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घट स्थापना के शुभ मुहूर्त एवं विधान | Ghat Sthapana: Auspicious Timing & Complete Rituals

259 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🪔 घट स्थापना (कलश स्थापना)

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

शुभ मुहूर्त, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Auspicious Timing & Rituals

नवरात्रि, दुर्गा पूजा एवं व्रत-त्योहारों में स्थापना का महत्व

🌟 घट स्थापना क्यों है आवश्यक?

घट स्थापना, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, व्रत या विशेष रूप से नवरात्रि के आरंभ का प्रतीक है। यह एक पवित्र संस्कार है जो मां दुर्गा के आवाहन का माध्यम बनता है। मान्यता है कि विधि-विधान से घट स्थापना करने से साधक के घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें शक्ति, समृद्धि और स्थिरता का संदेश भी देती है। सही मुहूर्त और विधि से की गई स्थापना व्रत के समस्त फल को प्रदान करती है।

📅 शुभ मुहूर्त: कब करें घट स्थापना?

घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त और प्रतिपदा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, यह कार्य देवशयनी एकादशी या नवरात्रि के प्रथम दिवस पर किया जाता है। मुहूर्त का निर्धारण करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • चंद्र और सूर्य की स्थिति: घट स्थापना हमेशा चंद्र और सूर्य की शुभ स्थिति में करनी चाहिए।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दिन का सबसे शुभ समय होता है (लगभग 12:00 PM से 12:45 PM तक)।
  • प्रतिपदा तिथि: यदि प्रतिपदा सूर्योदय के समय हो और उसका कुछ भाग दिन में उपलब्ध हो तो वह श्रेष्ठ माना जाता है।
  • वर्जित काल: रात्रि, संध्या काल, या दोपहर के राहुकाल (दिन का अशुभ समय) में घट स्थापना वर्जित है।
🕉️

आदर्श समय
प्रातः 6:00 से 9:00 AM
या अभिजीत मुहूर्त

⚠️ ध्यान दें: मालमास (अधिक मास) या क्षय तिथि में घट स्थापना नहीं करनी चाहिए। स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

🕉️ घट स्थापना का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व

घट स्थापना केवल एक औपचारिकता नहीं है, इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण है:

  • शक्ति का आह्वान: घट में मां दुर्गा के निवास का आह्वान किया जाता है। यह शक्ति का प्रतीक है जो नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है।
  • ऊर्जा केंद्र: वैज्ञानिक दृष्टि से, घट में रखा जल और अन्न ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अवशोषित करते हैं। यह घर के वातावरण को शुद्ध करता है।
  • स्थिरता और धैर्य: नौ दिनों तक जलते रहने वाला दीपक और अंकुरित अनाज धैर्य, समर्पण और स्थिरता का प्रतीक है।
  • पंचभूतों का सम्मान: घट में मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और आकाश – पांचों तत्वों का समावेश होता है, जो जीवन के संतुलन को दर्शाता है।

🙏 घट स्थापना की संपूर्ण विधि (Step-by-Step)

1

शुद्धिकरण एवं स्थान चयन

पूर्व या उत्तर दिशा में स्वच्छ चौकी रखें। उसे गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें। स्थान को फूलों से सजाएं।

2

घट (कलश) की तैयारी

तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश लें। उसमें जल, गंगाजल, सुपारी, दुर्वा, अक्षत, और कुछ सिक्के डालें। कलश के मुंह पर आम या पीपल के पत्ते लगाकर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर मौली बांधें।

3

जल, मिट्टी एवं अन्न का संकल्प

कलश के समीप मिट्टी के बर्तन में जौ, गेहूं या सात प्रकार के अन्न बोएं। यह सात्विकता और समृद्धि का प्रतीक है। नौ दिनों तक इसकी सिंचाई करें।

4

आवाहन एवं संकल्प

व्रत का संकल्प लें: "हे मां दुर्गा, मैं आपकी कृपा प्राप्ति के लिए नौ दिनों का यह व्रत कर रहा हूं। मुझे शक्ति, बुद्धि और भक्ति प्रदान करें।"

5

मंत्रोच्चारण एवं पूजन

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का जाप करते हुए घट को स्थापित करें। दीपक जलाएं, फूल, धूप, नैवेद्य अर्पित करें।

6

नौ दिनों का नियम

प्रतिदिन सुबह-शाम दीपक जलाएं। नौ दिनों तक घट को हिलाएं नहीं। नियमित पूजा करें और नौ दिन बाद विसर्जन करें।

🛕 घट स्थापना हेतु आवश्यक सामग्री

  • तांबे/पीतल/मिट्टी का कलश
  • साफ जल एवं गंगाजल
  • आम या पीपल के पत्ते
  • नारियल (साबुत)
  • लाल वस्त्र एवं मौली (कलावा)
  • अक्षत (चावल), सुपारी, सिक्के
  • मिट्टी का बर्तन (क्यारी के लिए)
  • जौ, गेहूं या सप्त अनाज
  • दीपक, घी, बाती
  • फूल, धूप, अगरबत्ती
  • नैवेद्य (फल, मिठाई)
  • दुर्गा सप्तशती या कलश स्थापना पुस्तिका

❓ घट स्थापना से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या मासिक धर्म के दौरान घट स्थापना कर सकते हैं?

उत्तर: शास्त्रों में मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ से विराम लेने का विधान है। ऐसी स्थिति में परिवार का कोई अन्य सदस्य घट स्थापना कर सकता है।

प्रश्न 2: यदि मुहूर्त न मिले तो क्या करें?

उत्तर: यदि प्रतिपदा पर शुभ मुहूर्त न मिले तो अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 12:00 से 12:45) में घट स्थापना कर सकते हैं। इसके अलावा सूर्योदय के तुरंत बाद का समय भी शुभ माना जाता है।

प्रश्न 3: क्या घर के अंदर या बाहर स्थापना करनी चाहिए?

उत्तर: घर के अंदर, पूजा स्थल या किसी साफ-सुथरे कमरे में घट स्थापना करें। बाहर खुले में न करें।

प्रश्न 4: क्या घट स्थापना के बाद अंकुर (जौ) का क्या करें?

उत्तर: नौ दिनों के बाद अंकुरित जौ को नदी या तालाब में विसर्जित करें या गाय को खिला दें। इसे घर में नहीं फेंकना चाहिए।

प्रश्न 5: क्या बिना नवरात्रि के भी घट स्थापना की जा सकती है?

उत्तर: हां, गृह प्रवेश, विवाह वर्धापन, या किसी विशेष सिद्धि के लिए भी घट स्थापना की जा सकती है, लेकिन उसके लिए विशिष्ट मुहूर्त देखना आवश्यक है।

📝 सारांश: शक्ति का साक्षात्कार

घट स्थापना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। जब हम विधि-विधान से घट स्थापना करते हैं, तो हम न केवल मां दुर्गा का आह्वान करते हैं, बल्कि अपने अंदर छिपी शक्ति को भी जागृत करते हैं।

शुभ मुहूर्त में संकल्पित होकर की गई यह साधना सफलता, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करती है। हमारे पूर्वजों ने इस विधान को इस प्रकार डिजाइन किया था कि यह व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हुए उसकी जीवन शक्ति का संवर्धन करे।

🙏 ॐ दुं दुर्गायै नमः ।। सर्व मंगल मांगल्ये ।।

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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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