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Puja Vidhi

षष्ठी के अवसर पर मां कात्यायनी की वंदना विधि: पूजा, मंत्र एवं आराधना (Worship Method of Maa Katyayani on Shashthi)

721 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 मां कात्यायनी वंदना विधि

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

षष्ठी के अवसर पर विशेष (Navratri Shashthi)

कात्यायनी महाविद्या | दुर्गा के षष्ठम स्वरूप की आराधना

🌟 मां कात्यायनी: षष्ठी की अधिष्ठात्री देवी

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। ये देवी दुर्गा का षष्ठम स्वरूप हैं। इनका नाम महर्षि कात्यायन से जुड़ा है, जिन्होंने इनकी घोर तपस्या की थी। मां कात्यायनी संसार के कल्याण के लिए प्रकट हुईं और महिषासुर का वध किया। इनकी उपासना से साधक को वैवाहिक सुख, मनोवांछित फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में मां कात्यायनी को महाविद्या एवं वरदायिनी कहा गया है। इनकी वंदना विधि सरल परंतु फलदायी है। आइए जानते हैं षष्ठी के पावन अवसर पर इनकी पूजा की संपूर्ण विधि, मंत्र और आराधना का माहात्म्य।

📖 पौराणिक कथा: महर्षि कात्यायन की तपस्या

पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने भगवती पराशक्ति को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया। उनकी इच्छा थी कि देवी उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। तप से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि वे उनके यहां पुत्री रूप में अवतरित होंगी।

जब महिषासुर ने तीनों लोकों पर अत्याचार करना शुरू किया, तब सभी देवताओं के तेज से उत्पन्न दुर्गा ने महर्षि कात्यायन के आश्रम में जन्म लिया। इसीलिए वे कात्यायनी कहलाईं। मां ने महर्षि के यहां नौ दिनों तक निवास किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। यही दुर्गा पूजा का आधार है।

🕉️

महर्षि कात्यायन
तपस्या से प्रसन्न हुई मां

🔱 मां कात्यायनी का स्वरूप एवं महत्व

  • वाहन: सिंह – शौर्य एवं साहस का प्रतीक।
  • हाथ: चार भुजाएं – वरद मुद्रा, अभय मुद्रा, तलवार एवं कमल पुष्प।
  • आभूषण: सोने के आभूषण, चंद्रकला मुकुट – दिव्य सौंदर्य।
  • रंग: सुनहरा – ऐश्वर्य एवं समृद्धि का द्योतक।

महत्व: मां कात्यायनी की उपासना से साधक के समस्त संकट दूर होते हैं। इनकी आराधना वैवाहिक जीवन में सुख, कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर, विवाहितों को वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति में सहायक मानी गई है। ये मोक्षदायिनी भी हैं।

🙏 मां कात्यायनी वंदना विधि (पूजा विधान)

1

प्रातः स्नान एवं वस्त्र

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

2

कलश स्थापना

यदि नवरात्रि में हो, तो कलश स्थापना करें। अन्यथा एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

संकल्प एवं आवाहन

जल, अक्षत, पुष्प लेकर संकल्प करें: "अमुक कार्य की सिद्धि के लिए मैं मां कात्यायनी का पूजन करूंगा।" फिर मंत्र से आवाहन करें।

4

षोडशोपचार पूजा

आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि। विशेष रूप से शहद, गुड़, चने का नैवेद्य अर्पित करें।

5

मंत्र जाप

मूल मंत्र का 108 बार जाप करें। "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः" या "ॐ कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥" का जाप अत्यंत फलदायी है।

6

आरती एवं प्रार्थना

मां कात्यायनी की आरती करें। फल, पुष्प, नारियल अर्पित करें। अपनी मनोकामना प्रार्थना में रखें।

7

क्षमा प्रार्थना एवं विसर्जन

पूजा समाप्ति पर मां से की गई त्रुटियों की क्षमा मांगें। यदि कलश हो तो विसर्जन करें। प्रसाद वितरण करें।

