जिससे भक्तों का मन माँ दुर्गा के चरणों में लीन हो जाता है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

औराई में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और कन्या पूजन में सहभागिता करें।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "दुर्गा प्रसाद" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: माँ दुर्गा मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई तहसील में स्थित है। प्रयागराज शहर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन दुर्गा मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन एवं हवन हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: औराई में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: औराई कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: औराई रेलवे स्टेशन (ARI) पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, चण्डी पाठ या हवन का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 माँ दुर्गा मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

माँ दुर्गा मंदिर, औराई प्रयागराज का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को माँ दुर्गा की असीम करुणा और शक्ति का अनुभव करने का अवसर भी देता है।

यहाँ की मनमोहक मूर्तियाँ, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो माँ दुर्गा की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं शक्ति की कामना रखते हैं।

🙏 जय माँ दुर्गा ।। जय अम्बे ।।

🕊️ माँ दुर्गा मंदिर – औराई, प्रयागराज
शक्ति, करुणा और भक्ति का साक्षात् धाम

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 25 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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