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भजन करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसनै देख्या सै लिरिक्स (Bhajan Karo Bhari Jawani Mein Lyrics in Hindi) - by अनिल नागौरी Bhajan - Bhaktilok

667 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व

इस भजन के माध्यम से युवाओं को भक्ति के प्रति जागरूक करने का संकल्प लें।

भजन करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से बुढ़ापे में अंधे हो जाओगे दरश तुम कर ना पाओगे दरश करो भरी जवानी में बुडापा किसने देखा से भजन करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से बुढ़ापे में लंगड़े हो जाओगे तीरथ कर ना पाओगे तीरथ करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से भजन करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से बुढ़ापे में बहरे हो जाओगे भजन तुम सुन ना पाओगे भजन सुनो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से बुढ़ापे में तुंदे हो जाओगे दान तुम कर ना पाओगे दान करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से भजन करो भरी जवानी में बुढ़ापा किसने देखा से
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'भजन करो भरी जवानी में' का प्रमुख संदेश है कि जीवन की जवानी का सही उपयोग भक्ति में किया जाना चाहिए क्योंकि बुढ़ापे में अपने भक्ति के कार्यों का संपादन करना कठिन हो जाता है। इस भजन की शुरुआत में ही यह कहा गया है कि 'बुढ़ापा किसने देखा से', जिससे यह स्पष्ट होता है कि युवापन का समय बहुत मूल्यवान है। यह भजन इस बात का भी संकेत करता है कि युवा अवस्था में भक्ति, पूजा-पाठ और धर्म के कार्यों में ध्यान देना चाहिए, ताकि बुढ़ापे में जब शारीरिक क्षमताएँ कमज़ोर हो जाती हैं, तो व्यक्ति स्वयं को उस स्थिति में न पाए कि वह अपने धार्मिक कर्तव्यों को ठीक से निभा न सके। यह एक सुझाव है कि जो लोग अपनी जवानी में भक्ति में लीन रहेंगे, वे बुढ़ापे में अपंगता और सीमाओं से मुक्त रहेंगे।

इस भजन के भावार्थ में गहरी जीवन की सच्चाइयाँ छिपी हुई हैं। यह बताता है कि समय का महत्व कभी भी कम नहीं होता। जीवन की जवानी में अद्भुत ऊर्जा, सजगता, और संभावनाएँ होती हैं, जिसका उपयोग मंदिरों में जाने, सेवा कार्य करने और भक्ति की साधना में किया जाना चाहिए। जब व्यक्ति बुढ़ापे में पहुँचता है, तो उसकी शारीरिक घटनाएँ जैसे दृष्टिहीनता, श्रवण विकार, और गतिशीलता में कमी, उसे भक्ति के मार्ग से हटने पर मजबूर कर सकती हैं। यहाँ एक गहरी चेतावनी है कि यदि भक्ति का कार्य स्थगित किया गया, तो बुढ़ापे में पछताने का कोई लाभ नहीं होगा। जीवन का यह एक कठोर सत्य है कि जब हम अपने जीवन की श्रेष्ठता का उपयोग नहीं करते हैं, तब इसके परिणाम दुखदायी होते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग का पथ दर्शाया गया है, जिसमें आत्मा की उन्नति हेतु अपने कर्तव्यों को पूरा करने का संदेश है। भक्ति को एक साधना के रूप में देखना चाहिए जहाँ व्यक्ति अपने प्रभु के प्रति समर्पण करता है। इसी भजन के माध्यम से यह बताया गया है कि जब हमारी कामना है कि हम जन्म-जन्मांतर तक भक्ति के साधक बने रहें, तो यह आवश्यक है कि हम अपने युवा अवस्था का लाभ उठाएँ। यह भक्ति मार्ग का अद्भुत अनुभव है जब हम अपने समर्पण और प्रयासों के साथ वास्तविकता में पारिवारिक व आध्यात्मिक सुख प्राप्त कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भजन 'भजन करो भरी जवानी में' का महत्व भारतीय संस्कृति की भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ा है। इसमें जीवन के महत्वपूर्ण चरणों का विवेचन किया गया है, जो हमें यथार्थता का बोध कराता है। पुराणों में, जीवन के चार आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, तथा संन्यास) का उल्लेख मिलता है, जिसमें युवावस्था का समय भक्ति व साधना का सबसे उपयुक्त समय माना गया है। महाभारत और रामायण में भी इस बात का विस्तार से वर्णन है कि किस प्रकार युवावस्था का सदुपयोग करके व्यक्ति अपने अंतर्मन को प्रबुद्ध कर सकता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को जपने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान की भावना मिलती है। यह व्यक्ति को अपने जीवन में भक्ति के प्रति जागरूक करता है और उसे आध्यात्मिक उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है। नियमित रूप से इस भजन का जप करने से मन की एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का आदान-प्रदान सुबह या शाम के समय करना विशेष लाभकारी होता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और अक्षत अर्पित करना चाहिए। आरामदायक आसन पर बैठकर, मन में भक्ति के भाव लाकर, पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ इस भजन का जप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि जवानी में भक्ति करने का महत्व अत्यधिक है और बुढ़ापे में इसे करने में कठिनाई हो सकती है।

क्या भजन सुनने से कोई लाभ होता है?

भजन सुनने से मन को शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है, तथा यह व्यक्ति में भक्ति के प्रति सजगता बढ़ाता है।

कब और कैसे इस भजन का जप करना चाहिए?

इस भजन का जप सुबह या शाम को एकांत में, दीपक जलाकर और श्रद्धा के साथ seated posture में करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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