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हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता लिरिक्स (Hari ka naam amrit hai Lyrics in Hindi) - Hari BHajan - Bhaktilok

299 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता लिरिक्स (Hari ka naam amrit hai Lyrics in Hindi) - Hari Bhajan - Bhaktilok

सनातन भक्ति परंपरा में हरि संकीर्तन को भवसागर से तरने का सबसे सुगम और अचूक मार्ग माना गया है। प्रस्तुत पावन भजन "हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता" मनुष्य जीवन की दुर्ललभता, भगवद्नाम की महिमा और जीव की अज्ञानता पर एक अत्यंत ही मार्मिक एवं आत्म-चिंतनात्मक प्रकाश डालता है। प्रसिद्ध गायिका सुमन शर्मा (Suman Sharma) द्वारा स्वरबद्ध यह भजन हमें यह सिखाता है कि किस प्रकार मनुष्य दुर्लभ मानव योनि मिलने के बावजूद सांसारिक प्रपंचों में उलझकर परमात्मा के उस अमृत रूपी नाम का पान करने से वंचित रह जाता है। यह मार्गदर्शिका इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ और आध्यात्मिक रहस्यों का सम्पूर्ण संकलन प्रस्तुत करती है, जिससे साधक अपने जीवन को भक्तिमय बना सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता,
हमें पीना नहीं आता हमें पीना नहीं आता,
हरि का नाम अमृत है.....||

मानुष अनमोल चोले को तरसते देवता भी हैं,
प्रभु ने जिंदगी दी है हमें जीना नहीं आता,
हरि का नाम अमृत है.....||

कमाई बाप की करते नहीं संतोष जीवन में,
बचाते हैं हरि हमको हमें बचना नहीं आता,
हरि का नाम अमृत है.....||

बहुत उपदेश देते हैं सुधरती है नहीं दुनिया,
हमें कहना तो आता है मगर करना नहीं आता,
हरि का नाम अमृत है.....||

जरा सोचो जरा समझो जरा मन में विचार हो तुम,
भटकना होगा नहीं जग में शरण में हरि की तू आजा,
हरि का नाम अमृत है.....||

*** SINGER - SUMAN SHARMA ***

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के यथार्थ और आध्यात्मिक दर्शन का एक गहरा आईना है। प्रत्येक पंक्ति में जीवन की एक ऐसी सत्यता छिपी है जो मनुष्य को आत्ममंथन करने के लिए विवश कर देती है:

