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जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी लिरिक्स (Jay Devi Jay Devi Mahishasur Mardini Lyrics in Hindi) - Ma Durga Stotra Durga Aarti - Bhaktilok

5,032 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

महिषासुरमर्दिनी: शक्ति का अद्भुत स्वरूप

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा की अनुकंपा और शक्ति का अनुभव करें।

जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी लिरिक्स (Jay Devi Jay Devi Mahishasur Mardini Lyrics in Hindi) -दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी।वारी वारी जन्म मरणांते वारी।हारी पडलो आता संकट निवारी॥जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी।सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥त्रिभुवन-भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही।चारी श्रमले परन्तु न बोलवे काही।साही विवाद करिता पडले प्रवाही।ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी।सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा।क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा।अम्बे तुजवाचून कोण पुरविल आशा।नरहरी तल्लिन झाला पदपंकजलेशा॥जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी।सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का आधिक्य माँ दुर्गा की विजय और उनके प्रति भक्तों की आस्था को दर्शाता है। 'जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी' की आह्वान के साथ ही भक्त साधना में लीन होते हैं। पहले पद में 'दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी' के माध्यम से जीवन में आने वाली कठिनाइयों के संदर्भ में माँ दुर्गा से करुणा की प्रार्थना की जाती है। 'अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी' में जिजीविषा का प्रतीक भक्ति का स्वरूप दर्शाया गया है। यह दर्शाता है कि जब भक्त संकट में होता है, तो माँ दुर्गा उन्हें संजीवनी प्रदान कर संकट दूर करती हैं।

भावार्थ में हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि माँ दुर्गा केवल एक देवी नहीं, बल्कि वे सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा करने वाली शक्ति हैं। 'भवपाशा तोडी' का उल्लेख उस आत्मबोध को प्रकट करता है जो भक्त को संसार की जंजीरों से मुक्त करता है। 'प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा' इस भाव को उजागर करता है कि जब हम माँ की भक्ति करते हैं, तो हमारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं और हमारा चित्त प्रसन्न हो जाता है। यह भजन श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपनी समर्पण भाव से माँ का ध्यान करते हैं।

इस भजन का दर्शनात्मक महत्व 'भक्ति मार्ग' को दर्शाता है। भक्त की श्रद्धा और विश्वास में माँ दुर्गा का महान स्वरूप प्रदर्शित होता है। माँ दुर्गा का 'महिषासुरमर्दिनी' रूप शत्रुता और तोड़ने वाली शक्ति का प्रतीक है, जो साधक को अपने भीतर की शक्ति को पहचानने के लिए प्रेरित करता है। यह भक्ति साधना केवल एक माध्यम है; वास्तव में, माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का मार्ग है आत्म-साक्षात्कार और शक्ति का अनुभव।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व केवल भक्ति में नहीं है, बल्कि यह पुराणों में विस्तृत रूप में वर्णन किया गया है। 'दुर्गा सप्तशती' और अन्य पवित्र ग्रंथों में माँ दुर्गा की महिमा का बखान किया गया है। ये ग्रंथ हमें बताते हैं कि माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म की रक्षा की। यही कारण है कि भक्तजन हर नवरात्रि में इस स्तोत्र का जाप करते हैं, ताकि दुर्गा माता की कृपा प्राप्त हो सके।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। माँ दुर्गा का स्तोत्र 'महिषासुरमर्दिनी' का जाप करने से मन की शांति, मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती, और आध्यात्मिक उत्थान में सहायता मिलती है। इससे व्यक्ति में शक्तिशाली मानसिकता का विकास होता है, तथा समस्त संकटों से मुक्ति पाने में भी आशीर्वाद मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ सुबह सूर्योदय के समय करने की विशेषता है। पूजा स्थान को स्वच्छ करें, माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के समक्ष दीप जलाएं। भक्त को संकल्प लेकर सफेद वस्त्र पहनने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जप करने की आवश्यकता है। भक्त अपने मन और चित्त को स्थिर करते हुए प्रेमभाव से इस स्तोत्र का जाप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

महिषासुरमर्दिनी की स्तुति का महत्व क्या है?

महिषासुरमर्दिनी की स्तुति का महत्व इसीलिए है क्योंकि यह देवी दुर्गा की शक्ति और उनके भक्तों के प्रति अनुकंपा को दर्शाती है। यह भजन नकारात्मकता से मुक्ति और सकारात्मकता को जगाने में मदद करता है।

क्या इस भजन का पाठ नवरात्रि में विशेष महत्व रखता है?

जी हां, इस भजन का पाठ नवरात्रि के दिनों में बेहद महत्वपूर्ण होता है। भक्तजन माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए इस स्तुति का जाप करते हैं।

महिषासुरमर्दिनी स्तुति का सही ढंग से पाठ कैसे करें?

महिषासुरमर्दिनी स्तुति का सही पाठ करने के लिए श्रद्धा, भक्ति और ध्यानपूर्वक बैठकर जप करना चाहिए। सुबह का समय और स्वच्छ वातावरण इस स्तुति के प्रभाव को बढ़ाते हैं।

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'महिषासुरमर्दिनी की स्तुति से माँ दुर्गा की कृपा, शांति और संकट से मुक्ति का अनुभव करें।'

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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