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વિશ્વંભરી સ્તુતી (vishwambhari stuti Lyrics) - Bhaktilok

895 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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विश्वंभरी स्तुती (Vishvambhari Stuti Lyrics): जीवन का आधार और सृष्टि का पोषण

विश्वम्भरी स्तुति सनातन संस्कृति में जगत जननी माँ आदिशक्ति को समर्पित एक अत्यंत ही भावपूर्ण और दिव्य प्रार्थना है। 'विश्वम्भरी' शब्द का शाब्दिक अर्थ है— संपूर्ण विश्व या ब्रह्मांड का भरण-पोषण करने वाली। यह स्तुति केवल शब्दों का एक पुंज मात्र नहीं है, अपितु यह एक जीव की अपनी माँ के प्रति अनन्य भक्ति, समर्पण, और अगाध विश्वास की वह पुकार है जो सांसारिक दुखों के भवसागर से पार लगाती है। हिन्दू धर्म परंपरा में जब भी मानव जीवन संकटों से घिरता है या जब मन में अवसाद और संशय उत्पन्न होते हैं, तब भक्त अपनी समस्त चिंताओं को त्यागकर जगत जननी के चरणों में शरण लेता है। माँ विश्वम्भरी की यह स्तुति साधक के भीतर आत्मबल, धैर्य, और आंतरिक शांति का संचार करती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम विश्वम्भरी स्तुति के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, इसके गायन और श्रवण की विधि, और इसके जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इस पवित्र पाठ के माध्यम से साधक न केवल अपनी मानसिक ऊर्जा को प्रज्वलित कर सकता है, बल्कि देवी दुर्गा या जगदम्बा की असीम अनुकंपा भी प्राप्त कर सकता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

विश्वम्भरी स्तुति: जीवन का आधार और सृष्टि का पोषण

विश्वम्भरी स्तुती - जगज्जननी तुमको समर्पित करती हूँ।
सर्वस्व सृष्टि का आधार, सृष्टि की माँ, तुमको नमन करती हूँ।
जीवनदायिनी माँ, सर्वजननी, तुम्हारे बिना यह सृष्टि अधूरी है।
हर धड़कन में तुम हो, हर प्राणी में तुम हो, हर जगह तुम्हारा वास है।
तुमसे जोड़े हैं सभी, तुम हो भक्तों के संरक्षक।
तुम्हारे चरणों में सब कुछ है, तुम हो भक्ति का आधार।
संकटों में तुमसे अपील, हम सबकी तुम हो अनुकंपा।
जीवन की हर राह में, सब कुछ तुम्हारे भक्तों की खातिर करती हूँ।
संसार में कष्ट होते हैं, पर तुम हो देखभाल करती।
शक्ति स्वरूपा, शांति का प्रतीक, तुम हो सृष्टि का दर्शन।
तुम हो ममता की सागर, तुम हो सभी की माता।
तेरी गोद में सांत्वना, तेरे आँचल में प्यार।
वंदन करती हूँ तुम्हारा, हे विश्वम्भरी माता।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

विश्वम्भरी स्तुति का प्रत्येक शब्द माँ भगवती की महिमा और उनके वात्सल्यमय स्वरूप का बखान करता है। जब भक्त यह कहता है कि "जगज्जननी तुमको समर्पित करती हूँ," तो इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह होता है कि मनुष्य अपनी अहंकारयुक्त बुद्धि और संपूर्ण कर्मों को ब्रह्मांडीय चेतना के चरणों में अर्पित कर रहा है। 'सर्वस्व सृष्टि का आधार' पंक्ति यह बताती है कि यह दृश्यमान संसार केवल भौतिक तत्वों का संयोग नहीं है, बल्कि इसके मूल में एक दिव्य मातृशक्ति विद्यमान है जो इसे थामे हुए है।

जीवनदायिनी और सर्वजननी के रूप में माँ हर प्राणी की प्राण-शक्ति हैं। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच जब व्यक्ति अकेलापन महसूस करता है, तब यह भाव कि "हर धड़कन में तुम हो, हर प्राणी में तुम हो," साधक को यह अहसास कराता है कि वह कभी अकेला नहीं है। माँ विश्वम्भरी भक्तों की संरक्षक हैं; वे संकटों के समय अपने आँचल की छाया प्रदान करती हैं। इस स्तुति का भावार्थ हमें यह सिखाता है कि जीवन के उतार-चढ़ाव, कष्ट और बाधाएं प्रकृति का नियम हैं, किंतु माँ की अनुकंपा और ममता इन सभी बाधाओं से पार पाने का अजेय संबल प्रदान करती है। उनकी गोद में मिलने वाली सांत्वना और उनके आँचल का प्यार साधक के मन के सारे भय और संतापों को हर लेता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह स्तुति सनातन धर्म के शाश्वत मातृत्व भाव पर आधारित है। हिन्दू दर्शन में ईश्वर को केवल निराकार या पिता रूप में ही नहीं, बल्कि 'माता' के रूप में भी अत्यंत निकटता से अनुभव किया गया है। विश्वम्भरी स्तुति की मुख्य विशेषता इसकी सरलता, मार्मिकता और हृदय को छू लेने वाली शब्दावली है। इसे बिना किसी कठिन संस्कृत व्याकरण के ज्ञान के भी कोई भी सामान्य भक्त आसानी से गा सकता है। इसका सांस्कृतिक महत्व इस बात में है कि यह समाज में स्त्री शक्ति (नारी शक्ति) के सर्वोच्च और पूजनीय स्वरूप को स्थापित करती है। नवरात्र, शुक्रवार की पूजा, या किसी भी संकट के समय इस स्तुति का पाठ करने से मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके पाठ से साधक के चक्र जागृत होते हैं और हृदय चक्र में करुणा तथा प्रेम का भाव प्रस्फुटन होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

