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गणेश अमृतवाणी (Ganesh Amritwani Lyrics In Hindi) - by Anuradha Paudwal Ganesh Bhajan - Bhaktilok

686 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

गणेश अमृतवाणी: विघ्नहरण का दिव्य स्तोत्र

इस भक्ति गीत के माध्यम से गणेश जी की कृपा प्राप्त करें और जीवन के विघ्नों से मुक्त हों।

 गणेश अमृतवाणी (Ganesh Amritwani Lyrics In Hindi) - विघ्न विनाशक गणराय भये से मुक्त करेइस्कि दया से भक्तन के भाव से ना तारेपार्वती ललाना का मान से भजन तू कर्ता जाकरुणा की इस मुरत से मन वंचित फाल तु पाजीसके घर मैं गनराय के नाम का दीप जलेजिंकपे करुणा स्वयंवर करे गौरी सुत महाराजपलक झपकते ही अनके सिद्ध हो जाते हैं काजजय जय श्री गणेशजय गणपति गणेशमिटि के है हम बन गणपति प्राण स्वरूपवो है राचइया हम रचना व सूरज हम धुपसदा समरपं भव से जयं गणपति पश्यजीवन गथरी का तुमको कस्त ना देगा भरनर नारायण ऋषि मुनि जिस्का मन ना करेदीन हें के वो स्वामी घडी मैं पाप हरेगुन गौरव और ज्ञान की गंगा गपती प्रीतइस्सके साधक को जग मेरा कल साके ना जीतजय जय श्री गणेशजय गणपति गणेशआदी सिद्धिया हाय जिस्की सेवा करे दिन बारिशउसके चरण सरोज से जड़े रहिये नैनमन मंदिर मैं तू बस अम्बा लाल गणेशकस्त नास्त हो जयेंगे मिटेंगे सकले कलशत्रिभुवन के इस नाथ का चित्त से चितन करजनम जनम की पेदा तेरी जयगी हैसागर है प्रभु प्रेम का प्यासा बन कर देखअमरत मय हो जायेंगे बडी और विवेकजय जय श्री गणेशजय गणपति गणेशघट्ट घाट्ट की जनता शिव नंदन भगवानचरन शरण मैं जाऊ को सहि स्वर ते है दया निधानदीन का शुक विशद को हरता गणपति जापएक दन्त केँ अचन सी डरते दुःख संतापकसद भाँगुर तु बुलबुल जो सोपान की बातएसे तू झाड़ जइगा जइसे वृक्षा से पातनश्येलाता दया धरम गजानन से सीकशंकर सुत से मांगल सत्त गुनो के भायखजय जय श्री गणेशजय गणपति गणेश
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गणेश अमृतवाणी भजन भगवान गणेश की महिमा का एक अद्भुत वर्णन करता है। यह भजन विघ्न विनाशक गणेश जी को समर्पित है, जो भक्तों के सभी संकटों का निवारण करते हैं। इसमें भक्त की सच्ची भावना और आस्था का उल्लेख किया गया है, जहाँ गणेश जी के प्रति प्रेम और भक्ति को उजागर किया गया है। यह कहा गया है कि जो भक्त हृदय से इस भजन का गायन करते हैं, उन्हें जीवन में सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से माँ पार्वती के सम्मान का उल्लेख करते हुए, भक्त गणेश जी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रदर्शित करते हैं। भजन की पंक्तियों में कहा गया है कि गणेश जी की करुणा का कोई मुकाबला नहीं है और उनकी कृपा से जीवन के सभी कार्य सहजता से सिद्ध होते हैं।

इस भजन में भावार्थ की गहराई को उकेरा गया है; यह दर्शाता है कि जब भक्त गणेश जी की शरण में आते हैं, तो उन्हें निराशा और दु:ख का सामना नहीं करना पड़ता। यह प्रतीकात्मक है कि गणेश जी केवल एक दाता नहीं हैं, बल्कि वे संरक्षण और मार्गदर्शन के अद्वितीय स्रोत भी हैं। भजन में 'जय श्री गणेश' का गुणगान करते हुए भक्त अपने हृदय में गणेश जी की उपस्थिति को महसूस करते हैं। भावार्थ में यह बात जगजाहिर है कि भक्त की दिल की गहराइयों से की गई प्रार्थना, ईश्वर तक पहुँचती है, जिससे सक्षम होता है भक्त को जीवन का हर क्षेत्र।

गणेश अमृतवाणी मौलिक रूप से भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) और आध्यात्मिकता को प्रदर्शित करता है। गणेश जी की आराधना से भक्त का मन नम्रता और श्रद्धा से भर जाता है, जो उन्हें आत्मा की गहराइयों तक पहुँचने में सहायता करता है। यह भजन उन सिद्धियों का भी चर्चा करता है जो गणेश जी के प्रति सच्ची सेवा और भक्ति से प्राप्त होती हैं। इस भजन में शामिल प्रत्येक शब्द को जैसे एक मन्त्र का रूप दिया गया है, जो भक्त के अपने इष्ट देव को समझने और उनसे जुड़ने का माध्यम बनता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की उपासना का संदर्भ वेदों और पुराणों में मिलता है, जहाँ गणेश को नए आरंभ और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। गणेश अमृतवाणी का उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि गणेश जी का पूजन सभी कार्यों में विघ्न का नाश करता है। भागवत पुराण एवं महाभारत में भी गणेश जी के महात्म्य का वर्णन मिलता है। गणेश जी का स्वागत, उनके गुणों का गान और उनकी कृपा की अपेक्षा इस भजन में अत्यंत शक्तिशाली रूप में प्रस्तुत की गई है, जो श्रृद्धा और विश्वास के साथ गायी जाती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। गणेश अमृतवाणी का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और भक्ति का अनुभव होता है। इसका नियमित उच्चारण भक्त के जीवन में सकारात्मकता और उत्साह भरता है। यह भजन भक्त को तनाव से मुक्त करने, विनाशकारी विचारों का नाश करने और सफलता की ओर अग्रसर होने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश अमृतवाणी का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या वेला में करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान एक शुभ स्थान पर साफ-सुथरे आसन पर बैठकर मानसिक एकाग्रता के साथ पाठ करें। पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति के समक्ष दीप जलाना और मिठाई या मोदक का भोग अर्पित करना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश अमृतवाणी का पाठ क्यों करना चाहिए?

गणेश अमृतवाणी का पाठ विघ्नों को दूर करने और मंगलकारी आशा जगाने के लिए किया जाता है। यह भक्तों को मानसिक शांति और समर्पण प्रदान करता है।

क्या गणेश अमृतवाणी का जाप करते समय कोई विशेष नियम हैं?

हाँ, गणेश अमृतवाणी का पाठ करते समय मन को एकाग्र करके, स्वच्छता का ध्यान रखते हुए, और दिव्य भावना से करना चाहिए।

गणेश अमृतवाणी का कब पाठ करना सर्वोत्तम है?

सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या वेला में गणेश अमृतवाणी का पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है। इसे नियमित रूप से करने से दिव्यता अनुभव होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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