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हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो | Harihar Nath ji K mahima Apar Ho | Rajnish Sharma 2021 - BhaktiLok

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सनातन धर्म में 'हरिहर' स्वरूप भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) के परम ऐक्य एवं अभेद भाव का महान प्रतीक है। "हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो" एक अत्यंत पावन एवं भावपूर्ण भक्ति भजन है, जिसमें बाबा हरिहर नाथ जी के अलौकिक प्रभाव, दयामयी स्वरूप और दिव्य कृपा का यशोगान किया गया है। बिहार के प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र सोनपुर (गंडक और गंगा नदी के पवित्र संगम) पर स्थित बाबा हरिहर नाथ का धाम संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। इस भजन को रजनीश शर्मा जी ने अपने मधुर स्वर में गाकर साधकों के हृदय में भक्ति रस का संचार किया है। इस लेख में हम आपके लिए हरिहर नाथ जी के इस प्रसिद्ध भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसका विस्तृत हिंदी भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और हरिहर तत्व की महिमा प्रस्तुत कर रहे हैं। इस भजन के नियमित श्रवण और संकीर्तन से साधक के जीवन में मानसिक शांति, पापों से मुक्ति और भगवान श्री हरि तथा देवाधिदेव महादेव दोनों की संयुक्त अनुकंपा प्राप्त होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय बाबा हरिहर नाथ | हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो

जय जय हरिहर देव कृपाला।
सोनपुर के बाबा दीनदयाला॥
हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो।
जेकरा पे हो जाई कृपा तोहार हो,
ओकरा जीवन से मिट जाई अंधियार हो॥

हरि औ हर के रूप सुहावन।
संगम तट पर धाम अति पावन॥
गंगा गंडकी के पावन धारा।
दरस किए से कट जाई पाप हमारा॥
हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो...॥

एही ठाई गंज और ग्राह लड़ल रहे।
मुक्ति खातिर गजेन्द्र पुकारल रहे॥
चक्र चलाके प्रभु प्राण बचवले।
असुर संहारि के भय दूर भगवले॥
हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो...॥

कार्तिक पूर्णिमा के लागल बा मेला।
भक्तन के भीड़ बावे, दर्शन के बेला॥
शिव-विष्णु के भजले सब दुख दूर होई।
हरिहर कृपा से सब मनसा पूर होई॥
हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो...॥

रजनीश शर्मा गावे गुणगान हो।
चरनन में सिर नवावे सब जहान हो॥
जो भी शरण में आई खाली ना जाई।
हरिहर नाथ जी के जय-जयकार हो॥
हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भक्ति भजन केवल संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि भगवान विष्णु और भगवान शिव के एकीकृत स्वरूप के प्रति अगाध श्रद्धा और शरणागति का जीवंत रूप है। भजन के प्रत्येक पद में भक्तों की मनोभावना और हरिहर धाम की पौराणिक गाथा का सुंदर सम्मिश्रण है:

मंगलाचरण एवं महिमा गान

भजन के प्रारंभिक पंक्तियों में भक्त बाबा हरिहर नाथ जी की जय-जयकार करते हुए उनके दीनदयाल स्वरूप की वंदना करता है। भक्त कहता है कि हे सोनपुर के स्वामी बाबा हरिहर नाथ! आपकी महिमा असीम और पारहीन है। जिस मनुष्य पर आपकी तनिक भी कृपादृष्टि हो जाती है, उसके जीवन के सारे अज्ञान और दुख रूपी अंधकार सदा-सदा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

धाम एवं संगम की पवित्रता

अगले पदों में बाबा हरिहर नाथ जी के पवित्र क्षेत्र सोनपुर के प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक सौंदर्य का वर्णन है। जहाँ पतित पावनी माँ गंगा और पवित्र गंडकी नदी का दिव्य संगम होता है, वहीं बाबा हरिहर नाथ का अलौकिक धाम स्थापित है। इस पावन संगम तट पर भगवान श्री हरि और भगवान हर (शिव) एक साथ विराजते हैं। इस पवित्र धाम का दर्शन मात्र करने से जीव के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

गज और ग्राह के पौराणिक प्रसंग का स्मरण

भजन में श्रीमद्भागवत महापुराण की अत्यंत प्रसिद्ध कथा 'गजेन्द्र मोक्ष' का स्मरण कराया गया है। इसी पावन भूमि पर जब गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) का भीषण युद्ध हुआ था और गजराज ने अत्यंत कातर भाव से कमल पुष्प जल में उठाकर 'हे हरि! हे गोविन्द!' पुकारा था, तब भगवान श्री हरि ने अपने सुदर्शन चक्र से ग्राह का उद्धार किया और अपने भक्त गजराज की रक्षा की। यह स्थान संकट मोचन की इसी अमर गाथा का साक्षी है।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान और फलश्रुति

