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कान्हा ने मुरली बजाई – कृष्ण भजन (Kanha Ne Murli Bajai) | Radha Krishna Bhajan

206 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🎵 कान्हा ने मुरली बजाई – कृष्ण भजन

(Kanha Ne Murli Bajai) – Radha Krishna Bhajan

राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, राधा-कृष्ण भजन
📍 स्थान: गोकुल, वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ प्रस्तावना ॥

सुनो री चंदर की पूर्णिमा
रस बरसाके रात
कजन तले कान्हा खड़े
लिया मुरलिया वाले

॥ स्थायी ॥

राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे
राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा १ ॥

जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे
जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा २ ॥

माना सखी री नटखट हैं वो
गोकुल वाला ग्वाला
गोकुल वाला ग्वाला
फिर कहे को उसके रंग का
कजरा नैनो मे डाला
कजरा नैनो मे डाला

तू छोड़ ये बहना
अब हमसे क्या छुपाना
हैं बात तेरी झूठी
हैं बात तेरी झूठी
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ३ ॥

तेरे उसके बीच खड़ी हैं
ये बंसी बरैनिया
ये बंसी बरैनिया
छोड़ भी दो ये बंस की पोरी
राधा की सोतानिया
राधा की सोतानिया

रजे जरा चटपट
मिटाओ ना खटपट
नहीं तो प्रीत टूटी
नहीं तो प्रीत टूटी
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ४ ॥

कान्हा टोरी राधा से क्या हैं लड़ाई रे
जाके जरा इतना तो पूछो कन्हाई रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ५ ॥

चंचल चंचल चल तुनहरी
हिरनी धोखा खाए
गोरा गोरा देख के मुखड़ा
चंदा चुप चुप जाये

बात करे तो फूल झरे
मुस्काये तो रंग भरे
बात करे तो फूल झरे
मुस्काये तो रंग भरे
जुर्म करे नैन तुम्हारे क्या कहने

🎵 राधा-कृष्ण प्रेम भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक विशेष रात्रि के वर्णन से शुरू होता है – "सुनो री चंदर की पूर्णिमा, रस बरसाके रात, कजन तले कान्हा खड़े, लिया मुरलिया वाले" – हे सखी, सुनो! चाँद की पूर्णिमा की रात है, रस बरस रहा है। केले के पेड़ के नीचे कान्हा मुरली लिए खड़े हैं।

सखियाँ राधा से कहती हैं – "राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे" – हे राधा, तेरे कान्हा ने मुरली बजाई है। सखियाँ बार-बार यही कह रही हैं।

"जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे" – जिनके बिना तुझे नींद नहीं आती, उन्हीं कान्हा ने मुरली बजाई है। सखियाँ राधा को चिढ़ा रही हैं।

"माना सखी री नटखट हैं वो, गोकुल वाला ग्वाला" – माना कि वो नटखट है, गोकुल का ग्वाला है, फिर क्यों उसके रंग का काजरा तूने अपनी आँखों में डाला? तू छोड़ यह बहाना, अब हमसे क्या छुपाना? तेरी बातें झूठी हैं।

"तेरे उसके बीच खड़ी हैं ये बंसी बरैनिया" – तुझमें और उसमें यह बाँसुरी बाधा बनकर खड़ी है। इस बाँस की बनी हुई बाँसुरी को छोड़ दे, यह राधा की सौतन है। सखियाँ कहती हैं कि इस बाँसुरी को मिटा दो, नहीं तो प्रीत टूट जाएगी।

"कान्हा टोरी राधा से क्या हैं लड़ाई रे" – कान्हा, तुम्हारी राधा से क्या लड़ाई है? जाकर जरा इतना तो पूछो। अंत में कृष्ण के रूप का वर्णन है – चंचल चाल, हिरनी धोखा खाए, गोरा मुखड़ा देखकर चाँद भी चुप हो जाए। बात करे तो फूल झरें, मुस्काए तो रंग भर जाएँ।

यह भजन राधा-कृष्ण के प्रेम और सखियों की सहेलियों के बीच की चुहलबाजी का अद्भुत चित्रण है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • कजन तले: केले के पेड़ के नीचे
  • मुरलिया/बंसी: बाँसुरी
  • सखी री कहे रुती: सखियाँ यह कह रही हैं (चिढ़ा रही हैं)
  • बंसी बरैनिया: बाँसुरी रूपी बैरन (दुश्मन)
  • सोतानिया: सौतन, सपत्नी
  • चटपट/खटपट: झगड़ा, कलह
  • तुनहरी: तुम्हारी

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎵 बाँसुरी का महत्व

इस भजन में बाँसुरी को राधा की सौतन कहकर संबोधित किया गया है। यह बाँसुरी के प्रति राधा की ईर्ष्या और कृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाता है। बाँसुरी कृष्ण के होठों से लगी रहती है, इसलिए वह राधा की प्रतिद्वंद्वी है।

💞 सखियों की चुहल

सखियों का राधा को चिढ़ाना और उनकी प्रेम-कहानी पर टिप्पणी करना ब्रज की गोपी-संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह भजन उसी चुहलबाजी और आत्मीयता को दर्शाता है।

🎯 संदेश : कृष्ण की मुरली का रस सुनकर राधा का मन व्याकुल हो जाता है। उनके रूप, उनकी चाल, उनकी मुस्कान सब कुछ इतना मोहक है कि चाँद भी चुप हो जाता है और फूल झर जाते हैं। यह भजन हमें उस दिव्य प्रेम और सौंदर्य की झलक देता है जो राधा-कृष्ण की लीलाओं में समाया है।

॥ राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे ॥
॥ सखी री कहे रुती ॥
श्रेणियां: Holi Geet

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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