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हरी हर एक हैं दोनो ना ये कम है ना वो कम है लिरिक्स || Hari har ek hain dono na ye kam hai na vo kam hai lyrics in hindi || Bhaktilok

263 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं" यह भजन सनातन धर्म की उस अद्वैतवादी विचारधारा का सुंदर प्रतिपादन है, जहाँ भगवान विष्णु (हरी) और भगवान शिव (हर) को एक ही परम सत्ता के दो स्वरूपों के रूप में देखा जाता है। यह भजन न केवल भक्ति रस से ओत-प्रोत है, बल्कि यह शैव और वैष्णव मतों के बीच के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है। इस भजन के माध्यम से भक्त यह अनुभव करता है कि सृष्टि के पालनकर्ता और संहारक वास्तव में एक ही परमात्मा के दो हाथ हैं। चाहे वह हिमालय की शांति हो या क्षीर सागर की शीतलता, दोनों ही स्थान प्रभु के निवास हैं। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, शिवरात्रि, एकादशी और विष्णु-शिव पूजन के अवसरों पर गाया जाता है, जो भक्तों के हृदय में एकता और प्रेम का भाव जागृत करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

ये रहते हैं हिमालय में, वो रहते क्षीर सागर में,
ससुर घर दोनों रहते हैं, ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

ये पीते भांग का प्याला, वो पीते प्रेम रस प्याला,
नशे में दोनों रहते हैं, ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

उमा की बात ये मानते, रमा की बात वो मानते,
पिया का मान करने में, ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

उन्होंने त्रिपुर को ढाहा, इन्होंने दैत्य का सिर काटा,
असुरों का मान हरने में, ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

उन्होंने धर्म को थापा, इन्होंने विश्व को पाला,
जगत उपकार करने में, ना ये कम हैं ना वो कम हैं,
हरी हर एक हैं, दोनों ना ये कम हैं ना वो कम हैं।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव 'हरि-हर' की एकता है। कवि ने बहुत ही सरल शब्दों में यह समझाया है कि भगवान शिव और भगवान विष्णु के कार्य और स्वभाव भले ही भिन्न प्रतीत हों, परंतु उनका लक्ष्य एक ही है—सृष्टि का कल्याण। भजन में बताया गया है कि शिव हिमालय में तपस्या करते हैं और विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग पर शयन करते हैं, लेकिन दोनों ही भक्तों के लिए सुलभ हैं। 'ससुर घर' का उल्लेख यहाँ एक रूपक के रूप में है, जो यह दर्शाता है कि वे दोनों ही जगत के स्वामी हैं।

भजन की पंक्तियाँ यह भी स्पष्ट करती हैं कि शिव का 'भांग का प्याला' (वैराग्य का प्रतीक) और विष्णु का 'प्रेम रस का प्याला' (भक्ति का प्रतीक) दोनों ही भक्तों को परमानंद में लीन करने वाले हैं। उमा (पार्वती) और रमा (लक्ष्मी) की आज्ञा का पालन करना यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने भक्तों और अपनी शक्ति के प्रति कितने समर्पित हैं। अंत में, त्रिपुर का विनाश और असुरों का संहार यह सिद्ध करता है कि अधर्म के नाश के लिए दोनों ही प्रभु तत्पर रहते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अद्वैत दर्शन: यह भजन शैव और वैष्णव मतों के बीच के भेद को मिटाकर एकता का संदेश देता है।
  • भक्ति भाव: इसमें ईश्वर के प्रति समर्पण और उनकी लीलाओं का सहज वर्णन है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारत की समन्वयवादी संस्कृति का प्रतीक है।
  • सरलता: इसकी भाषा अत्यंत सरल है, जिसे कोई भी भक्त आसानी से गा सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से:

  • शिवरात्रि एवं एकादशी: इन तिथियों पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • सत्संग: मंदिरों में होने वाले सामूहिक कीर्तन में यह भजन वातावरण को भक्तिमय बना देता है।
  • पूजा के समय: नित्य पूजा के अंत में इसे गाने से मन को शांति मिलती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
हरी भगवान विष्णु
हर भगवान शिव
त्रिपुर तीन असुरों के नगर (जिन्हें शिव ने नष्ट किया)
रमा माता लक्ष्मी
उमा माता पार्वती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हरी और हर में क्या अंतर है?

आध्यात्मिक दृष्टि से 'हरी' (विष्णु) पालनकर्ता हैं और 'हर' (शिव) संहारक हैं। दोनों एक ही परम ब्रह्म के दो स्वरूप हैं।

क्या यह भजन किसी विशेष त्यौहार पर गाया जाता है?

इसे शिवरात्रि, एकादशी, और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म के ग्रंथों और भक्ति परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य भक्तों को 'हरी-हर' की एकता के प्रति जागरूक करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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