Matarani Bhajan

ऐसा कहते हैं सब लोगों की जादू भरी पग रज है तुम्हारी (Aisa Kahte Hai Sab Log Ki Jadu Bhari Pag Raj Hai Tumhari Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

1,989 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

आज्ञा पाये निषाद ने केवट लियो बुलाये

पर केवट ने राम को दी यह मांग सुनाए

पहले चरण पखारूंगा उनके रज को झारूँगा

पान करूंगा चरणामृत नाव पे तब बैठारुंगा

ऐसा कहते हैं सब लोग

के जादू भरी पदरज है तुम्हारी

इस पद रज का स्पर्श हुआ तो

मोन शिला बानी सुन्दर नारी

मेरे पास है बस एक नईया

मेरे पास है बस एक नईया

सारे कुटुम्ब की पालना हारी

नाओ बानी अगर नार तो

आएगा मुझ निर्धन पे संकट भारी

एक नारी का कथिन है पालन

कैसे पालूंगा दो दो नारी


केवट ने कहा रघुराई से उतराई ना लूंगा हे भगवन लिरिक्स (kevat ne kaha raghuraee se utaraee na loonga he bhagavaan Lyrics in Hindi)

जिस अंधे ने प्रभु को देखा नहीं (Jis Andhe Ne Prabhu Ko Dekha Nahi Lyrics in Hindi) 

केवट प्रभु के पाओ पखारन हेतु

कठौती में जल भर लाया

पाओ पखार पिया चरणामृत

फिर प्रभु को नौका में बिठाया

गंगा पार पहुंच कर जब

गंगा पार पहुंच कर जब

जब उतराई देने का अवसर आया

देने लगी वैदेही अंगुठी

तो ना मैं सर केवट ने हिलाया

देने लगी वैदेही अंगुठी

तो ना मैं सर केवट ने हिलाया

सुनो मेरी विनती राम सरकार

राम सरकार सिया सरकार

नाई धोभी धीमर केवट और लोहार सुनार

एकदुजे से लेना मजुरी इनका एक व्यापार

मैं नदिया का केवट तुम भव सागर तारनहार

राम प्रभु मेरी मजदूरी तुम पर रही उधार

आउं मैं जब घाट तुम्हारे 

आउं मैं जब घाट तुम्हारे 

कर दीजो बेड़ा मेरा पार

सुनो मेरी विनती राम सरकार

राम सरकार सिया सरकार

केवट ने जो मांगी उतराई

मन ही मन प्रण किया रघुराई

उतराई अवष्य चुकानी है

ये रामायण श्री राम की

अमर कहानी है

ये रामायण श्री राम की

अमर कहानी है

केवट को वचन देकर

मुस्कराते हुए विदा लेकर

सिया सहित वन मार्ग पर

चल दिये युगल किशोर

भूली असंग निषाद भी

बंधानीर की ओर

सांझ सिय सहित रघुनन्दन

गंगा जी का करके वंदन

भारद्वाज के आश्रम आये

मुनि को विनय प्रणाम जानाये

ऋषि ने प्रभु को हृदय लगाया

अकथनीय परमानंद पया

कुशल पुच्छ आसन बैठे

पद पूजक मुनि भये सुखारे

कंदमूल फल पारस कर

अति प्रसन्न ऋषि राज

ज्ञान ध्यान तप जोग जप

सफल भये सब आज

कर मुनि से सत्संग प्रभु

किआ ताह रन प्रवास

चंद्रा अवस्था में हुआ

आध्यात्मिक आभास

हो … प्रात नहाये पुनये त्रिवेणी

सरिता त्रय बुध मंगल देनि

हो ..राम प्रयाग महात्न

बखाना तीर्थेश्वर यह सरस सुहाना

हो …नाम प्रयाग यज्ञ हुए अगणित

कण कण मंत्रो से अनुगुंजित

हो तीर्थेश्वर की महिमा गाकर

आश्रम मे पुनि आये रघुवर

शुभाशीष मुनिराज से मांग रहे जगदीश

पुछ रहे वनवास को जाए कहा मुनीश

मुनि बोले तुम मुझे जगत

बसा तुम विद्यामान सर्वत्र सदा

तुमका क्या रहा सूझनी है

ये रामायण श्री राम की अमर कहानी है

ये रामायण सिया राम की अमर कहानी है ||

ऐसा कहते हैं सब लोगों की जादू भरी पग रज है तुम्हारी (Aisa Kahte Hai Sab Log Ki Jadu Bhari Pag Raj Hai Tumhari Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

Read more:-

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ऐसा कहते हैं सब लोगों की जादू भरी पग रज है तुम्हारी (Aisa Kahte Hai Sab Log Ki Jadu Bhari Pag Raj Hai Tumhari Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!