किसी भी देव स्तुति या भजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। विश्वम्भरी स्तुति का पाठ करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4:00 से 6:00 बजे का समय) या संध्या बेला (गोदूलि बेला) को सर्वोत्तम माना गया है।

  • स्थान की शुद्धि: पूजा कक्ष या घर के किसी शांत और पवित्र कोने को स्वच्छ करें।
  • दीपक प्रज्वलन: माँ भगवती के समक्ष शुद्ध गाय के घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  • आसन: ऊनी या कुशा के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • भाव: पाठ करते समय मन में पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का भाव रखें। शब्दों को जल्दबाजी में पढ़ने के बजाय उनके अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें।
  • सामूहिक गान: इस स्तुति को परिवार के साथ मिलकर या सत्संग के दौरान भी गाया जा सकता है, जिससे पारिवारिक वातावरण में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

विश्वम्भरी स्तुति की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा, जगदम्बा, आदिशक्ति और माँ पार्वती का सम्मिलित स्वरूप हैं। वे ही इस ब्रह्मांड की रचना, पालन और संहार की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। सनातन परंपरा में आदि शंकराचार्य से लेकर आधुनिक काल के कई संतों और भक्तों ने माँ के इस मातृस्वरूप का गुणगान किया है। इस स्तुति के रचयिता या परंपरा में यह लोक-भजन के रूप में पीढ़ियों से प्रवाहित होती रही है, जिसमें भक्त अपनी माता के रूप में जगत जननी से संवाद स्थापित करता है। यह श्री हनुमान स्तुति और रामचरितमानस की भक्ति परंपरा की तरह ही शरणागत वत्सला भाव को समर्पित है, जहाँ भगवान या देवी से सीधा और आत्मीय संबंध जोड़ा जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस स्तुति की रचना की पृष्ठभूमि मानवीय संवेदनाओं और आध्यात्मिक जिज्ञासा से जुड़ी है। जब-जब मानव मन सांसारिक प्रपंचों और दुखों से व्यथित होता है, तब-तब उसके भीतर से एक सहज प्रार्थना प्रगट होती है। यह स्तुति किसी एक ग्रंथ विशेष तक सीमित न होकर लोक-साहित्य और भक्ति आंदोलन की देन है, जहाँ साधारण बोलचाल की भाषा में उच्च कोटि के दार्शनिक सत्यों को पिरोया गया है। इसमें Parashuram Stuti और अन्य पारंपरिक स्तोत्रों की तरह ही देवी की अजेय शक्ति और करुणा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह स्तुति सरल, प्रवाहमयी और हृदयस्पर्शी हिंदी/संस्कृत मिश्रित लोक भाषा में रचित है। इसमें अलंकारों का जटिल प्रयोग करने के बजाय सीधी और सच्ची भावनाओं को प्राथमिकता दी गई है। "हर धड़कन में तुम हो", "ममता की सागर", और "आँचल में प्यार" जैसे रूपक (Metaphors) इस रचना की काव्य शैली को अत्यंत जीवंत बनाते हैं। यह शैली पाठक के मन पर सीधा प्रभाव डालती है और उसे तुरंत ही भक्ति भाव से भर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

विश्वंभरी स्तुति हमें यह सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आए, परम शक्ति पर हमारा विश्वास कभी नहीं डगमगाना चाहिए।

  • पूर्ण शरणागति (Surrender): अपने अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में सब कुछ अर्पित कर देना ही सच्ची भक्ति है।
  • आत्मविश्वास: यह जानना कि हर धड़कन में ईश्वर का वास है, व्यक्ति को अंदर से निर्भय बनाता है।
  • करुणा और ममता का विकास: जिस प्रकार माँ सबका पोषण करती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने आसपास के जीवों के प्रति दयालु होना चाहिए।
  • धैर्य और सहनशीलता: संसार में कष्टों का आना स्वाभाविक है, किंतु माँ की देखभाल और अनुकंपा पर भरोसा रखकर हर संकट से उबरा जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
विश्वम्भरी सम्पूर्ण विश्व का भरण-पोषण करने वाली माता आदिशक्ति का विशेषण
जगज्जननी संसार को जन्म देने वाली माता सृष्टि की मूल देवी
सर्वस्व सब कुछ, संपूर्ण संपत्ति या अस्तित्व समर्पण का भाव
जीवनदायिनी जीवन प्रदान करने वाली प्राण-शक्ति की स्वामिनी
अनुकंपा कृपा, दया या आशीर्वाद भक्तों पर माँ की कृपा
सांत्वना ढांढस, मानसिक शांति या दिलासा दुख के समय माँ का संबल

