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प्रामाणिक मंदिर विवरण

काल्याणी देवी मंदिर, प्रयागराज - Kalyani Devi Temple, Prayagraj: The Sacred Shaktipeeth of Maa Kalyani

881 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Durga आराध्य देव
05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM दर्शन समय
Mangala Aarti: 05:30 AM, Shringar Aarti: 12:00 PM, Sandhya Aarti: 07:00 PM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Durga
दर्शन समय 05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM
आरती समय Mangala Aarti: 05:30 AM, Shringar Aarti: 12:00 PM, Sandhya Aarti: 07:00 PM
स्थान / पता Kalyani Devi Temple, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🔱 माँ काल्याणी देवी मंदिर, प्रयागराज

शक्ति, सिद्धि और मोक्ष की देवी का पावन धाम (Kalyani Devi Temple, Prayagraj)

प्रयागराज के हृदय में स्थित एक प्रमुख शक्तिपीठ

🔱 परिचय: माँ काल्याणी देवी का दिव्य स्वरूप और महत्व

उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर प्रयागराज (इलाहाबाद) में स्थित माँ काल्याणी देवी मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर देवी सती के शरीर के गिरे हुए अंगों में से एक से जुड़ा हुआ माना जाता है, जो इसे अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है। माँ काल्याणी देवी को शक्ति, सिद्धि और कल्याण की देवी के रूप में पूजा जाता है।

यह मंदिर न केवल प्रयागराज वासियों की आस्था का केंद्र है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ माँ काल्याणी देवी की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। मंदिर का वातावरण भक्तिमय, शांत और ऊर्जा से परिपूर्ण है।

📜 पौराणिक कथा: शक्तिपीठ की उत्पत्ति और माँ काल्याणी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती की मृत देह लेकर अखंड भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस देह के खंड-खंड कर दिए थे। मान्यता है कि देवी सती के शरीर के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। प्रयागराज स्थित काल्याणी देवी मंदिर उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, यहाँ देवी सती की "हथेली (करंगुली)" गिरी थी, जिस कारण यह स्थान अत्यधिक पवित्र माना जाता है। माँ काल्याणी को यहाँ शक्ति और कल्याणकारिणी के रूप में पूजा जाता है। प्राचीन काल से ही यह मंदिर तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है।

यह स्थल त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम) के समीप स्थित होने के कारण और भी अधिक पवित्र माना जाता है। संगम स्नान के पश्चात भक्त यहाँ माँ काल्याणी के दर्शन करना नहीं भूलते।

🔱🕉️

"जय माँ काल्याणी, जय शक्ति की अधिष्ठात्री"

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से मन्नत माँगने पर माँ काल्याणी भक्तों की हर इच्छा पूर्ण करती हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

काल्याणी देवी मंदिर प्रयागराज (इलाहाबाद) शहर के मध्य में स्थित है। यह शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से निकटता के कारण आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (लगभग 120 किमी), लखनऊ (लगभग 200 किमी)
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (इलाहाबाद) सभी प्रमुख ट्रेनों से जुड़ा है। मंदिर स्टेशन से लगभग 2-3 किमी की दूरी पर है। टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज सड़क मार्ग द्वारा उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नेशनल हाईवे 19 और 30 शहर से होकर गुजरते हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 12-15 किमी दूर है। यहाँ से दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर आदि शहरों के लिए नियमित उड़ानें हैं।
🗺️

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

त्रिवेणी संगम से दूरी: ~3-4 किमी
प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~2.5 किमी

🏛️ मंदिर की वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 माँ काल्याणी की मूर्ति

मंदिर के गर्भगृह में माँ काल्याणी देवी की भव्य और दिव्य प्रतिमा स्थापित है। माँ को यहाँ आठ भुजाओं वाली महिषासुरमर्दिनी के रूप में दर्शाया गया है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। देवी की मूर्ति अत्यंत आकर्षक और भक्तों के हृदय को भाव-विभोर करने वाली है।

