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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री राधा रमण मंदिर – हंडिया नगर, हंडिया, प्रयागराज: भक्ति और संस्कृति का अनुपम केंद्र | Shri Radha Raman Mandir Handia Prayagraj: A Sacred Abode of Divine Love

1,055 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Radha Raman आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Radha Raman
स्थान / पता Shri Radha Raman Mandir, Handia Nagar, Handia, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री राधा रमण मंदिर – हंडिया नगर

प्रेम, भक्ति और राधा-कृष्ण की मधुर लीला का साक्षात् धाम (Shri Radha Raman Mandir, Handia)

प्रयागराज के हंडिया नगर में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य राधा-कृष्ण मंदिर

🌟 परिचय: श्री राधा रमण मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज जिले के हंडिया नगर में स्थित श्री राधा रमण मंदिर भगवान श्री कृष्ण और उनकी प्रियतमा श्री राधा रानी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं भव्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली आरती, भजन-कीर्तन तथा प्रवचन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और होली के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक लघु वृंदावन के समान है, जहाँ राधा-कृष्ण की मधुर लीलाएँ साक्षात् अनुभव की जा सकती हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री राधा रमण मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के हंडिया नगर में स्थित है। हंडिया प्रयागराज का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 50 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन हंडिया रोड (स्टेशन कोड: HND) है, जो कई पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) सबसे नज़दीकी बड़ा स्टेशन है, जो लगभग 50 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: हंडिया सड़क मार्ग द्वारा प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है, जो लगभग 55 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

हंडिया, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज से दूरी: ~50 किमी
वाराणसी से दूरी: ~120 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्री राधा रमण मंदिर, हंडिया का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी संतों और महात्माओं की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान श्री कृष्ण ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी मनमोहक मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत और दिव्य मूर्ति प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह मूर्ति भगवान श्री कृष्ण को "राधा रमण" (जो राधा को आनंद प्रदान करने वाले) के स्वरूप में दर्शाती है। मूर्ति की मनमोहक छटा और मुख पर विद्यमान मुस्कान भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"श्री राधा रमण की यह मूर्ति अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर राधा-कृष्ण का सच्चे मन से स्मरण करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

श्री राधा रमण मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य गुंबद देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण की राधा रमण मूर्ति विराजमान हैं, जिनके साथ माता राधा रानी की भी अलंकृत प्रतिमा स्थापित है।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित वृंदावन की याद दिलाने वाली तुलसी की चौबारी विशेष आकर्षण का केंद्र है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

श्री राधा रमण मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु राधा-कृष्ण के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

📖

श्रीमद्भागवत कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • विवाह में सुख-शांति: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है और वैवाहिक समस्याएँ दूर होती हैं।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से राधा-रमण की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रात्रि जागरण, और महाभोग का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

राधाष्टमी

माता राधा रानी के प्राकट्योत्सव पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दिन विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है।

🎨

होली (फाल्गुन मास)

यहाँ की होली अद्वितीय होती है, जिसमें फूलों की होली और फाग गायन का आयोजन किया जाता है। यह दृश्य वृंदावन की याद दिलाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

श्रीमद्भागवत सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन, इलाहाबाद किला आदि। (लगभग 50 किमी)
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 30 किमी)
  • हंडिया का प्राचीन शिव मंदिर: हंडिया शहर में ही एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।
  • भीटी (प्रयागराज): यहाँ का प्रसिद्ध भीटी माता मंदिर लगभग 25 किमी दूर है।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 120 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज के दर्शन करते हुए आप श्री राधा रमण मंदिर, हंडिया की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से प्रयागराज संगम, श्रृंगवेरपुर और भीटी माता मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

हंडिया में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • जन्माष्टमी और राधाष्टमी (अगस्त-सितंबर): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "राधा रमण मिश्री" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री राधा रमण मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के हंडिया नगर में स्थित है। प्रयागराज शहर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन राधा-रमण मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले भजन-कीर्तन एवं भागवत कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। जन्माष्टमी और राधाष्टमी के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: हंडिया में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: हंडिया कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: हंडिया रोड रेलवे स्टेशन (HND) पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री राधा रमण मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री राधा रमण मंदिर, हंडिया प्रयागराज का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को राधा-कृष्ण के प्रेम में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ की मनमोहक मूर्तियाँ, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो राधा-कृष्ण की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 राधे राधे ।। जय श्री राधे ।।

🕊️ श्री राधा रमण मंदिर – हंडिया नगर, प्रयागराज
भक्ति, संस्कृति और प्रेम का साक्षात् धाम

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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