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प्रामाणिक मंदिर विवरण

राम-जानकी मंदिर – सुंदरपुर, प्रयागराज: भक्ति और संस्कृति का पावन धाम | Ram Janaki Mandir Sundarpur Prayagraj: A Sacred Abode of Divine Grace

372 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Ram-Janaki आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Ram-Janaki
स्थान / पता Ram-Janaki Mandir, Sundarpur, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 राम-जानकी मंदिर – सुंदरपुर

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता जानकी की दिव्य साधना स्थली (Ram Janaki Mandir, Sundarpur)

प्रयागराज के सुंदरपुर ग्राम में स्थित एक प्राचीन एवं भव्य राम-जानकी मंदिर

🌟 परिचय: राम-जानकी मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज जिले के सुंदरपुर ग्राम में स्थित राम-जानकी मंदिर भगवान श्रीराम और माता सीता (जानकी) को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, रामायणी भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली आरती, रामचरितमानस का पाठ तथा प्रवचन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से रामनवमी, विवाह पंचमी, और दशहरे के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक लघु अयोध्या के समान है, जहाँ श्रीराम-सीता की मधुर लीलाएँ साक्षात् अनुभव की जा सकती हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

राम-जानकी मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के सुंदरपुर ग्राम में स्थित है। सुंदरपुर प्रयागराज का एक शांत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गाँव है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 35 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) है, जो लगभग 35 किमी दूर है। प्रयागराज रमबाग स्टेशन भी सुविधाजनक है।
  • सड़क मार्ग: सुंदरपुर सड़क मार्ग द्वारा प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा है, जो लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुंदरपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज से दूरी: ~35 किमी
वाराणसी से दूरी: ~105 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राम-जानकी मंदिर, सुंदरपुर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी संतों और महात्माओं की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान श्रीराम ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी और माता सीता की मनमोहक मूर्तियाँ स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो अद्भुत और दिव्य मूर्तियाँ प्राप्त हुईं, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हैं।

यह मूर्तियाँ भगवान श्रीराम और माता सीता को "राम-जानकी" के स्वरूप में दर्शाती हैं। मूर्तियों की मनमोहक छटा और मुख पर विद्यमान मुस्कान भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"श्री राम-जानकी की ये मूर्तियाँ अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी मानी जाती हैं।"

मान्यता: यहाँ आकर राम-सीता का सच्चे मन से स्मरण करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और मन की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

राम-जानकी मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य गुंबद देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान श्रीराम की सुंदर मूर्ति उनके अनुज लक्ष्मण और माता सीता (जानकी) के साथ विराजमान हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर रामायण की लीलाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित रामायण मंडप विशेष आकर्षण का केंद्र है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

राम-जानकी मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु राम-सीता के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

📖

रामचरितमानस पाठ

प्रतिदिन संध्या के समय रामचरितमानस का पाठ एवं प्रवचन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • विवाह में सुख-शांति: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है और वैवाहिक समस्याएँ दूर होती हैं।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से राम-जानकी की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और रामचरितमानस पाठ से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

रामनवमी

भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रात्रि जागरण, और महाभोग का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

विवाह पंचमी

माता सीता और भगवान राम के विवाहोत्सव पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दिन विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है।

🎨

दशहरा (विजयादशमी)

यहाँ रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसमें रावण दहन की झाँकी विशेष आकर्षण का केंद्र होती है।

🪔

दीपावली

राम जी के अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य में यहाँ दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

रामचरितमानस सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय रामचरितमानस पाठ एवं कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन, इलाहाबाद किला आदि। (लगभग 35 किमी)
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 25 किमी)
  • अक्षयवट: प्रयागराज में स्थित अमर वट वृक्ष, जहाँ राम जी ने पूर्वजों का तर्पण किया था।
  • भीटी (प्रयागराज): यहाँ का प्रसिद्ध भीटी माता मंदिर लगभग 20 किमी दूर है।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 105 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज के दर्शन करते हुए आप राम-जानकी मंदिर, सुंदरपुर की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से प्रयागराज संगम, श्रृंगवेरपुर और भीटी माता मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

सुंदरपुर में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • रामनवमी और विवाह पंचमी (मार्च-अप्रैल और नवंबर-दिसंबर): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "राम-जानकी मिश्री" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: राम-जानकी मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के सुंदरपुर ग्राम में स्थित है। प्रयागराज शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन राम-जानकी मूर्तियाँ, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रामचरितमानस पाठ एवं रामलीला हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। रामनवमी और विवाह पंचमी के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुंदरपुर में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुंदरपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) है, जो लगभग 35 किमी दूर है। सड़क मार्ग से प्रयागराज, वाराणसी, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, या रामचरितमानस पाठ का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 राम-जानकी मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

राम-जानकी मंदिर, सुंदरपुर प्रयागराज का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को श्रीराम-सीता के प्रेम में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ की मनमोहक मूर्तियाँ, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले रामचरितमानस पाठ एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो राम-सीता की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय श्री राम ।। जय सीता मैया ।।

🕊️ राम-जानकी मंदिर – सुंदरपुर, प्रयागराज
भक्ति, संस्कृति और मर्यादा का साक्षात् धाम

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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