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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री हनुमान मंदिर – सुंदरपुर, वाराणसी: शक्ति, भक्ति और संकट मोचन का दिव्य धाम | Shri Hanuman Mandir Sundarpur Varanasi: A Divine Abode of Strength and Devotion

269 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Hanuman आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Hanuman
स्थान / पता Shri Hanuman Mandir, Sundarpur, Varanasi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री हनुमान मंदिर – सुंदरपुर

शक्ति, भक्ति और संकटमोचन का पावन धाम (Shri Hanuman Mandir, Sundarpur)

वाराणसी के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं चमत्कारी हनुमान मंदिर

🌟 परिचय: श्री हनुमान मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित श्री हनुमान मंदिर भगवान बजरंगबली को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन एवं शक्तिशाली धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था, शक्ति और संकट मोचन का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, हनुमान चालीसा के निरंतर पाठ, भक्ति-भावना से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली आरती, भजन-कीर्तन तथा प्रवचन मन को शांति और साहस से भर देते हैं। विशेष रूप से हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, कष्ट दूर होते हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि के समान है, जहाँ हनुमान जी की कृपा साक्षात् अनुभव की जा सकती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री हनुमान मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। सुंदरपुर वाराणसी शहर के प्रमुख उपनगरीय क्षेत्रों में से एक है, जो अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 10 किमी (केंद्र से)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (BSB) है, जो देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से मंदिर लगभग 12 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: सुंदरपुर सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, गाजीपुर और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें, ऑटो-रिक्शा और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सुंदरपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~10 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~125 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्री हनुमान मंदिर, सुंदरपुर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी संतों और महात्माओं की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि एक प्राचीन काल में एक महान संत को यहाँ भगवान हनुमान ने स्वप्न में दर्शन दिए और इस स्थान पर उनकी अद्भुत मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक स्वयंभू प्रतिमा प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह मूर्ति भगवान हनुमान को "संकट मोचन" और "बजरंगबली" के स्वरूप में दर्शाती है। मूर्ति की भव्य छटा और मुख पर विद्यमान तेज भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"श्री हनुमान जी की यह मूर्ति अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से भय दूर होता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

श्री हनुमान मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भव्य शिखर देखने को मिलते हैं। गर्भगृह में भगवान हनुमान की भव्य मूर्ति विराजमान हैं, जिनके साथ भगवान राम और माता सीता की भी प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर रामायण की घटनाओं और हनुमान जी के बाल्यकाल से लेकर लंका कांड तक के दृश्यों को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान, हनुमान चालीसा का पाठ और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित विशाल वट वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसके नीचे नियमित सत्संग होता है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

श्री हनुमान मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

हनुमान चालीसा का पाठ

प्रतिदिन सुबह-शाम हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होता है, जिसमें श्रद्धालु भक्ति-भावना से सहभागिता करते हैं।

📖

रामायण और सुंदरकांड

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली रामायण और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

प्राणायाम और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग, प्राणायाम और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • संकट मोचन: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • भय निवारण: यहाँ आने से भय, शत्रुता और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से बजरंगबली की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

हनुमान जयंती

भगवान हनुमान के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रात्रि जागरण, विशाल शोभायात्रा और महाप्रसाद का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

रामनवमी

भगवान राम के प्राकट्योत्सव पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दिन विशेष अभिषेक और रामायण पाठ किया जाता है।

🎨

मंगलवार और शनिवार

प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा, सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा का आयोजन होता है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

🪔

दीपावली

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

सुंदरकांड पाठ सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ और प्रवचन का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • संकट मोचन हनुमान मंदिर: वाराणसी का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, लगभग 8 किमी दूर।
  • काशी विश्वनाथ मंदिर: विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर, लगभग 10 किमी दूर (वाराणसी केंद्र)।
  • दुर्गा कुंड: प्राचीन दुर्गा मंदिर और कुंड, लगभग 7 किमी दूर।
  • सारनाथ: बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्थल, जहाँ भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था, लगभग 15 किमी दूर।
  • रामनगर किला: ऐतिहासिक किला और संग्रहालय, लगभग 12 किमी दूर।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी के दर्शन करते हुए आप श्री हनुमान मंदिर, सुंदरपुर की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से संकट मोचन, काशी विश्वनाथ और दुर्गा मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

सुंदरपुर में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • हनुमान जयंती और रामनवमी (मार्च-अप्रैल): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "हनुमान जी का चोला" और "बूंदी के लड्डू" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री हनुमान मंदिर, सुंदरपुर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सुंदरपुर क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी शहर के केंद्र से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन स्वयंभू हनुमान मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड एवं रामायण पाठ हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। हनुमान जयंती और रामनवमी के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: सुंदरपुर में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी शहर जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: सुंदरपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: वाराणसी जंक्शन (BSB) निकटतम रेलवे स्टेशन है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, गाजीपुर आदि से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। हवाई मार्ग से लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) सबसे निकट है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, सुंदरकांड पाठ या हवन का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री हनुमान मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री हनुमान मंदिर, सुंदरपुर वाराणसी का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति और साहस प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को हनुमान जी की कृपा का साक्षात् अनुभव करने का अवसर भी देता है।

यहाँ की मनमोहक मूर्तियाँ, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड एवं सत्संग हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

वाराणसी की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो हनुमान जी की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।। जय बजरंगबली ।।

🕊️ श्री हनुमान मंदिर – सुंदरपुर, वाराणसी
शक्ति, भक्ति और संकट मोचन का पावन धाम

संकटमोचन बजरंगबली के पावन चालीसा, अष्टक और मंगलवार आराधना विधि के लिए हनुमान साधना कक्ष अवश्य देखें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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