🕉️ मां कात्यायनी के प्रमुख मंत्र एवं स्तोत्र

मूल मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

गायत्री मंत्र

ॐ कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥

ध्यान श्लोक

वन्दे वाञ्छितमनोरथार्थचन्द्रार्घकल्पद्रुमाम्।
कात्यायन्यै महाभागां भक्तेष्टफलदायिनीम्॥

प्रार्थना

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥

(विवाह हेतु विशेष प्रार्थना)

📿 षष्ठी व्रत एवं पालन के विशेष नियम

  • नियम: एक समय भोजन, शाकाहारी आहार, लहसुन-प्याज का त्याग।
  • रंग: पीले वस्त्र धारण करें। मां को पीले पुष्प अर्पित करें।
  • जागरण: रात्रि में जागरण करें, मंत्र जाप करें या कथा सुनें।
  • दान: कन्याओं को भोजन कराएं, वस्त्र, श्रृंगार का सामान दान करें।
  • विशेष: विवाह के इच्छुक कुंवारी कन्याएं इस दिन व्रत रखकर मां की आराधना करें।

✨ मां कात्यायनी वंदना के फल

  • वैवाहिक जीवन में सुख एवं सौहार्द
  • विवाह योग्य कन्याओं को मनचाहा वर
  • संतान सुख की प्राप्ति
  • रोगों से मुक्ति
  • शत्रुओं पर विजय
  • विद्या एवं बुद्धि का विकास
  • धन-धान्य में वृद्धि
  • कुंडली में ग्रह दोषों का निवारण
  • मोक्ष की प्राप्ति
🔆 विशेष: नवरात्रि के षष्ठी तिथि को उपवास रखकर मां कात्यायनी की विधिवत पूजा करने से समस्त मनोरथ सिद्ध होते हैं।

❓ मां कात्यायनी वंदना से जुड़े सामान्य प्रश्न

प्रश्न 1: क्या मां कात्यायनी की पूजा केवल नवरात्रि में ही करनी चाहिए?

उत्तर: नहीं, मां कात्यायनी की पूजा किसी भी षष्ठी तिथि या शुभ दिन पर की जा सकती है। नवरात्रि में उनकी विशेष महिमा है।

प्रश्न 2: विवाह हेतु कौन सा मंत्र सर्वोत्तम है?

उत्तर: "कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥" मंत्र का जाप विवाह हेतु अत्यंत फलदायी है।

प्रश्न 3: क्या पुरुष भी मां कात्यायनी की उपासना कर सकते हैं?

उत्तर: हां, मां की उपासना सभी के लिए कल्याणकारी है। पुरुष भी इनकी आराधना से यश, बल, विजय प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4: क्या मां कात्यायनी को भोग लगाने में कोई विशेषता है?

उत्तर: मां को शहद, गुड़, चने का भोग अर्पित करना अति प्रिय है। कन्या पूजन के समय भी यह विशेष रूप से दें।

🪔 मां कात्यायनी आरती

जय कात्यायनी माता, जय कात्यायनी माता।
तुम भक्तन की लाज रखो, मैया सुख संपत्ति दाता॥

सिंह वाहिनी माता, सिंह वाहिनी माता।
सुर नर मुनि जन सेवत, सबके मन भाता॥

चतुर्भुजा सुखकारी, चतुर्भुजा सुखकारी।
भक्तों के दुख हरती, सबके काज संवारी॥

ॐ जय कात्यायनी माता…

षष्ठी के पावन अवसर पर मां कात्यायनी की वंदना विधि नवरात्रि उपासना का महत्वपूर्ण अंग है। इनकी आराधना से साधक के जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक सौभाग्य, संतान प्राप्ति एवं समृद्धि आती है। विधि-विधान से की गई पूजा मनोवांछित फल देती है। मां कात्यायनी की कृपा से सभी विघ्न नष्ट होते हैं और जीवन आनंदमय बनता है।

🙏 ॐ कात्यायन्यै नमः। माता की कृपा सदा बनी रहे।

🙏 मां कात्यायनी वंदना विधि
षष्ठी के दिन विशेष आराधना
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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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