भजन के अंतिम चरणों में सोनपुर के सुप्रसिद्ध कार्तिक पूर्णिमा मेले और दर्शन की परंपरा का बखान है। कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान कर हरिहर नाथ बाबा का जल-अभिषेक करते हैं। जो साधक शिव और विष्णु के इस संयुक्त स्वरूप का स्मरण व भजन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन आनंदमय बनता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन धर्म की दार्शनिक परंपरा में हरिहर नाथ धाम का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। इस भजन को सुनने और गाने के कई आध्यात्मिक लाभ हैं:

  • हरि और हर का अभेद दर्शन: वैष्णव और शैव संप्रदायों के मध्य एकता स्थापित करने वाला यह सबसे बड़ा प्रतीक है। शास्त्र कहते हैं—"शिवस्य हृदयं विष्णुः विष्णोश्च हृदयं शिवः" अर्थात शिव का हृदय विष्णु हैं और विष्णु का हृदय शिव हैं।
  • संकटमोचन एवं अभय प्राप्ति: गजेन्द्र मोक्ष की पावन भूमि होने के कारण यहाँ हरिहर नाथ जी का स्मरण करने से साधक को अपने जीवन के भारी से भारी संकटों से मुक्ति मिलती है।
  • सोनपुर क्षेत्र का महात्म्य: उत्तर भारत का प्रसिद्ध सोनपुर मेला केवल एक व्यापारिक या सांस्कृतिक मेला नहीं है, बल्कि यह एक सिद्ध तपोभूमि है जहाँ देवताओं का वास माना जाता है।
  • मानसिक शांति व सर्व-मनोकामना पूर्ति: इस भजन के निरंतर श्रवण से मन का तनाव दूर होता है और साधक के भीतर सात्विक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन और प्रभु संकीर्तन का फल तब बहुगुणित हो जाता है जब उसे सही भाव, समय और श्रद्धा के साथ किया जाए:

विषय संस्तुत विधि एवं समय
सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्राह्म मुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय। कार्तिक मास में इसका पाठ करना विशेष फलदायी है।
विशेष अवसर कार्तिक पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, देवशयनी/देवोत्थान एकादशी और प्रत्येक सोमवार व एकादशी को।
पूजा विधि स्वच्छ वस्त्र धारण कर तांबे के पात्र में जल, तुलसीदल (विष्णु जी हेतु) व बेलपत्र (शिव जी हेतु) लेकर बाबा हरिहर नाथ का ध्यान करें।
गायन का भाव पूर्ण शरणागति, दैन्य भाव और ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति निष्ठा के साथ संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

बाबा हरिहर नाथ जी का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

बाबा हरिहर नाथ जी का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर बिहार राज्य के सारण जिले में स्थित 'सोनपुर' में गंगा और गंडक नदी के पवित्र संगम पर स्थित है।

'हरिहर' का शाब्दिक अर्थ क्या है?

'हरिहर' दो शब्दों से मिलकर बना है—'हरि' (भगवान विष्णु) और 'हर' (भगवान शिव)। यह अवतार दोनों परम सत्ताओं के संयुक्त स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।

हरिहर नाथ मंदिर का गजेन्द्र मोक्ष कथा से क्या संबंध है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीमद्भागवत में वर्णित गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) का युद्ध इसी सोनपुर क्षेत्र में गंडक नदी के तट पर हुआ था, जहाँ भगवान विष्णु ने प्रकट होकर गजराज की रक्षा की थी।

इस भजन "हरिहर नाथ जी के महिमा अपार हो" के गायक कौन हैं?

वर्ष 2021 में जारी इस सुप्रसिद्ध भक्ति भजन को लोकप्रिय गायक रजनीश शर्मा (Rajnish Sharma) जी ने अपनी मधुर वाणी में गाया है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हरिहर नाथ मंदिर में स्नान का क्या महत्व है?

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा-गंडकी संगम में स्नान कर बाबा हरिहर नाथ पर जलाभिषेक करने से करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: यह लेख भक्तिलोक विद्वत परिषद द्वारा पौराणिक प्रमाणों, श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों तथा हरिहर नाथ क्षेत्र महात्म्य के आधार पर तैयार किया गया है। प्रस्तुत भजन की भाषा और भाव प्रामाणिक भक्ति परंपरा के अनुरूप हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे प्रभु संकीर्तन को पूर्ण निष्ठा और पवित्रता के साथ अपनाएं।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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