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प्रामाणिक मंदिर विवरण

हनुमान मंदिर – औराई, प्रयागराज: श्री हनुमान जी का दिव्य धाम, भक्ति और शक्ति का परम केंद्र | Hanuman Mandir Aurai Prayagraj: A Sacred Abode of Strength and Devotion

878 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 25 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Hanuman आराध्य देव
सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन समय
शाम की आरती: शाम 7:00 बजे, सुबह की आरती: सुबह 5:30 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Hanuman
दर्शन समय सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
आरती समय शाम की आरती: शाम 7:00 बजे, सुबह की आरती: सुबह 5:30 बजे
स्थान / पता Hanuman Mandir, Aurai, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 हनुमान मंदिर – औराई, प्रयागराज

श्री हनुमान जी का दिव्य धाम, भक्ति और शक्ति का परम केंद्र (Hanuman Mandir Aurai, Prayagraj)

प्रयागराज के औराई क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं प्रतापी हनुमान मंदिर

🌟 परिचय: हनुमान मंदिर, औराई का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज जिले के औराई क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर भगवान श्री हनुमान को समर्पित एक अत्यंत पवित्र, प्राचीन एवं शक्तिपीठ है। यह मंदिर न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था, साहस और शक्ति का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली आरती, हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का पाठ एवं भजन-कीर्तन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने और चोला चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, बाधाएँ दूर होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति तथा अभय की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक तपोवन के समान है, जहाँ हनुमान जी की अनन्य भक्ति का अनुभव किया जा सकता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

हनुमान मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई क्षेत्र में स्थित है। औराई प्रयागराज का एक महत्वपूर्ण और विकासशील क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 40 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) है, जो लगभग 40 किमी दूर है। औराई रोड पर एक छोटा रेलवे स्टेशन भी है।
  • सड़क मार्ग: औराई सड़क मार्ग द्वारा प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है, जो लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

औराई, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज से दूरी: ~40 किमी
वाराणसी से दूरी: ~110 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हनुमान मंदिर, औराई का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी ऋषियों-मुनियों और महात्माओं की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान श्री हनुमान ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी प्रतापी मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत और दिव्य मूर्ति प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह मूर्ति भगवान श्री हनुमान को उनके "बजरंगबली" स्वरूप में दर्शाती है। मूर्ति की मनमोहक छटा और मुख पर विद्यमान साहसी मुद्रा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"श्री हनुमान जी की यह मूर्ति अत्यंत प्राचीन, चमत्कारी और सिद्ध मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से भय समाप्त होता है, संकट टलते हैं और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 प्रतापी मूर्ति और भव्य नक्काशी

हनुमान मंदिर, औराई की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य गुंबद देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान श्री हनुमान की प्रतापी, गदाधारी मूर्ति विराजमान हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही भक्तों के मन का भय दूर हो जाता है।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर हनुमान जी के जीवन की प्रेरक लीलाओं और रामायण के प्रसंगों को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान, रामायण पाठ और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित पीपल का वृक्ष भी आकर्षण का केंद्र है, जहाँ भक्त परिक्रमा करते हैं।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

हनुमान मंदिर, औराई केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड

प्रतिदिन सुबह-शाम हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का सामूहिक पाठ होता है, जिसमें श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

📖

रामायण एवं भागवत कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली रामायण और भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन सुखद और संकट-मुक्त हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • भय से मुक्ति: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने और चोला चढ़ाने से मन के सभी प्रकार के भय (भूत-प्रेत, शत्रु, आदि) समाप्त हो जाते हैं।
  • शनि दोष निवारण: शनिवार के दिन यहाँ विशेष पूजा और तेल चढ़ाने से शनि दोष का शांतिपूर्ण निवारण होता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और हनुमान चालीसा के पाठ से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • संकट मोचन: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से असाध्य रोगों, कर्ज, और अन्य जीवन संकटों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

हनुमान जयंती

भगवान श्री हनुमान के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रात्रि जागरण, महाभोग, और विशाल शोभायात्रा का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

रामनवमी

भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दिन विशेष अभिषेक, रामायण पाठ और श्रृंगार किया जाता है।

🪔

दिवाली

दीपावली के अवसर पर मंदिर को हजारों दीपों से सजाया जाता है और भव्य आरती का आयोजन होता है।

📿

सुंदरकांड पाठ सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, आनंद भवन, इलाहाबाद किला, हनुमान मंदिर (संगम) आदि। (लगभग 40 किमी)
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 35 किमी)
  • भीटी (प्रयागराज): यहाँ का प्रसिद्ध भीटी माता मंदिर लगभग 20 किमी दूर है।
  • लैला माई मंदिर (जसरा): एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ, लगभग 25 किमी दूर।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 110 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज के दर्शन करते हुए आप हनुमान मंदिर, औराई की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से प्रयागराज संगम, श्रृंगवेरपुर और भीटी माता मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

औराई में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • हनुमान जयंती (चैत्र मास): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) और मंगलवार/शनिवार की विशेष आरती में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "बूंदी के लड्डू" और "चोला" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: हनुमान मंदिर, औराई कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के औराई क्षेत्र में स्थित है। प्रयागराज शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन एवं सिद्ध हनुमान जी की मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। हनुमान जयंती और मंगलवार/शनिवार के दिन यहाँ विशेष उत्सव एवं भीड़ होती है।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: औराई में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: औराई कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: औराई सड़क मार्ग से प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसों और टैक्सियों द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक (तेल, सिंदूर), या सुंदरकांड पाठ का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 हनुमान मंदिर, औराई की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

हनुमान मंदिर, औराई प्रयागराज का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, शक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को संकट-मोचन हनुमान जी की अनन्य भक्ति में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ की प्रतापी मूर्तियाँ, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो हनुमान जी की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं, संकटों से मुक्ति पाना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, शक्ति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय श्री राम ।। हनुमान जी की जय ।।

🕊️ हनुमान मंदिर – औराई, प्रयागराज
भक्ति, शक्ति और संकट-मोचन का साक्षात् धाम

संकटमोचन बजरंगबली के पावन चालीसा, अष्टक और मंगलवार आराधना विधि के लिए हनुमान साधना कक्ष अवश्य देखें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 25 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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