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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री शनि देव मंदिर – सुंदरपुर, वाराणसी: न्याय के देवता का प्रसिद्ध धाम | Shri Shani Dev Mandir Sundarpur Varanasi: The Famed Abode of Justice

532 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shani आराध्य देव
5:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 9:00 PM दर्शन समय
मंगला आरती: सुबह 5:00 बजे, शाम आरती: 7:00 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shani
दर्शन समय 5:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 9:00 PM
आरती समय मंगला आरती: सुबह 5:00 बजे, शाम आरती: 7:00 बजे
स्थान / पता Shri Shani Dev Mandir, Sundarpur, Varanasi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री शनि देव मंदिर – सुंदरपुर, वाराणसी

न्याय, कर्म और शांति का साक्षात् स्थल (Shri Shani Dev Mandir, Sundarpur, Varanasi)

वाराणसी के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन एवं प्रतापी शनि मंदिर

🌟 परिचय: श्री शनि देव मंदिर का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित श्री शनि देव मंदिर भगवान शनि (शनैश्चर) को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन एवं शक्तिशाली धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय जनता के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है।

शनि देव को न्याय के देवता, कर्मफलदाता और ग्रहों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। यहाँ की वास्तुकला, शांत वातावरण और नियमित रूप से होने वाली विशेष पूजा-अर्चना, तैलाभिषेक, तथा शनि जयंती एवं अमावस्या के अवसर पर आयोजित होने वाले अनुष्ठान भक्तों के मन को सुकून और आशीर्वाद से भर देते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से शनि देव की पूजा करने से शनि दशा के दुष्प्रभाव कम होते हैं, व्यापार एवं नौकरी में सफलता मिलती है और जीवन की विपत्तियाँ दूर होती हैं। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि है, जहाँ हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने हेतु दर्शन करने आते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री शनि देव मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। सुंदरपुर वाराणसी शहर का एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र है, जो गंगा नदी के निकट स्थित होने के कारण विशेष पावन माना जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (बनारस) – लगभग 8 किमी (सुंदरपुर वाराणसी शहर का ही भाग है)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (BSB) है, जो लगभग 7 किमी दूर है। मंडुआडीह (MUV) और भगतपुर स्टेशन भी नज़दीक हैं।
  • सड़क मार्ग: सुंदरपुर सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी के सभी प्रमुख क्षेत्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और सिटी बसें आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुंदरपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी जंक्शन से दूरी: ~7 किमी
गंगा घाट से दूरी: ~3 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्री शनि देव मंदिर, सुंदरपुर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, एक प्राचीन काल में यहाँ एक महान तपस्वी ने शनि देव की कठोर साधना की थी। प्रसन्न होकर शनि देव ने उन्हें दर्शन दिए और इस स्थान पर एक मंदिर स्थापित करने का आदेश दिया। माना जाता है कि यहाँ की स्वयंभू शनि प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है।

यह प्रतिमा काले पत्थर से बनी है और इसकी विशेषता यह है कि सूर्य की किरणें वर्ष के कुछ विशेष दिनों में सीधे मूर्ति के मुख पर पड़ती हैं। यह मंदिर समय के साथ स्थानीय शासकों और भक्तों के सहयोग से विकसित हुआ और आज यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शनि मंदिरों में गिना जाता है।

यहाँ आज भी वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा होती है और प्रत्येक शनिवार एवं अमावस्या को विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

🪔

"इस मंदिर की शनि प्रतिमा अत्यंत प्राचीन एवं प्रभावशाली मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से तैलाभिषेक और शनि चालीसा का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 दिव्य मूर्ति और स्थापत्य

श्री शनि देव मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय शैलियों का मिश्रण है। मंदिर का शिखर (गोपुरम) भव्य है और प्रवेश द्वार पर विशाल ध्वजस्तंभ देखने को मिलता है। गर्भगृह में भगवान शनि की काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा विराजमान हैं, जिनके सामने भक्त सिर झुकाते हैं।

🎨 भित्ति चित्र और शिल्पकला

मंदिर की दीवारों पर शनि देव की विभिन्न कथाओं, नवग्रहों, और धार्मिक दृश्यों के सुंदर चित्र बने हैं। मंदिर परिसर में नवग्रहों की छोटी-छोटी प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं, जहाँ ग्रह शांति हेतु पूजा की जाती है।

🌳 शांत वाटिका और यज्ञशाला

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक यज्ञशाला है, जहाँ हवन और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। परिसर में स्थित पीपल का वृक्ष भी पूजनीय है, जहाँ भक्त शनि देव की आराधना करते हैं।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

श्री शनि देव मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और कर्म सुधार का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

