जुलम कर डारो सितम कर डारो (Julam Kar Daaryo Lyrics in Hindi) - Holi Geet Lakhbir Singh Lakkha - Bhaktilok
भक्ति और संगीत के पावन संगम में लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) द्वारा गाए गए होली गीत "जुलम कर डारो सितम कर डारो" का विशेष स्थान है। यह भजन और गीत केवल ब्रज की होली के उल्लास को ही नहीं दर्शाता, बल्कि भगवान श्री कृष्ण और भक्तों के बीच के अनन्य, निश्चल और मधुर प्रेम (प्रेम भाव, विरह और समर्पण) की पराकाष्ठा को उजागर करता है। जब फाल्गुन मास की मस्ती और रंगों का पर्व होली नजदीक आता है, तब संपूर्ण उत्तर भारत विशेषकर ब्रजमंडल, बरसाना, नंदगांव और मथुरा के साथ-साथ देश-विदेश के देवालयों में इस भक्ति गीत की गूंज सुनाई देती है। लखबीर सिंह लक्खा की ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज में यह रचना श्रोताओं को भक्ति के सागर में गोता लगाने के लिए विवश कर देती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय होली गीत के सम्पूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, कथा प्रसंग, गायन की विधि और जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सीखों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थायी (मुखड़ा):
जुलम कर डारो सितम कर डारो,
सांवरिया ब्रज में होली खेलन आयो री...
जुलम कर डारो सितम कर डारो!
अंतरा 1:
राधा रानी के महलन में आज धूम मची भारी,
ग्वाल-बाल सब संग कन्हैया ले आए पिचकारी।
रंग गुलाल उड़ाए ऐसे, सुध-बुध बिसराई,
नंद किसोरी संग में बरसे प्रेम की फुहारारी।
जुलम कर डारो सितम कर डारो,
सांवरिया ब्रज में होली खेलन आयो री!
अंतरा 2:
नारद जी की सच्ची भक्ति और प्रेम का जादू छाया,
भक्तों ने इस लीला में अपना सब कुछ है गंवाया।
दुखों की आंधी में भी जो प्रभु का नाम पुकारे,
उस पर श्याम सलोना अपना रूप लुटाया।
जुलम कर डारो सितम कर डारो,
सांवरिया ब्रज में होली खेलन आयो री!
अंतरा 3:
भर पिचकारी केसर वाली मोहन हाथ चलाई,
गोपियों की चुनर सारी रंग में रंगी नहाई।
छल-कपट सब दूर हुआ और प्रेम रंग में रंगे सभी,
लक्खा गाए गुण मोहन के, मन में प्रीत जगाई।
जुलम कर डारो सितम कर डारो,
सांवरिया ब्रज में होली खेलन आयो री!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस पावन गीत के प्रत्येक शब्द और पंक्ति में गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक संदेश छिपा हुआ है। जब हम इसके शाब्दिक अर्थ से परे जाकर इसके आंतरिक भाव (Bhavarth) को समझते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि यह केवल रंगों के त्यौहार होली का वर्णन नहीं है, बल्कि जीव (भक्त) और परमात्मा (श्री कृष्ण) के मिलन का उत्सव है।
'जुलम कर डारो सितम कर डारो' इन पंक्तियों का अर्थ सांसारिक अर्थों में अत्याचार या क्रूरता नहीं है, बल्कि यह भक्त की उस प्रेममयी व्यथा और हठ को दर्शाता है जो वह अपने प्रियतम श्याम सुंदर से करता है। भक्त भगवान से कहता है कि हे सांवरिया! तू अपनी कृपा और अपने प्रेम का ऐसा 'जुल्म' या 'सितम' मुझ पर कर कि मेरा अहंकार, मेरा मैं-पन और सारे सांसारिक बंधन हमेशा के लिए समाप्त हो जाएं। ब्रज की होली में भगवान कृष्ण भक्तों के साथ जो प्रेम का खेल खेलते हैं, वह संसार के सभी बंधनों को तोड़कर आत्मा को परमात्मा में लीन कर देता है।
गीत में नारद जी के प्रसंग और गोपियों की भक्ति का उल्लेख यह सिखाता है कि जब भक्त भगवान के प्रेम में पूरी तरह से सराबोर हो जाता है, तब उसे संसार के सुख-दुख या कष्ट स्पर्श नहीं कर पाते। केसर और गुलाल का रंग इस बात का प्रतीक है कि भगवान की भक्ति का रंग ऐसा पक्का रंग है जो दुनिया के किसी अन्य रंग से नहीं धुलता।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस भजन और गीत का मुख्य केंद्रीय भाव अनन्य प्रेम (Prem Bhakti), समर्पण और उत्सव का आनंद है। लखबीर सिंह लक्खा की शैली में गाए गए इस गीत से निम्नलिखित प्रमुख संदेश प्राप्त होते हैं:
- प्रेम और समर्पण: भगवान के साथ प्रेम का संबंध सभी प्रकार के भेदों को मिटा देता है।
- कठिन समय में आस्था: जीवन के 'जुल्म' और 'सितम' यानी कठिनाइयों के बीच भी भगवान का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है।
- उत्सवधर्मिता: सनातन संस्कृति में हर पर्व को भगवान की लीला मानकर आनंद के साथ मनाने की प्रेरणा दी गई है।
- अधिक जानकारी और संबंधित गीतों के लिए आप भक्ति भजन संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | जुलम कर डारो सितम कर डारो (Julam Kar Daaryo) |
|---|---|
