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प्रामाणिक मंदिर विवरण

इस्कॉन मंदिर, कृष्ण नगर, प्रयागराज – ISKCON Temple, Krishna Nagar, Prayagraj: आध्यात्मिक शांति और भव्यता का संगम

242 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Radha Krishna आराध्य देव
Morning: 4:30 AM – 12:30 PM, Evening: 4:00 PM – 8:30 PM दर्शन समय
Mangala Aarti: 4:30 AM, Dhoop Aarti: 7:30 AM, Bhog Aarti: 12:30 PM, Sandhya Aarti: 6:30 PM, Shayan Aarti: 8:00 PM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Radha Krishna
दर्शन समय Morning: 4:30 AM – 12:30 PM, Evening: 4:00 PM – 8:30 PM
आरती समय Mangala Aarti: 4:30 AM, Dhoop Aarti: 7:30 AM, Bhog Aarti: 12:30 PM, Sandhya Aarti: 6:30 PM, Shayan Aarti: 8:00 PM
स्थान / पता ISKCON Temple, Krishna Nagar, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ इस्कॉन मंदिर, कृष्ण नगर, प्रयागराज

आध्यात्मिक शांति और भव्यता का अद्भुत संगम (ISKCON Temple, Krishna Nagar, Prayagraj)

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित एक दिव्य आध्यात्मिक केंद्र

🌟 परिचय: इस्कॉन मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के कृष्ण नगर में स्थित इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple) भगवान श्री कृष्ण और उनकी अटूट शक्ति श्रीमती राधारानी को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है। यह मंदिर अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) का एक प्रमुख केंद्र है, जिसकी स्थापना 1966 में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी।

यह स्थान अपने भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण, दिव्य कीर्तन और वैदिक शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में स्थित राधा-माधव, गौर-निताई, जगन्नाथ-बलदेव-सुभद्रा की सुंदर प्रतिमाएं भक्तों के हृदय को मोह लेती हैं। यहाँ का वातावरण भजन, कीर्तन, और भगवद् गीता के प्रवचनों से सदा गूंजता रहता है।

इस्कॉन प्रयागराज केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि योग, ध्यान, वैदिक अध्ययन और सामुदायिक सेवा का भी जीवंत केंद्र है। यहाँ आयोजित होने वाले प्रोग्राम्स – जैसे सुबह की मंगला आरती, भगवद् गीता कक्षाएं, संडे फिस्ट (प्रसाद वितरण) – हजारों भक्तों और आगंतुकों को आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव कराते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

इस्कॉन मंदिर प्रयागराज शहर के कृष्ण नगर क्षेत्र में स्थित है, जो सिविल लाइंस के निकट है। यह स्थान अपने शांत परिवेश और सुगम पहुंच के लिए जाना जाता है।

  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (इलाहाबाद) सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से मंदिर लगभग 4-5 किमी है। टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली आदि से अच्छी तरह जुड़ा है। निजी बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो मंदिर से लगभग 12-14 किमी दूर है। यहाँ से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि के लिए नियमित उड़ानें हैं।
🗺️

कृष्ण नगर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~4.5 किमी
हवाई अड्डे से दूरी: ~12 किमी

📜 इस्कॉन का इतिहास और दर्शन

अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) की स्थापना 1966 में न्यूयॉर्क शहर में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। उनका उद्देश्य था – संपूर्ण विश्व में भगवान श्री कृष्ण की शुद्ध भक्ति का प्रचार करना। प्रयागराज केंद्र की स्थापना बाद के वर्षों में हुई और यह शीघ्र ही उत्तर भारत के प्रमुख वैष्णव केंद्रों में से एक बन गया।

प्रयागराज, जो त्रिवेणी संगम के लिए विश्वप्रसिद्ध है, का यह मंदिर भक्तों को भगवद् गीता की शिक्षाओं से परिचित कराता है। यहाँ नियमित रूप से भागवत कथा, कीर्तन, और वैदिक संस्कारों का आयोजन होता है।

📖

"हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे |
हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे"

🏛️ भव्य वास्तुकला और दिव्य दर्शन

🙏 राधा-माधव मंदिर

मुख्य मंदिर में श्री श्री राधा-माधव (राधा और कृष्ण) की सुंदर संगमरमर की प्रतिमाएँ विराजमान हैं। इनकी वेशभूषा और श्रृंगार अद्वितीय होते हैं, विशेषकर त्योहारों पर।

🌸 गौर-निताई और जगन्नाथ मंदिर

मंदिर परिसर में श्री गौर-निताई (चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु) तथा श्री जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की सुंदर प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं।

📚 प्रभुपाद पुस्तकालय और भक्ति शास्त्र

यहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय है, जहाँ भगवद् गीता, श्रीमद्भागवतम और अन्य वैदिक साहित्य उपलब्ध हैं। भक्ति शास्त्रों के अध्ययन के लिए नियमित कक्षाएं चलती हैं।

🍛 गोविंदा रेस्टोरेंट (प्रसादालय)

