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ना माने ना माने रे माता महाकाली लिरिक्स (Na Mane Na Mane Re Mata Mahakali Lyrics in Hindi) - Kali Mata Bhajan Shahnaz Akhtar - Bhaktilok

265 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माता महाकाली की उग्र और कल्याणकारी ऊर्जा को समर्पित "ना माने ना माने रे माता महाकाली" एक अत्यंत प्रभावशाली और भक्तिपूर्ण भजन है। यह भजन विशेष रूप से माँ काली के रणचंडी स्वरूप, उनके रौद्र रूप और दुष्टों के संहारक स्वभाव का वर्णन करता है। शहनाज अख्तर की ओजस्वी आवाज में यह भजन भक्तों के हृदय में माँ के प्रति श्रद्धा और भय-मिश्रित भक्ति का संचार करता है। महाकाली, जो समय की अधिष्ठात्री देवी हैं, इस भजन के माध्यम से अपने भक्तों को यह संदेश देती हैं कि धर्म की रक्षा के लिए वे किसी भी सीमा तक जा सकती हैं। यह भजन नवरात्रि, काली पूजा, अमावस्या और विशेष रूप से माँ काली के मंदिरों में आयोजित होने वाले जागरणों में अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ना माने ना माने ना माने रे,
हे माता महाकाली।
झटकाए लट काली काली,
लम्बे लम्बे कदम बढ़ा ली,
खून से खप्पर को भर डाली,
ना माने ना माने ना माने रे,
हे माता महाकाली...||

एक हाथ खड्ग लिए,
दूजे हाथ में है तलवार,
रक्त बीज के शीश काट ली,
चंडी करती वार पे वार,
एक बूंद न गिरी जमीन पर,
खून दुष्टों का पी डाली,
ना माने ना माने ना माने रे,
हे माता महाकाली...||

आंखों से चिंगारी छोड़े,
मुख से माँ छोड़े ज्वाला,
क्रोध भयंकर है काली का,
दूर हटे आने वाला,
सुनो युद्ध की इस भूमि पर,
खून से छाई है लाली,
ना माने ना माने ना माने रे,
हे माता महाकाली...||

शांत हुई न जब रणचंडी,
जब मचा हुआ था हाहाकार,
तब काली का क्रोध मिटाने,
आये निरंजन शिव त्रिपुरार,
पाँव पड़ा जब शिव जी के ऊपर,
जीभ चंडिका ने निकाली,
ना माने ना माने ना माने रे,
हे माता महाकाली...||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में माँ काली के उस स्वरूप का चित्रण है जब वे असुरों के संहार के लिए अत्यंत क्रोधित हो गई थीं। "ना माने ना माने" का अर्थ है कि माँ काली किसी के रोके नहीं रुकतीं जब वे अधर्म का विनाश करने पर उतारू होती हैं। भजन की पंक्तियाँ उनके रौद्र रूप का वर्णन करती हैं—उनकी बिखरी हुई काली लटें, उनका विशालकाय रूप और असुरों के रक्त से खप्पर भरना उनकी शक्ति का प्रतीक है।

भजन का दूसरा भाग रक्तबीज वध की कथा को दर्शाता है। माँ काली ने अपनी खड्ग और तलवार से रक्तबीज जैसे शक्तिशाली असुर का संहार किया। उनकी विशेषता यह थी कि उन्होंने रक्तबीज का एक भी रक्त बिंदु जमीन पर नहीं गिरने दिया, क्योंकि प्रत्येक बूंद से एक नया असुर पैदा हो रहा था। अंत में, जब माँ का क्रोध शांत नहीं हुआ, तो स्वयं भगवान शिव उनके मार्ग में लेट गए। जैसे ही माँ का पैर शिवजी पर पड़ा, उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने लज्जावश अपनी जीभ बाहर निकाल ली। यह दृश्य माँ काली के 'भयंकरी' से 'सौम्या' बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शक्ति का प्रतीक: यह भजन नारी शक्ति और दुष्टों के विनाश की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
  • पौराणिक संदर्भ: इसमें रक्तबीज वध और शिव-शक्ति मिलन की कथा समाहित है।
  • भक्ति भाव: यह भजन भक्तों को यह सिखाता है कि माँ काली का क्रोध केवल अधर्म के विरुद्ध है, अपने भक्तों के लिए वे सदैव कल्याणकारी हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से काली पूजा, नवरात्रि की अष्टमी या चतुर्दशी की रात्रि को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सुनते समय मन में माँ काली के चित्र का ध्यान करना चाहिए। दीपक जलाकर और धूप-दीप अर्पित करके इस भजन का पाठ करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
खड्ग शक्तिशाली तलवार या शस्त्र
रक्तबीज वह असुर जिसका प्रत्येक रक्त बिंदु एक नया असुर बनाता था
निरंजन भगवान शिव (जो माया से परे हैं)
चंडिका माँ काली का एक उग्र नाम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

माँ काली काल (समय) की देवी हैं। उनकी पूजा भय को दूर करने, शत्रुओं पर विजय पाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है।

हाँ, माँ काली के भजन और स्तुति घर पर पूरी श्रद्धा और सात्विकता के साथ गाए जा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री माँ काली की स्तुति और पौराणिक कथाओं के आधार पर तैयार की गई है। भजन के बोल शहनाज अख्तर द्वारा गाए गए संस्करण पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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