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प्रामाणिक मंदिर विवरण

भोलेनाथ का पवित्र धाम: शिव मंदिर, सुंदरपुर, भदोही | Shiv Mandir Sundarpur Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva

319 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Shiv Mandir, Sundarpur, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 भोलेनाथ का पवित्र धाम: शिव मंदिर, सुंदरपुर

जय भोलेनाथ! आस्था, श्रद्धा और शिवत्व का साक्षात् केंद्र (Shiv Mandir, Sundarpur, Bhadohi)

भदोही जिले के सुंदरपुर गाँव में स्थित एक प्राचीन एवं आस्था का महाकेंद्र

🌟 परिचय: शिव मंदिर, सुंदरपुर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुंदरपुर गाँव में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर भगवान शंकर के अनन्य भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का एक अटूट केंद्र है। यह मंदिर न केवल स्थानीय ग्रामीणों की आस्था का प्रतीक है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों के लिए भी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।

यहाँ की शांत वातावरण, प्राचीन शिवलिंग की दिव्यता, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं भजन-कीर्तन की परंपरा मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, और सावन सोमवार के अवसर पर यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जल चढ़ाने और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से भगवान शंकर अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह स्थान अपने आप में एक लघु कैलाश के समान है, जहाँ हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

यह पवित्र शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुंदरपुर गाँव में स्थित है। सुंदरपुर भदोही शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित एक शांतिपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र है, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (ज्ञानपुर) – लगभग 12 किमी, वाराणसी – लगभग 45 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (ज्ञानपुर) रेलवे स्टेशन (BHB) है, जो कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। वाराणसी जंक्शन (BSB) और प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) प्रमुख बड़े स्टेशन हैं।
  • सड़क मार्ग: सुंदरपुर सड़क मार्ग द्वारा भदोही, वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुंदरपुर, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही शहर से दूरी: ~12 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शिव मंदिर, सुंदरपुर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी घने वनों से आच्छादित था और यहाँ महान ऋषि-मुनि तपस्या किया करते थे। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक संत को यहाँ भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर स्वयंभू शिवलिंग की खोज करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक अद्भुत दिव्य शिवलिंग प्राप्त हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह शिवलिंग अपने आप में अद्वितीय है। इसकी चमक और ऊर्जा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार हुआ। आज भी यहाँ प्राचीन परंपराओं का निर्वहन किया जाता है, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाता है।

मान्यता है कि यहाँ पर भगवान शिव ने किसी दैवीय प्रयोजन के लिए स्वयं निवास किया था, जिससे यह स्थल अत्यंत पवित्र माना जाता है।

🕊️

"यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं स्वयंभू माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से जल चढ़ाने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 दिव्य शिवलिंग और नक्काशी

शिव मंदिर, सुंदरपुर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर पत्थरों की नक्काशी और एक भव्य शिखर देखने को मिलता है। गर्भगृह में स्थापित प्राचीन शिवलिंग ही मंदिर का मुख्य आकर्षण है, जो भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।

🎨 भव्य प्रांगण और सभा मंडप

मंदिर का विशाल प्रांगण धार्मिक आयोजनों और भजन-कीर्तन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ एक सुंदर सभा मंडप है, जहाँ श्रद्धालु बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। मंदिर परिसर की दीवारों पर शिव-पुराण की घटनाओं को दर्शाने वाले चित्र बने हैं।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर परिसर हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक छोटी सी वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर शांति का अनुभव कर सकते हैं। परिसर में स्थित विशाल वट वृक्ष भी अपने आप में पवित्र माना जाता है, जहाँ भक्त पूजा-अर्चना करते हैं।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

शिव मंदिर, सुंदरपुर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु शिव भक्ति के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

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शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार शिव पुराण की कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • कष्ट निवारण: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक करने से भक्तों के सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और भस्म का प्रसाद ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • शांति और समृद्धि: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और घर में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास कराती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

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महाशिवरात्रि

भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि यहाँ अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, और भव्य आरती का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

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सावन सोमवार

सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार को यहाँ विशेष रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का आयोजन होता है। कांवड़ियों का तांता लगा रहता है।

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श्रावण मास

पूरे श्रावण मास यहाँ विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर जाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

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शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • ज्ञानपुर (भदोही): अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध यह शहर लगभग 12 किमी दूर है। यहाँ के प्राचीन मंदिर और बाजार दर्शनीय हैं।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी दूर।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर – लगभग 70 किमी।
  • चुनारगढ़ किला: ऐतिहासिक चुनार किला लगभग 50 किमी दूर है, जो अपने इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।
  • सीतामढ़ी-हरचंदपुर: यहाँ का प्राचीन दुर्गा मंदिर लगभग 30 किमी दूर है।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी या प्रयागराज की यात्रा के दौरान आप शिव मंदिर, सुंदरपुर भदोही में दर्शन करना न भूलें। यह स्थान वाराणसी से महज 45 किमी की दूरी पर स्थित है और एक शांतिपूर्ण धार्मिक अनुभव प्रदान करता है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

सुंदरपुर में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • महाशिवरात्रि और सावन (फरवरी-मार्च और जुलाई-अगस्त): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक और भक्ति-भावना से परिपूर्ण होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भस्म" और "चंदन" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।
  • सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर भारी भीड़ होती है, इसलिए यात्रा की योजना पहले से बना लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शिव मंदिर, सुंदरपुर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुंदरपुर गाँव में स्थित है। भदोही शहर से लगभग 12 किलोमीटर और वाराणसी से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रुद्राभिषेक एवं भजन-कीर्तन हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुंदरपुर में सीमित सुविधाएँ हैं। बेहतर आवास के लिए भदोही (ज्ञानपुर) या वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुंदरपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BHB) है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, लघुरुद्र, या महामृत्युंजय जाप जैसे विशेष अनुष्ठान करवा सकते हैं।

📝 शिव मंदिर, सुंदरपुर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

शिव मंदिर, सुंदरपुर भदोही जिले का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शिवत्व, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शंकर की असीम कृपा का अनुभव करने का अवसर भी देता है।

यहाँ का दिव्य शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले रुद्राभिषेक एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की इस पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर-हर महादेव ।। जय भोलेनाथ ।।

🕊️ शिव मंदिर – सुंदरपुर, भदोही
भक्ति, शांति और शिवत्व का साक्षात् धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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