पनवा से पातर फुलवा से नाजुक (Panava Se Paatar Fulava Se Najuk Lyrics in Hindi) -
पनवा से पातर , फुलवा से नाजुक
हई मोरा माई महारनियाँ हो
अवतारी घरे मोरा सातो रे बहिनिया
नजर ना लईहे डैइनिया रे
ललकी चुनरिया मंगौनि बाजार से
टिका मंग टिका गढ़ौली सोनार से
रची रची मइया के रुपवा सजइहे
कमी जनि करीहे मलनिया रे
अवतारी घरे मोरा सातो रे बहिनिया
नजर ना लईहे डैइनिया रे
लाले रंग मेहँदी रचाये ली मइया
लाले रंग अलता से सोभेला पइया
नोह काटे खातिर हम तोहके बोलइली
अंगूरी ना कटिये नउनिया रे
हई सुकुवार मोरा सातो रे बहिनिया
नजर ना लईहे डैइनिया रे
अवतारी घरे मोरा सातो रे बहिनिया
नजर ना लईहे डैइनिया रे
अम्बे भवानी हई सबका से सुनहरी
सातो बहिन भैर भैया के दुलरी
दसई में जादू टोना कर से डरैहे
पूजिहे तय माई के चरनिया रे
अवतारी घरे मोरा सातो रे बहिनिया
नजर ना लईहे डैइनिया रे ||
- Album :- Mai Bolaweli
- Song - Najari Na Laihe Dayaniya
- Singer :- Khesari Lal
- Music - Avinash ja Ghunghru
- Company/ Label :- Vee Gee Audio
- धरती गगन में होती है लिरिक्स इन हिंदी (Dharti Gagan Mein Hoti Hai Lyrics in Hindi) - SURESH WADKAR ANURADHA PAUDWAL - Bhaktilok
- है कौन बड़ा तुमसे मैया ओ त्रिभुवन की प्रतिपाली लिरिक्स (Hai Kaun Bada Tumse Maiya O Tribhuvan Ki Pratipaali Lyrics in Hindi) - Sherawali Bhajan - Bhaktilok
- ओढ के चुनरिया लाल मैं नाचूँ तेरे अंगना मे(Odh Ke Chunariya Lal Mai Nachu Tere Aangna Me Lyrics in Hindi) - Bhaktilok
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "पनवा से पातर फुलवा से नाजुक (Panava Se Paatar Fulava Se Najuk Lyrics in Hindi) - Najar Na Lag Jai by Khesari Lal Mata Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें