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चंद्रभागेच्यातीरी उभा मंदिरी तो पहा विटेवरी लिरिक्स (Chandrabhagechya Tiri Ubha Mandiri To Paha Vitevari Lyrics in Hindi) - Marathi Bhajan - Bhaktilok

210 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"चंद्रभागेच्यातीरी उभा मंदिरी" यह मराठी अभंग पंढरपुर के आराध्य देव विठ्ठल (पांडुरंग) की महिमा का एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है। यह भजन वारकरी संप्रदाय की भक्ति परंपरा का सार प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त अपने प्रिय विठ्ठल को चंद्रभागा नदी के तट पर विटे (ईंट) पर खड़े हुए निहारते हैं। यह भजन न केवल भगवान की सुंदरता का वर्णन करता है, बल्कि भक्त पुंडलिक की सेवा और संतों की भक्ति को भी रेखांकित करता है। इस भजन का श्रवण मन को शांति और पांडुरंग के प्रति अटूट समर्पण की भावना से भर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चंद्रभागेच्यातीरी, उभा मंदिरी, तो पहा विटेवरी
दुमदुमली पंढरी, पांडुरंग हरि, तो पहा विटेवरी

जगी प्रगटला तो जगजेठी, आला पुंडलिकाच्या भेटी
पाहुन सेवा खरी, थांबला हरि, तो पहा विटेवरी

नामदेव नामात रंगला, संत तुका किर्तनी दंगला
टाळ घेऊन करी, चला वारकरी, तो पहा विटेवरी

संत जनाई ओवी गाई, तशी सखू अन् बहिणाबाई
रखुमाई मंदिरी, एकली परि, तो पहा विटेवरी

चंद्रभागेच्यातीरी, उभा मंदिरी, तो पहा विटेवरी
दुमदुमली पंढरी, पांडुरंग हरि, तो पहा विटेवरी

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त विठ्ठल के पंढरपुर स्थित स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं। 'चंद्रभागेच्यातीरी' का अर्थ है चंद्रभागा नदी के तट पर। भक्त कहते हैं कि देखो, वह विठ्ठल मंदिर में विटे (ईंट) पर खड़े हैं। पंढरपुर की नगरी पांडुरंग के नाम से गुंजायमान है।

भजन की दूसरी कड़ी में पुंडलिक की कथा का स्मरण है। भक्त पुंडलिक की सेवा से प्रसन्न होकर भगवान स्वयं उनके द्वार पर आकर ईंट पर खड़े हो गए। यह भगवान की भक्त-वत्सलता का प्रतीक है। नामदेव और तुकाराम जैसे संतों ने अपने कीर्तन और नाम-स्मरण से इस नगरी को भक्ति का केंद्र बना दिया है। अंत में, जनाबाई, सखू और बहिणाबाई जैसी संतों का उल्लेख है, जो अपनी ओवियों (मराठी छंद) के माध्यम से विठ्ठल की स्तुति करती हैं। रखुमाई (रुक्मिणी) का भी मंदिर में सानिध्य है, जो इस दृश्य को पूर्ण बनाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन वारकरी संप्रदाय का आधार स्तंभ है। इसमें विठ्ठल के 'सगुण' रूप का दर्शन होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि भक्तों की सच्ची सेवा और प्रेम में निवास करते हैं। पंढरपुर की वारी का यह मुख्य गीत है, जिसे गाते हुए वारकरी मीलों की यात्रा तय करते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को एकादशी, विशेषकर आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी के अवसर पर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सुबह की काकड़ आरती या शाम के कीर्तन के समय गाया जा सकता है। इसे गाते समय 'टाळ' और 'मृदंग' का प्रयोग करने से भक्ति का वातावरण और अधिक सजीव हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
चंद्रभागा पंढरपुर में बहने वाली पवित्र नदी (भीमा नदी का नाम)
विटेवरी ईंट पर (भगवान विठ्ठल ईंट पर खड़े हैं)
जगजेठी संसार के स्वामी (भगवान)
वारकरी पंढरपुर की यात्रा करने वाले भक्त
रखुमाई माता रुक्मिणी

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

  • चंद्रभागेच्यातीरी, उभा मंदिरी: चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित मंदिर में प्रभु खड़े हैं।
  • जगी प्रगटला तो जगजेठी: संसार के रक्षक प्रभु ने पुंडलिक की भक्ति के लिए अवतार लिया।
  • नामदेव नामात रंगला: संत नामदेव प्रभु के नाम में लीन हैं।
  • संत जनाई ओवी गाई: संत जनाबाई अपनी ओवियों के माध्यम से प्रभु का गुणगान कर रही हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चंद्रभागेच्यातीरी उभा मंदिरी
आराध्य देव श्री विठ्ठल (पांडुरंग)
भाषा मराठी
मुख्य भाव भक्ति और समर्पण
संबंधित संप्रदाय वारकरी संप्रदाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

विठ्ठल ईंट पर क्यों खड़े हैं?

पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त पुंडलिक अपने माता-पिता की सेवा में व्यस्त थे। जब भगवान उनसे मिलने आए, तो पुंडलिक ने उन्हें खड़े रहने के लिए एक ईंट (विट) फेंक दी। भगवान उसी ईंट पर खड़े हो गए।

वारकरी कौन होते हैं?

जो भक्त प्रतिवर्ष पंढरपुर की पैदल यात्रा करते हैं, उन्हें वारकरी कहा जाता है।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री वारकरी संप्रदाय के पारंपरिक अभंग संग्रह और पंढरपुर की भक्ति परंपराओं पर आधारित है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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