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Punjabi Devi Bhajan

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi) - Lakshmi Chalisa By Anuradha Paudwal - Bhaktilok

202 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi) - Lakshmi Chalisa By Anuradha Paudwal  - 

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi) - Lakshmi Chalisa By Anuradha Paudwal  - Bhaktilok

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi) - 


लक्ष्मी चालीसा पाठ करने से लाभ (Laxmi Chalisha Path Karne Se Labh):-

हिन्दू धर्म में माता लक्ष्मी को धन-धान्य की देवी माना गया है। धन-वैभव की देवी लक्ष्मी जी को शक्ति का रूप भी माना गया है | लक्ष्मी जी की श्रद्धा पूर्वक आराधना करने से मनुष्य को धन – धान्य तथा स्मृद्धि की प्राप्ति होती है माँ लक्ष्मी की उपासना से वैवाहिक जीवन भी बेहतर होता है। और यदि आप धन की समस्या से गुजर रहे हों तो विधिवत लक्ष्मी माता की पूजा करने से निश्चित रूप से धन लाभ होता है।


 लक्ष्मी चालीसा पढ़ने की सही विधि (Laxmi Chalisha Padhane Ki sahi Vidhi):-

 लक्ष्मी की आराधना करने के लिए प्रातःकाल उठकर नित्य क्रिया से निर्वृत हो कर स्नान करें। स्नान करने के बाद श्वेत या गुलाबी वस्त्र धारण करें। अब पूजा स्थल पर माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को साफ़ लाल रेशमी कपड़े पर रखें। देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की भी एक तस्वीर या मूर्ति रखें यथाशक्ति कुमकुम, घी का दीपक, गुलाब की सुगंध वाली धुप, कमल का फूल, इत्र, चंदन, अबीर, गुलाल, अक्षत आदि से माँ लक्ष्मी की पूजा करें। माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएँ तथा सच्चे मन से श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। अब अंत में माता लक्ष्मी की आरती करें यह बात जरूर ध्यान रखें की माँ सिर्फ भाव देखती हैं यदि आपका मन स्वच्छ नहीं है तो आप कितनी भी पूजा करें उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा और मन स्वच्छ होने पर अगर आपके पास साधन की कोई कमी भी है तो भी कोई फरक नहीं पड़ता |


श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa Lyrics in Hindi) - 


॥ दोहा॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा

करो हृदय में वास ।

मनोकामना सिद्घ करि

परुवहु मेरी आस ॥


॥ सोरठा॥

यही मोर अरदास

हाथ जोड़ विनती करुं ।

सब विधि करौ सुवास

जय जननि जगदंबिका ॥


॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही ।

ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥


तुम समान नहिं कोई उपकारी ।

सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥


जय जय जगत जननि जगदम्बा ।

सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥


तुम ही हो सब घट घट वासी ।

विनती यही हमारी खासी ॥


जगजननी जय सिन्धु कुमारी ।

दीनन की तुम हो हितकारी ॥


विनवौं नित्य तुमहिं महारानी ।

कृपा करौ जग जननि भवानी ॥


केहि विधि स्तुति करौं तिहारी ।

सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥


कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी ।

जगजननी विनती सुन मोरी ॥


ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता ।

संकट हरो हमारी माता ॥


क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो ।

चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥ 10


चौदह रत्न में तुम सुखरासी ।

सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥


जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा ।

रुप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥


स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा ।

लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥


तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं ।

सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥


अपनाया तोहि अन्तर्यामी ।

विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥


तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी ।

कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥


मन क्रम वचन करै सेवकाई ।

मन इच्छित वांछित फल पाई ॥


तजि छल कपट और चतुराई ।

पूजहिं विविध भांति मनलाई ॥


और हाल मैं कहौं बुझाई ।

जो यह पाठ करै मन लाई ॥


ताको कोई कष्ट नोई ।

मन इच्छित पावै फल सोई ॥ 20


त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि ।

त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी ॥


जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ।

ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥


ताकौ कोई न रोग सतावै ।

पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥


पुत्रहीन अरु संपति हीना ।

अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥


विप्र बोलाय कै पाठ करावै ।

शंका दिल में कभी न लावै ॥


पाठ करावै दिन चालीसा ।

ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥


सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै ।

कमी नहीं काहू की आवै ॥


बारह मास करै जो पूजा ।

तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥


प्रतिदिन पाठ करै मन माही ।

उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं ॥


बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई ।

लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥ 30


करि विश्वास करै व्रत नेमा ।

होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा ॥


जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।

सब में व्यापित हो गुण खानी ॥


तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं ।

तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं ॥


मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै ।

संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥


भूल चूक करि क्षमा हमारी ।

दर्शन दजै दशा निहारी ॥


बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी ।

तुमहि अछत दुःख सहते भारी ॥


नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में ।

सब जानत हो अपने मन में ॥


रुप चतुर्भुज करके धारण ।

कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥


केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ।

ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई ॥


॥ दोहा॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी

हरो वेगि सब त्रास ।

जयति जयति जय लक्ष्मी

करो शत्रु को नाश ॥


रामदास धरि ध्यान नित

विनय करत कर जोर ।

मातु लक्ष्मी दास पर

करहु दया की कोर ॥


  • Devi Bhajan: Lakshmi Chalisa 
  • Singer: Anuradha Paudwal
  • Album: Sampoorna Mahalakshmi Poojan
  • Composer: Shekhar Sen
  • Music Label: T-Series



सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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