🏺 शक्तिपीठ का पवित्र स्थल

यहाँ देवी सती के शरीर के अंग के गिरने की पौराणिक मान्यता के कारण यह स्थान एक प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित है। यहाँ विशेष रूप से शक्ति उपासक, तांत्रिक और साधक दर्शन के लिए आते हैं।

🎨 भव्य प्रवेश द्वार और प्रांगण

मंदिर का प्रवेश द्वार भव्य और कलात्मक नक्काशी से युक्त है। मंदिर का विशाल प्रांगण भक्तों को बैठने और ध्यान करने के लिए शांत स्थान प्रदान करता है। मंदिर परिसर साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित है।

🔱 नवदुर्गा की प्रतिमाएं

मंदिर परिसर में माँ दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होती हैं।

🪔 पूजा, आरती और धार्मिक अनुष्ठान

माँ काल्याणी देवी मंदिर में प्रतिदिन भव्य आरती और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। यहाँ की आरती में सम्मिलित होना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव होता है।

🌅

मंगला आरती (सुबह)

सुबह प्रातःकाल माँ की मंगला आरती होती है, जो दिन की शुरुआत दिव्य ऊर्जा के साथ करने का अवसर प्रदान करती है।

🌞

श्रृंगार आरती (दोपहर)

दोपहर में माँ का श्रृंगार किया जाता है और भव्य आरती होती है। इस समय माँ को विशेष भोग भी लगाया जाता है।

🌙

संध्या आरती (शाम)

शाम के समय संध्या आरती होती है, जिसमें हजारों भक्त सम्मिलित होते हैं। यह आरती अत्यंत भव्य और भक्तिमय होती है।

🎶 दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन

शनिवार, मंगलवार और नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) और श्री यंत्र की पूजा का आयोजन होता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है और विशेष हवन-यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार (Festivals at Kalyani Devi Temple)

🔱

चैत्र नवरात्रि

चैत्र माह में नवरात्रि का भव्य आयोजन। नौ दिनों तक विशेष पूजा, जागरण, और कन्या पूजन। रामनवमी पर विशेष उत्सव।

🌺

शारदीय नवरात्रि

आश्विन माह में नवरात्रि का सबसे बड़ा और भव्य उत्सव। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ, अखंड ज्योति, और विशेष आयोजन। विजयादशमी पर भव्य शोभायात्रा।

🪔

दुर्गा अष्टमी

प्रत्येक माह की अष्टमी तिथि को यहाँ विशेष पूजा और हवन का आयोजन होता है। इस दिन साधक और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।

🌟 अन्य महत्वपूर्ण अवसर

  • शनिवार और मंगलवार: माँ काल्याणी के विशेष दिन माने जाते हैं। इन दिनों भक्तों की अत्यधिक भीड़ रहती है।
  • अमावस्या और पूर्णिमा: इन दिनों विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
  • संगम स्नान के दिन: माघ मेला और कुंभ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
🙏

"माँ काल्याणी की कृपा से सभी कष्टों का नाश होता है।"

🏞️ प्रयागराज में आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम। यहाँ स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। मंदिर से लगभग 3-4 किमी।
  • अल्लाहाबाद किला: मुगल कालीन ऐतिहासिक किला, जिसमें अशोक स्तंभ और पातालपुरी मंदिर स्थित हैं।
  • हनुमान मंदिर (संगम के समीप): लेटे हुए हनुमान जी की अनोखी प्रतिमा वाला अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर।
  • शंकर विमान मंडपम: भव्य शिव मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, जो अब संग्रहालय के रूप में है।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय: प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान और इसका संग्रहालय।
  • थॉम्पसन कॉलेज (इलाहाबाद संग्रहालय): ऐतिहासिक और पुरातात्विक संग्रहालय।
  • मिंटो पार्क: शहर का प्रसिद्ध पार्क और मनोरंजन स्थल।
📌 यात्रा टिप: काल्याणी देवी मंदिर के दर्शन के साथ-साथ आप एक ही दिन में त्रिवेणी संगम, हनुमान मंदिर और अल्लाहाबाद किले के दर्शन कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी स्थल एक-दूसरे के निकट हैं।

