श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।
🙏 गोविंदा आला रे आला – कृष्ण भजन
(Govinda Aala Re Aala) – Makhan Chor Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
अरे एक दो और तीन चार
संग पाँच छः सात हैं ग्वाला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
॥ अंतरा १ ॥
आई माखन के चोरों की सेना
ज़रा बच के संभल के जी रहना
बड़ी नटखट है फ़ौज,
कहीं आई जो मौज
नहीं बचने का..
नहीं बचने का कोई भी ताला ताला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
॥ अंतरा २ ॥
हो कैसी निकली है झूम के ये टोली
आज खेलेगी दूध से ये होली
भीगे कितना भी अंग
ठंडी हो ना उमंग
पड़े इनसे..
पड़े इनसे किसी का न पाला पाला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
अरे एक दो और तीन चार
संग पाँच छः सात हैं ग्वाला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
गोविंदा आला रे आला
ज़रा मटकी संभाल बृजबाला
🎵 माखन चोर कृष्ण भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह चंचल और उत्साहपूर्ण भजन बाल कृष्ण और उनके सखाओं के माखन चोरी के प्रसंग पर आधारित है। "गोविंदा आला रे आला" – गोविंद (कृष्ण) आ गए हैं। "ज़रा मटकी संभाल बृजबाला" – हे ब्रज की गोपी, अपनी मटकी संभालकर रखो।
"अरे एक दो और तीन चार, संग पाँच छः सात हैं ग्वाला" – एक, दो, तीन, चार और साथ में पाँच, छह, सात ग्वाले (सखा) भी हैं। यह गिनती उनकी सेना का परिचय दे रही है।
"आई माखन के चोरों की सेना" – माखन चुराने वालों की सेना आ गई है। सावधान रहना। "बड़ी नटखट है फ़ौज, कहीं आई जो मौज, नहीं बचने का कोई भी ताला" – यह फ़ौज बड़ी नटखट है, अगर इन्हें मौज़ आ गई, तो कोई ताला नहीं बचा सकता।
"हो कैसी निकली है झूम के ये टोली, आज खेलेगी दूध से ये होली" – यह टोली कैसी झूमती हुई निकली है, आज यह दूध से होली खेलेगी। "भीगे कितना भी अंग, ठंडी हो ना उमंग" – चाहे अंग कितना भी भीग जाए, उत्साह ठंडा नहीं होगा। "पड़े इनसे किसी का न पाला" – इनसे किसी का मुकाबला नहीं हो सकता।
यह भजन कृष्ण के बाल स्वरूप की मस्ती, उनके सखाओं के साथ माखन चोरी की लीलाओं, और गोपियों की व्याकुलता को दर्शाता है। यह उत्सव और उमंग से भरा हुआ है।
🥛 माखन चोरी की लीला
बाल कृष्ण की माखन चोरी की लीलाएँ ब्रज में अत्यंत प्रसिद्ध हैं। कृष्ण और उनके सखा गोपियों के घरों में घुसकर माखन चुराते थे। गोपियाँ उनकी शिकायत यशोदा मैया से करती थीं, लेकिन कृष्ण की नटखट हरकतों से सब मोहित थे।
यह भजन उसी लीला को एक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करता है। "दूध से होली खेलना" एक कल्पनाशील अभिव्यक्ति है, जैसे कि वे दूध और माखन से होली खेलेंगे।
आज भी जन्माष्टमी और दही-हांडी के अवसर पर इस प्रकार के भजन गाए जाते हैं, जहाँ युवक मटकी फोड़ने की कोशिश करते हैं और गोपियों की भूमिका में महिलाएँ उन्हें रोकती हैं।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🥁 उत्सव और उमंग
यह भजन ब्रज के उत्सवों की याद दिलाता है, जहाँ ग्वाले और गोपियाँ मिलकर रास रचाते थे। इसमें गिनती और चुनौती का अंदाज़ है, जो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देता है।
🍯 माखन का प्रतीक
माखन (मक्खन) कृष्ण के प्रेम और मिठास का प्रतीक है। माखन चुराना दर्शाता है कि कैसे भगवान अपने भक्तों के हृदय से प्रेम चुरा लेते हैं।
🎯 संदेश : गोविंदा की टोली आई है, मटकी संभालो! यह केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि उस आनंद का आह्वान है जो कृष्ण की लीलाओं में समाहित है। उनकी नटखट सेना के आगे कोई ताला नहीं टिक सकता, क्योंकि प्रेम और उत्साह हर बंधन को तोड़ देता है।
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