  • प्रथम पंक्ति: भगवान हरि का नाम इस संसार में अमृत के समान है, जो अमरत्व और आत्यंतिक शांति प्रदान करता है। परंतु विडंबना यह है कि जीव को इस अमृत का आचमन करना नहीं आता। वह विषय-वासनाओं के विषैले पदार्थों में रस ढूँढता है।
  • द्वितीय पंक्ति: देवता भी इस दुर्लभ मनुष्य योनि के लिए तरसते हैं क्योंकि केवल इसी योनि में मोक्ष का द्वार खुलता है। प्रभु ने हमें यह सुंदर जीवन रूपी उपहार दिया है, किंतु हमें इसे सार्थकता के साथ जीना नहीं आता।
  • तृतीय एवं चतुर्थ पंक्ति: हम अपने वास्तविक पिता (परमात्मा) की दी हुई थाती का सम्मान नहीं करते और दूसरों को उपदेश देने में आगे रहते हैं, पर अपने आचरण को सुधारने का प्रयास नहीं करते।
  • पंचम पंक्ति: भजन का निष्कर्ष यह है कि संसार की भटकन छोड़कर यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान हरि की शरण में आ जाए, तो उसके जीवन के सारे कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और हृदयस्पर्शी भाषा है। यह किसी भी आम इंसान को उसकी कमियों का अहसास कराकर ईश्वर की ओर मोड़ने में सक्षम है। सनातन धर्म में श्री हरि विष्णु के स्मरण मात्र से भवसागर तरने की मान्यता है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, भक्ति और आत्मसमर्पण के भाव को जागृत करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गाया जा सकता है। इसे हारमोनियम और ढोलक की थाप के साथ सामूहिक रूप से गाने पर विशेष आनंद की अनुभूति होती है। घर में पूजा के समय इसे गाने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु, उनके अवतार श्री राम और श्री कृष्ण तथा संपूर्ण वैष्णव परंपरा को समर्पित है। संत परंपरा में नामस्मरण को ही कलियुग का सबसे बड़ा धर्म बताया गया है, जिसका जीवंत रूप इस रचना में झलकता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन को लोकप्रिय बनाने में प्रख्यात गायिका सुमन शर्मा की मधुर वाणी का विशेष योगदान रहा है। लोक संगीत की धुनों पर आधारित यह रचना जन-जन के हृदय में बस चुकी है और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ गाई जाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा बेहद सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी है जिसमें अवधि और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली गेय (Singable) है, जो श्रोताओं को तुरंत मंत्रमुग्ध कर लेती है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • मानव जीवन अनमोल है, इसे व्यर्थ की चिंताओं और बुराइयों में नष्ट न करें।
  • भगवद्नाम का स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
  • दूसरों को उपदेश देने से पहले अपने आचरण को सुधारना आवश्यक है।
  • अहंकार त्यागकर भगवान की शरणागति स्वीकार करने में ही कल्याण है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
हरि का नाम अमृत भगवान का नाम ऐसा रस जो अमरता दे मोक्ष और आंतरिक शांति का साधन
मानुष अनमोल चोला दुर्लभ मानव शरीर कर्म योनि और साधना का अवसर
कमाई बाप की परमात्मा द्वारा प्रदत्त कृपा व संस्कार दिव्य विरासत
शरण में हरी की भगवान विष्णु की शरण पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति)

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता..." - यह पंक्ति बताती है कि जीवन में मुक्ति का मार्ग बहुत सुलभ है, किंतु जीव अपनी अज्ञानता के कारण उस तक नहीं पहुँच पाता।
"मानुष अनमोल चोले को तरसते देवता भी हैं..." - स्वर्ग के देवता भी भगवान का भजन करने के लिए मानव योनि पाने की कामना करते हैं, क्योंकि देवताओं को केवल भोग योनि प्राप्त है, जबकि मनुष्य को कर्म योनि मिली है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥"

कलियुग केवल नाम अधारा। सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा॥ (श्री रामचरितमानस)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता
समर्पित देवता श्री हरि विष्णु / भगवान राम / कृष्ण
प्रसिद्ध गायिका सुमन शर्मा (Suman Sharma)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य थीम भक्ति, नामस्मरण और शरणागति
उपयुक्त अवसर सत्संग, प्रातःकालीन वंदना, एकादशी व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायिका सुमन शर्मा (Suman Sharma) जी ने अपने मधुर स्वर में गाया है।

यह भजन हमें यह सिखाता है कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और हमें विषय-वासनाओं को छोड़कर भगवान हरि के नाम का अमृत पान करना चाहिए।

हाँ, इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती, एकादशी व्रत और किसी भी पारिवारिक सत्संग के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

सनातन ग्रंथों और पुराणों के अनुसार कलियुग में भगवान का नाम स्मरण ही भवसागर से पार पाने का सबसे सरल और प्रभावी साधन है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok) पर प्रस्तुत यह सामग्री पाठकों की धार्मिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें प्रामाणिक लिरिक्स और सरल भावार्थ का समावेश किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक पंक्ति का सार पाठकों तक शुद्ध रूप से पहुँचे।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक वैष्णव भजन परंपरा एवं लोक संगीत संग्रह
  • श्री रामचरितमानस - तुलसीदास जी
  • श्रीमद्भागवत पुराण - नाम महिमा खंड

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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