मंदिर परिसर में गोविंदा रेस्टोरेंट है, जहाँ शुद्ध शाकाहारी, पौष्टिक और स्वादिष्ट प्रसाद (भगवान को भोग लगा भोजन) परोसा जाता है। यह आध्यात्मिक अनुभव का अभिन्न अंग है।

🧘 नित्य आरती, भजन और आध्यात्मिक कार्यक्रम

इस्कॉन मंदिर में दिनभर अनेक आध्यात्मिक क्रियाएं होती हैं, जिनमें कोई भी आगंतुक सहभागी बन सकता है:

🌅

मंगला आरती

प्रातः 4:30 बजे – दिव्य कीर्तन और दर्शन। यह मंदिर का सबसे शांत और आध्यात्मिक समय होता है।

📿

श्रीमद्भागवतम् कथा

प्रातः 7:30 बजे से – भागवत पुराण का अध्ययन और प्रवचन।

🍛

भोग आरती & प्रसाद

दोपहर 12:30 बजे – भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद वितरण।

🎶

संध्याकालीन कीर्तन & आरती

शाम 6:30 बजे – सामूहिक कीर्तन और शयन आरती।

🍽️

संडे फिस्ट (रविवार भोज)

प्रत्येक रविवार को मुफ्त प्रसाद वितरण का आयोजन, जिसमें सैकड़ों लोग सहभागी होते हैं।

🎉 प्रमुख त्योहार और उत्सव

🎈

जन्माष्टमी

भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव। रात्रि जागरण, अभिषेक, झांकियाँ और महाप्रसाद। हजारों भक्त आते हैं।

🎭

गौर पूर्णिमा

श्री चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य दिवस। विशेष कीर्तन, नागर संकीर्तन और भोज।

🚌

रथयात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन शहर के मुख्य मार्गों पर निकाला जाता है, जो एक भव्य जन-उत्सव होता है।

🏞️ प्रयागराज में अन्य दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम। यहाँ स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है।
  • अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आज़ाद पार्क): ऐतिहासिक पार्क और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा स्थल।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, अब एक संग्रहालय।
  • हनुमान मंदिर (बड़ा हनुमान): लेटे हुए हनुमान जी की प्रसिद्ध प्रतिमा।
  • अलोपीबाग मंदिर: शक्तिपीठों में से एक।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे उपयुक्त है। मौसम सुहावना रहता है। जन्माष्टमी, रथयात्रा और गौर पूर्णिमा के समय यहाँ विशेष धूम रहती है, हालाँकि भीड़ अधिक होती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंगला आरती (प्रातः 4:30) के लिए पहुंचें – यह समय अत्यंत शांतिपूर्ण होता है।
  • रविवार को संडे फिस्ट (मुफ्त प्रसाद) का लाभ लें।
  • मंदिर परिसर में वैदिक पुस्तकें और प्रसाद अवश्य खरीदें।
  • मंदिर के आचार-विहार का पालन करें (मोजे उतारकर प्रवेश, उचित वस्त्र)।
  • त्योहारों पर अग्रिम आवास बुकिंग कर लें, क्योंकि शहर में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: इस्कॉन मंदिर, प्रयागराज कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह प्रयागराज शहर के कृष्ण नगर क्षेत्र में स्थित है। प्रयागराज जंक्शन से लगभग 4-5 किमी दूर है।

प्रश्न 2: मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

उत्तर: सामान्य दर्शन प्रातः 4:30 से 12:30 बजे तक और शाम 4:00 से 8:30 बजे तक। आरती के समय विशेष दर्शन होते हैं।

प्रश्न 3: क्या मंदिर में प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, प्रवेश निःशुल्क है। प्रसाद और दान स्वैच्छिक हैं।

प्रश्न 4: क्या यहाँ आवास की सुविधा है?

उत्तर: मंदिर परिसर में सीमित धर्मशाला सुविधा उपलब्ध है। शहर में कई होटल और गेस्ट हाउस भी हैं।

प्रश्न 5: क्या विदेशी पर्यटक यहाँ आ सकते हैं?

उत्तर: हाँ, इस्कॉन का वैश्विक नेटवर्क है, और यहाँ सभी धर्मों एवं देशों के लोगों का स्वागत है। अंग्रेजी में भी प्रवचन की व्यवस्था है।

🙏 इस्कॉन मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

इस्कॉन मंदिर, कृष्ण नगर, प्रयागराज आध्यात्मिकता, भक्ति और शांति का अद्भुत संगम है। यहाँ का दिव्य वातावरण, नित्य कीर्तन, शास्त्र चर्चा और शुद्ध प्रसाद व्यक्ति को भीतर से परिवर्तित करने की क्षमता रखते हैं। चाहे आप भगवान कृष्ण के भक्त हों, आध्यात्मिक जिज्ञासु हों, या केवल शांति की खोज में हों – यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।

प्रयागराज की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर न केवल दर्शनीय है, बल्कि यहाँ आकर वैदिक जीवनशैली और भक्ति योग के व्यावहारिक पक्षों को जानने का भी अवसर मिलता है।

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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