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थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही लिरिक्स (Thari chunad dadi ji lehar lehar lehraai rahi Lyrics in Hindi) - Rani sati Dadi Bhajan - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही" रानी सती दादी जी के प्रति समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय राजस्थानी लोक भजन है। यह भजन राजस्थान की समृद्ध भक्ति परंपरा और मारवाड़ी संस्कृति का एक सुंदर संगम है। दादी जी, जिन्हें नारायणी देवी के नाम से भी जाना जाता है, शक्ति, त्याग और मातृत्व की प्रतिमूर्ति हैं। इस भजन में भक्त अपनी आराध्या के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनकी चुनरी की महिमा का गुणगान कर रहे हैं। चुनरी, जो भारतीय संस्कृति में सुहाग, सम्मान और मंगल का प्रतीक है, यहाँ दादी जी की कृपा और आशीर्वाद की छाया के रूप में वर्णित है। यह भजन विशेष रूप से भादो मास की अमावस्या के अवसर पर, जब दादी जी का वार्षिक उत्सव (भादो महोत्सव) मनाया जाता है, अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही,
थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही।

भादी मावस जद बी आवे, मन म्हारा हर्शावे,
थारी चुनड की छाया माँ, सभी सुहागन चाहवे।
सब मिल कर दादी जी, थारी चुनडी ओढ़ा रही,
थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही।

सबी सुहागन बागन मैया, थाने खूब सजावे,
कर सोला शिंगार थारे, हाथा मेहँदी रचावे।
भक्त खड़ा थारे द्वारे, ज्योत जगाई रही,
थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही।

झुनझुनू धाम निरालो प्यारो, दादी जी को धाम,
जठे आवे भक्त हजारो, लेवे दादी को नाम।
थारी महिमा दादी जी, दुनिया गाई रही,
थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही।

थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही,
थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ दादी जी के प्रति भक्त के समर्पण को दर्शाता है। "थारी चुनड लेहर लेहर लहराई रही" का अर्थ है कि दादी जी की कृपा की चुनरी चारों ओर फैल रही है। भक्त कहता है कि जब भादो की अमावस्या आती है, तो मन अत्यंत प्रसन्न हो जाता है। यह वह समय है जब दादी जी के भक्त उनके धाम झुनझुनू में एकत्रित होते हैं। चुनरी यहाँ केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि दादी जी के आशीर्वाद का प्रतीक है, जिसकी छाया में सभी सुहागन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा की कामना करती हैं। भजन में सोलह श्रृंगार और मेहंदी का वर्णन दादी जी के प्रति प्रेम और उत्सव के भाव को प्रकट करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन रानी सती दादी जी की महिमा का गान करता है। रानी सती, जिन्हें नारायणी देवी कहा जाता है, राजस्थान की एक पूजनीय सती शिरोमणि हैं। यह भजन न केवल भक्ति भाव जगाता है, बल्कि मारवाड़ी संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करता है। भादो महोत्सव के दौरान इस भजन का गायन भक्तों में एक नई ऊर्जा का संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को दादी जी के वार्षिक उत्सव (भादो अमावस्या) पर विशेष रूप से गाया जाता है। इसके अलावा, किसी भी शुभ कार्य, सत्संग, या दादी जी के जागरण में इसे गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में दादी जी की छवि का ध्यान करना चाहिए और श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्वलित करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
चुनड चुनरी या ओढ़नी
लेहर लेहर लहराती हुई, गतिमान
भादी मावस भाद्रपद मास की अमावस्या
हर्शावे प्रसन्न होना
सुहागन सौभाग्यवती स्त्री

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: रानी सती दादी जी कौन हैं?
    उत्तर: रानी सती दादी जी राजस्थान की एक महान सती और शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं, जिनका मुख्य मंदिर झुनझुनू में स्थित है।
  • प्रश्न: यह भजन कब गाया जाता है?
    उत्तर: यह भजन विशेष रूप से भादो अमावस्या के उत्सव पर गाया जाता है।
  • प्रश्न: झुनझुनू धाम का क्या महत्व है?
    उत्तर: झुनझुनू दादी जी का मुख्य धाम है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक राजस्थानी लोक भजनों और रानी सती दादी जी के भक्तों के अनुभवों पर आधारित है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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