| गायक (Singer) | लखबीर सिंह लakkha (Lakhbir Singh Lakkha) |
| श्रेणी / विधा (Category) | Holi Bhajan / Holi Geet / ब्रज होली गीत |
| भाषा (Language) | हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित |
| मुख्य विषय (Theme) | कृष्ण भक्ति, होली का उल्लास, प्रेम और समर्पण |
| संबंधित उत्सव (Festival) | फाल्गुन मास एवं होली उत्सव |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
इस अद्भुत रचना को अपनी सुमधुर आवाज से सजाने वाले लखबीर सिंह लक्खा भारतीय भक्ति संगीत जगत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और लोकप्रिय गायक हैं। उनके गाए हुए माता के भजन, श्री कृष्ण के भजन और विशेष रूप से होली गीत पूरे भारत में अत्यधिक चाव से सुने जाते हैं। उनकी गायकी की विशेषता यह है कि वे शब्दों के उच्चारण के साथ-साथ उनके भाव को श्रोताओं के हृदय तक सीधे पहुंचा देते हैं। संगीत संयोजन और पारंपरिक धुनों का ऐसा सुंदर मेल इस गीत को पीढ़ियों से लोकप्रिय बनाए हुए है। पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण से तैयार यह गीत हर आयु वर्ग के लोगों को झूमने पर मजबूर कर देता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| जुलम / जुल्म | अति या तीव्रता | प्रेम की अति तीव्रता या भक्ति का हठ |
| सितम | कष्ट या प्रहार | सांसारिक बाधाओं या प्रेम का अनूठा प्रहार |
| सांवरिया | सांवले रंग वाले भगवान श्री कृष्ण | इष्ट देव श्री कृष्ण के लिए संबोधन |
| गुलाल | लाल रंग का चूर्ण | होली के अवसर पर उड़ाए जाने वाला पवित्र रंग |
| पिसकारी | रंग डालने वाला यंत्र | ब्रज की होली का पारंपरिक साधन |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भारतीय संस्कृति में होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह फाल्गुन मास की मस्ती, प्रेम और दिव्यता का प्रतीक है। ब्रज की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है जहाँ भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम की वर्षा आज भी जीवंत है। यह गीत श्रोताओं को मानसिक रूप से तनावमुक्त कर आध्यात्मिक आनंद से भर देता है। जब भक्त इस गीत को गाते या सुनते हैं, तो उनका मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर वृंदावन के कुंजों और गलियों की कल्पना में लीन हो जाता है। इसी संदर्भ में आप श्री कृष्ण भजन लिरिक्स के माध्यम से अन्य लोकप्रिय रचनाओं का भी आनंद ले सकते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- आनंद के साथ जीवन जीना: जीवन में चाहे कितनी भी समस्याएं क्यों न हों, उत्सव और सकारात्मकता को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
- अहंकार का त्याग: होली का रंग सभी को एक रंग में रंग देता है, जो यह सिखाता है कि समाज में ऊंच-नीच का भेद मिटाकर सबको एक मानना चाहिए।
- प्रभु पर अटूट विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत मुख्य रूप से निम्नलिखित अवसरों पर अत्यंत चाव से सुना और गाया जाता है:
- फाल्गुन मास की प्रतिपदा से लेकर होलिका दहन और धुलंडी (धुलेंडी) तक।
- घरों और मंदिरों में आयोजित होने वाले होली मिलन समारोह और भजन संध्या के दौरान।
- वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की यात्रा या वहां होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों में।
- दैनिक पूजा-पाठ के पश्चात जब मन को उल्लासित और प्रसन्न करना हो।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| गीत शीर्षक | जुलम कर डारो सितम कर डारो |
| गायक | लखबीर सिंह लक्खा |
| संगीत शैली | लोक आधारित भक्ति संगीत / होली भजन |
| मुख्य भाव | प्रेम, उल्लास, भक्ति और समर्पण |
| उपयुक्त अवसर | होली उत्सव, सत्संग, भजन संध्या |
| लोकप्रियता | अत्यधिक लोकप्रिय (लाखों श्रोता) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह लेख पारंपरिक स्रोतों, लोकगीतों की संस्कृति और श्रोताओं के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। हमारा उद्देश्य सनातन संस्कृति, लोक संगीत और भक्ति साहित्य को प्रामाणिक रूप से पाठकों तक पहुँचाना है। यदि आप इस गीत के संबंध में कोई अन्य सुझाव या जानकारी साझा करना चाहते हैं, तो आप हमारे अन्य लेख जैसे होली के भजन लिरिक्स भी देख सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक ब्रज लोकगीत एवं फाल्गुन उत्सव परंपराएं
- लखबीर सिंह लakkha के आधिकारिक एल्बम एवं संगीत संग्रह
- भारतीय भक्ति संगीत और संत साहित्य के अध्ययन
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