शनि चालीसा एवं स्तोत्र पाठ

प्रत्येक शनिवार और अमावस्या को सामूहिक रूप से शनि चालीसा, शनि स्तोत्र और दशरथ शनि स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

📖

ग्रह शांति अनुष्ठान

विशेष अवसरों पर ग्रह शांति हवन और शनि दोष निवारण अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

ध्यान एवं योग

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो मानसिक शांति एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन सुखमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • शनि दोष निवारण: यहाँ विधि-विधान से तैलाभिषेक और शनि मंत्र का जाप करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, और अन्य अशुभ स्थितियों से राहत मिलती है।
  • व्यापार एवं नौकरी में सफलता: सच्चे मन से शनि देव की आराधना करने से कार्यक्षेत्र में बाधाएँ दूर होती हैं और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और शनि स्तोत्र के पाठ से भक्ति में रुचि बढ़ती है और कर्मों का सही मार्गदर्शन मिलता है।
  • रोग निवारण एवं दीर्घायु: कई भक्तों का अनुभव है कि यहाँ पूजा-अर्चना और शनि देव के चरणामृत से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🪔

शनि जयंती

ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती पर यहाँ भव्य शोभायात्रा, विशेष अभिषेक और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌑

अमावस्या (प्रत्येक माह)

प्रत्येक अमावस्या को शनि देव का विशेष श्रृंगार, तैलाभिषेक और हवन आयोजित किया जाता है। यह दिन शनि पूजन के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

शनिवार (विशेष पूजा)

प्रत्येक शनिवार को हजारों भक्त यहाँ दर्शन करते हैं। दिनभर विशेष पूजा, सामूहिक शनि चालीसा और भंडारे का आयोजन होता है।

🕯️

दीपदान महोत्सव

कार्तिक अमावस्या और विशेष अवसरों पर मंदिर में लाखों दीपों का दान किया जाता है, जो अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

📿

ग्रह शांति महायज्ञ

वर्ष में एक बार सात दिवसीय ग्रह शांति एवं नवग्रह महायज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों भक्त सहभागी होते हैं।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • काशी विश्वनाथ मंदिर: विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर, वाराणसी – लगभग 6 किमी
  • दशाश्वमेध घाट एवं गंगा आरती: वाराणसी का प्रसिद्ध घाट – लगभग 5 किमी
  • संकट मोचन हनुमान मंदिर: वाराणसी का प्रमुख हनुमान मंदिर – लगभग 4 किमी
  • सारनाथ: बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल, जहाँ भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था – लगभग 12 किमी
  • तुलसी मानस मंदिर: रामचरितमानस लिखने का स्थल – लगभग 5 किमी
  • दुर्गा मंदिर (दुर्गाकुंड): वाराणसी का प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर – लगभग 3 किमी
📌 यात्रा टिप: वाराणसी के दर्शन करते हुए आप श्री शनि देव मंदिर, सुंदरपुर की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से काशी विश्वनाथ, दशाश्वमेध घाट, और संकट मोचन मंदिर बहुत निकट हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

वाराणसी में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शनिवार और अमावस्या के दिन विशेष रूप से भीड़ होती है, अतः सुबह जल्दी दर्शन करें।
  • शनि देव को तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और उड़द की दाल चढ़ाने का विशेष महत्व है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "शनि प्रसाद" और "उड़द के लड्डू" प्रसिद्ध हैं, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री शनि देव मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी जंक्शन से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन स्वयंभू शनि प्रतिमा, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले शनि जयंती, अमावस्या एवं शनिवार के विशेष अनुष्ठान हैं। यह स्थान शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या) और प्रत्येक शनिवार एवं अमावस्या पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुंदरपुर क्षेत्र में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी शहर के मुख्य क्षेत्रों में अनेक होटल हैं। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुंदरपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: वाराणसी जंक्शन (BSB) या मंडुआडीह (MUV) से ऑटो, टैक्सी या सिटी बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से यह स्थान वाराणसी शहर के सभी प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ा है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप शनि तैलाभिषेक, ग्रह शांति हवन, या शनि चालीसा का सामूहिक पाठ करवा सकते हैं।

📝 श्री शनि देव मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री शनि देव मंदिर, सुंदरपुर वाराणसी का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, न्याय और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को शनि देव की कृपा से जीवन की विपत्तियों से मुक्ति का अवसर भी देता है।

यहाँ की प्राचीन मूर्ति, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं अनुष्ठान हर किसी को आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। चाहे आप शनि दोष से पीड़ित हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

वाराणसी की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो शनि देव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय श्री शनि देव ।। ऊँ शनैश्चराय नमः ।।

🕊️ श्री शनि देव मंदिर – सुंदरपुर, वाराणसी
न्याय, कर्म और शांति का साक्षात् धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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