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"विश्वम्भरी स्तुती - जगज्जननी तुमको समर्पित करती हूँ।"
यहाँ भक्त अपनी आराध्य को संबोधित करते हुए अपने जीवन और कर्मों को उन्हें समर्पित करता है।

"सर्वस्व सृष्टि का आधार, सृष्टि की माँ, तुमको नमन करती हूँ।"
यह इस बात का स्वीकार है कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड जिस शक्ति पर टिका है, मैं उस आदि शक्ति को प्रणाम करती हूँ।

"जीवनदायिनी माँ, सर्वजननी, तुम्हारे बिना यह सृष्टि अधूरी है।"
माता के बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है, क्योंकि वे ही पालनहार हैं।

"हर धड़कन में तुम हो, हर प्राणी में तुम हो, हर जगह तुम्हारा वास है।"
यह अद्वैत और व्यापक भक्ति का दर्शन है, जो कण-कण में देवी की उपस्थिति को महसूस कराता है।

"तेरी गोद में सांत्वना, तेरे आँचल में प्यार। वंदन करती हूँ तुम्हारा, हे विश्वम्भरी माता।"
अंत में भक्त माँ के वात्सल्य की शरण में आकर अपनी समस्त पीड़ाओं से मुक्त हो जाता है और उन्हें नमन करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस स्तुति के साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

यह श्लोक माँ भगवती के मंगलकारी और सर्वार्थ सिद्ध करने वाले स्वरूप का स्मरण कराता है, जो विश्वम्भरी स्तुति के मूल भाव के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम विश्वम्भरी स्तुति (Vishvambhari Stuti)
आराध्य देवी माँ आदिशक्ति, जगदम्बा, दुर्गा
रचनाकार / परंपरा पारंपरिक सनातन लोक स्तुति
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधि मिश्रित
मुख्य विषय मातृ-भक्ति, पोषण, और पूर्ण समर्पण
प्रमुख भाव शरणागति, प्रेम, और मानसिक शांति
उपयुक्त अवसर नवरात्र, दैनिक पूजा, संकट काल, और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: विश्वम्भरी स्तुति का मुख्य अर्थ क्या है?
A1: विश्वम्भरी स्तुति का अर्थ उस महान मातृशक्ति की वंदना करना है जो संपूर्ण ब्रह्मांड का पालन-पोषण करती है और भक्तों के सभी संकटों को दूर करती है।

Q2: इस स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?
A2: इस स्तुति का पाठ प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या आरती के समय करना सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा मानसिक अशांति या संकट के समय भी इसका पाठ किया जा सकता है।

Q3: क्या इस स्तुति का पाठ घर पर कोई भी कर सकता है?
A3: हाँ, इस स्तुति की भाषा अत्यंत सरल है और इसे कोई भी भक्त बिना किसी विशेष कठिनाई के अपने घर पर श्रद्धापूर्वक पढ़ सकता है।

Q4: विश्वम्भरी शब्द किस देवी के लिए प्रयुक्त होता है?
A4: 'विश्वम्भरी' शब्द जगत की पालनहार माँ दुर्गा, आदिशक्ति और भवानी के लिए प्रयुक्त होता है।

Q5: इस स्तुति के नियमित पाठ से क्या लाभ होता है?
A5: नियमित पाठ से मन को शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, और जीवन की बाधाओं से लड़ने की आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।

Q6: क्या इस स्तुति के पाठ के लिए कोई विशेष नियम हैं?
A6: इसके लिए केवल शारीरिक और मानसिक पवित्रता, श्रद्धा और समर्पण की आवश्यकता होती है। दीपक जलाकर एकाग्रचित्त होकर पाठ करना चाहिए।

Q7: क्या यह भजन बच्चों को याद कराया जा सकता है?
A7: अवश्य, इसकी सरल शब्दावली के कारण यह बच्चों में संस्कार और मातृ-भक्ति जगाने के लिए बहुत उपयुक्त है।

Q8: क्या नवरात्र में इस स्तुति का विशेष महत्व है?
A8: हाँ, नवरात्र के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के दौरान इस स्तुति का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की मातृ-उपासना परंपरा और लोक-साहित्य के गहन अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने और उन्हें सहज भाव से भक्ति मार्ग से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पूर्णतः प्रामाणिक और उपयोगी है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं देवी भागवत पुराण
  • पारंपरिक भक्ति साहित्य एवं लोकगीत संग्रह
  • वैदिक एवं तांत्रिक स्तोत्र ग्रंथ

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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