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चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना की सम्पूर्ण विधि (Complete Method of Kalash Sthapana in Chaitra Navratri)

670 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

शुभ मुहूर्त, सामग्री एवं विधि (Complete Guide)

घटस्थापना: नवरात्रि के पावन प्रारंभ का शुभ संकल्प

🌟 कलश स्थापना का महत्व

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो वर्ष की शुरुआत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस नौ दिवसीय उत्सव की शुरुआत कलश स्थापना (घटस्थापना) से होती है। यह एक शुभ अनुष्ठान है जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों को आमंत्रित किया जाता है।

कलश को शक्ति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसकी स्थापना पूरे नवरात्रि व्रत की आधारशिला होती है। शास्त्रों के अनुसार, विधि-विधान से कलश स्थापना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

📅 कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त सहित)

कलश स्थापना के लिए सही समय का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्य प्रतिपदा तिथि के अभिजीत मुहूर्त में किया जाता है। यदि यह मुहूर्त न मिले तो स्थानीय पंचांग के अनुसार सूर्योदय के बाद निर्धारित समय पर भी स्थापना कर सकते हैं।

📌 सामान्य नियम

  • तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नवरात्रि का पहला दिन)
  • समय: सूर्योदय के बाद प्रातः काल
  • विशेष मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त (लगभग 12:00 से 12:45 बजे तक)

❌ वर्जित समय

  • रात्रि का समय
  • सूर्यास्त के बाद
  • राहुकाल (हालांकि आवश्यकता होने पर टाला जाता है)
  • ग्रहण काल
🔔 सूचना: सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें, क्योंकि सूर्योदय और ग्रहों की स्थिति भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न होती है।

🪔 कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री

कलश स्थापना से पूर्व सभी आवश्यक सामग्री एकत्रित कर लें। शुद्धता और संकल्प इस अनुष्ठान का मुख्य आधार है।

🏺

कलश सामग्री

  • तांबे या मिट्टी का कलश
  • साफ जल या गंगाजल
  • सुपारी, दुर्वा, सिक्का
  • आम या अशोक के पत्ते
  • लाल या पीला कपड़ा
  • मौली (कलावा)
🌾

देवी स्थापना

  • माता की प्रतिमा या फोटो
  • चौकी (वेदी)
  • लाल कपड़ा (आसन)
  • सिंदूर, अबीर, गुलाल
  • नारियल (श्रीफल)
🌿

पूजन सामग्री

  • धूप, दीप, कपूर
  • पुष्प (लाल रंग के फूल)
  • फल, मिठाई (भोग)
  • पंचामृत
  • अक्षत (चावल)

🧘 कलश स्थापना की सम्पूर्ण विधि (Step-by-Step)

1

स्वच्छता एवं संकल्प

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। संकल्प लें कि मैं नवरात्रि के नौ दिनों तक विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करूंगा/करूंगी।

2

चौकी की स्थापना

एक चौकी या मेज पर लाल कपड़ा बिछाएं। इस पर मिट्टी से भरा एक बर्तन रखें और उसमें जौ बोएं। यह सात्विकता और समृद्धि का प्रतीक है।

3

कलश की स्थापना

कलश को गंगाजल से साफ करें। उसमें जल, सुपारी, दुर्वा, सिक्का और सुगंधित द्रव्य डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें। इसके ऊपर नारियल रखें और मौली बांधें।

4

देवी का आवाहन

कलश को चौकी पर स्थापित करें। देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को कलश के पूर्व दिशा में स्थापित करें। "ॐ दुं दुर्गायै नमः" मंत्र का जाप करते हुए देवी का आवाहन करें।

5

पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा

देवी को पंचामृत, वस्त्र, आभूषण, पुष्प, धूप, दीप और भोग अर्पित करें। यदि संभव हो तो षोडशोपचार (16 प्रकार की सामग्री) से पूजा करें।

6

दुर्गा सप्तशती का पाठ

यदि संभव हो तो दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) का संकल्प लें। नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पाठ अत्यधिक फलदायी माना गया है। कम से कम 1, 2, 3 अध्याय का पाठ अवश्य करें।

7

आरती एवं समापन

पूजा समाप्त होने पर देवी की आरती करें। प्रसाद वितरण करें। नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम दीपक जलाकर आरती करना नियमित रखें।

⚠️ ध्यान दें: कलश स्थापना के बाद उसे नौ दिनों तक स्थिर रखें। उसे हिलाना या स्थानांतरित करना वर्जित है। नौवें दिन (नवमी) को विसर्जन किया जाता है।

🔊 कलश स्थापना के मंत्र

कलश स्थापना के समय निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।

🌊 कलश स्थापना मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः।
ॐ कलशं स्थापयामि।
ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः।

🙏 देवी आवाहन मंत्र:

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

💧 जल में मंत्र:

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु॥

📝 कलश स्थापना के विशेष नियम एवं सावधानियां

  • ✅ कलश स्थापना के समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
  • ✅ स्थापना के बाद नौ दिनों तक नॉन-वेज, लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
  • ✅ कलश को न हिलाएं और न ही स्थानांतरित करें।
  • ✅ प्रतिदिन सुबह-शाम दीपक अवश्य जलाएं।
  • ✅ यदि कलश में जल सूख जाए तो शुद्ध जल पुनः डालें।
  • ✅ पूजा के दौरान मौन रहना चाहिए और मन को एकाग्र रखना चाहिए।
  • ✅ कलश पर रखा नारियल नौ दिनों तक वैसे ही रहता है, इसे तोड़ना वर्जित है।
  • ✅ यदि किसी कारणवश पूजा न कर सकें तो मानसिक रूप से देवी का स्मरण करें।
  • ✅ घर के सभी सदस्य मिलकर पूजा में भाग लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या कलश स्थापना के लिए केवल तांबे का कलश ही शुभ है?

उत्तर: तांबा, मिट्टी या पीतल का कलश सभी शुभ माने जाते हैं। मिट्टी का कलश अधिक प्राकृतिक और पारंपरिक माना जाता है।

प्रश्न 2: यदि मैं सुबह कलश स्थापना न कर पाऊं तो क्या दोपहर में कर सकता हूं?

उत्तर: आदर्श रूप से सुबह सूर्योदय के बाद ही करें। यदि संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त तक (लगभग 12:30 बजे तक) कर सकते हैं।

प्रश्न 3: कलश स्थापना के बाद जौ कब निकालते हैं?

उत्तर: नवरात्रि समाप्ति पर दशमी के दिन जौ निकालकर कलश का विसर्जन किया जाता है।

प्रश्न 4: क्या बिना कलश स्थापना के केवल पूजा कर सकते हैं?

उत्तर: हां, यदि कोई विशेष कारणवश स्थापना न कर सके तो माता का चित्र स्थापित करके संकल्पपूर्वक पूजा कर सकते हैं।

📝 सारांश

चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। विधि-विधान से की गई स्थापना मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति का मुख्य माध्यम है। नौ दिनों तक श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

इस नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत पूजा करें और अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भरें।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

🙏 शुभ नवरात्रि 🙏
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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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