🗓️ दर्शन का समय, आरती का समय और यात्रा सुझाव

⏰ मंदिर खुलने का समय

  • प्रातःकाल: 5:00 AM से 12:00 PM तक
  • शाम: 4:00 PM से 9:00 PM तक
  • मंगला आरती: प्रातः 5:30 AM
  • श्रृंगार आरती: दोपहर 12:00 PM
  • संध्या आरती: शाम 7:00 PM
  • शयन आरती: रात्रि 9:00 PM

नोट: नवरात्रि, शनिवार, मंगलवार और विशेष अवसरों पर समय में परिवर्तन हो सकता है।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी दर्शन करना अधिक उपयुक्त रहता है, क्योंकि दोपहर बाद भीड़ अधिक हो जाती है।
  • शनिवार और मंगलवार को विशेष भीड़ रहती है, यदि शांति से दर्शन करना चाहें तो सप्ताह के अन्य दिन आएं।
  • नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष व्यवस्था रहती है, लेकिन भीड़ अत्यधिक होती है।
  • संगम स्नान के पश्चात यहाँ दर्शन करने का विशेष महत्व है।
  • मंदिर के पास पूजा सामग्री की दुकानें और प्रसाद की व्यवस्था उपलब्ध है।
  • मंदिर परिसर में मोबाइल फोन का उपयोग वर्जित है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: काल्याणी देवी मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) शहर के मध्य में स्थित है। यह त्रिवेणी संगम और प्रयागराज जंक्शन के निकट है।

प्रश्न 2: क्या काल्याणी देवी मंदिर शक्तिपीठ है?

उत्तर: हाँ, यह मंदिर एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती की हथेली (करंगुली) गिरी थी।

प्रश्न 3: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: सुबह 6:00 AM से 10:00 AM के बीच और शाम 6:00 PM के बाद दर्शन करना सबसे अच्छा रहता है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 4: मंदिर में कौन-कौन सी आरतियाँ होती हैं?

उत्तर: यहाँ प्रतिदिन मंगला आरती (सुबह), श्रृंगार आरती (दोपहर), संध्या आरती (शाम) और शयन आरती (रात्रि) होती है।

प्रश्न 5: प्रयागराज कैसे पहुंचा जा सकता है?

उत्तर: प्रयागराज रेल, सड़क और हवाई मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रयागराज जंक्शन प्रमुख रेलवे स्टेशन है, और बमरौली हवाई अड्डा निकटतम एयरपोर्ट है।

प्रश्न 6: क्या मंदिर में प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। दर्शन निःशुल्क हैं।

📝 माँ काल्याणी देवी के दर्शन का आध्यात्मिक लाभ

माँ काल्याणी देवी मंदिर, प्रयागराज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शक्ति, सिद्धि और कल्याण की देवी का पावन धाम है। यहाँ आने वाले भक्त माँ की कृपा से अपने जीवन की समस्त समस्याओं से मुक्ति पाते हैं। माँ काल्याणी को "कल्याणकारिणी" के नाम से भी जाना जाता है, और मान्यता है कि यहाँ की गई सच्ची साधना से भक्त के जीवन का हर कष्ट दूर हो जाता है।

प्रयागराज के पवित्र संगम के समीप स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और दिव्य हो जाता है। माँ काल्याणी की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

🔱 जय माँ काल्याणी ।। जय शक्ति ।। जय माँ दुर्गा ।।

🔱 माँ काल्याणी देवी मंदिर, प्रयागराज
शक्ति, सिद्धि और मोक्ष का पावन शक्तिपीठ

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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