आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
krishna

Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi Lyrics (मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी) – Holi Bhajan 2026

173 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 मैं तो राधे राधे बोलूँगी – कान्हा संग होली खेलूँगी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi Lyrics In Hindi) – Holi Bhajan 2026

राधा-कृष्ण होली भजन

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: होली भजन / राधा-कृष्ण भजन
🏷️ श्रेणी: उत्सव भजन, फाग
📍 भाव: उल्लास, प्रेम, भक्ति

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मैं तो, राधे राधे बोलूंगी,
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मोहना संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा १ - नंद गाँव ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गाँव में ।
नंद, गाँव में जी, नंद गाँव में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गांव में ।
माँ, यशोदा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा २ - बरसाने ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
बरसाने में जी, बरसाने में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
राधा, प्यारी से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ३ - गोवर्धन ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, गोवर्धन में ।
गो,वर्धन में जी, गोवर्धन में,
इक्क दिन, खेलूँगी गोवर्धन में ।
गिरी, राज के, दर्शन पाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ४ - बृज मंडल ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
बृज, मंडल में जी, बृज मंडल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
परि, क्रमा, करके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ५ - वृन्दावन ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
वृन्दावन में जी, वृन्दावन में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
बिहारी जी को, रंग लगाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ६ - गोकुल ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
मैं गोकुल में, मैं गोकुल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
नंद, बाबा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ७ - दाऊ जी ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
दाऊ, जी में बल, दाऊ जी में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
बल, राम जी से, मिलके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मैं तो, राधे राधे बोलूंगी,
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥

📤 अपलोडर :- अनिल रामूर्ति, भोपाल

Uploader: Anil Ramurthy, Bhopal

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह होली भजन "मैं तो राधे राधे बोलूँगी, कान्हा संग होली खेलूँगी" एक भक्त की उत्कट अभिलाषा को दर्शाता है जो राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने की कल्पना कर रहा है। भक्त कहता है कि वह "राधे राधे" बोलेगा और कान्हा (मोहना) के साथ होली खेलेगा।

"इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गाँव में" – भक्त की इच्छा है कि वह एक दिन नंद गाँव में जाकर माँ यशोदा से मिले और फिर कान्हा के साथ होली खेले। इसी प्रकार वह बरसाने (राधा रानी का गाँव), गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी (बलराम जी) के स्थान पर जाना चाहता है।

"बिहारी जी को, रंग लगाऊँगी" – वृन्दावन में वह बिहारी जी (ठाकुर जी) को रंग लगाएगी। हर स्थान पर वह वहाँ के प्रमुख देवता या व्यक्तित्व से मिलकर उनका आशीर्वाद लेना चाहती है और फिर कान्हा के साथ होली खेलने की कल्पना करती है।

यह भजन ब्रज के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा का मानसिक चित्रण है और होली के उल्लास को राधा-कृष्ण की लीलाओं से जोड़ता है।

🔍 होली भजन का विशेष महत्त्व

ब्रज के सात पवित्र स्थानों की यात्रा: इस भजन में भक्त ब्रज के सात प्रमुख स्थलों - नंद गाँव, बरसाना, गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी (बलराम जी के स्थान) की यात्रा की कल्पना करता है। प्रत्येक स्थान राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा है।

"राधे राधे" का नाम जप: पूरे भजन में "राधे राधे" का नाम लेने पर बल दिया गया है। यह बताता है कि राधा नाम का स्मरण ही कृष्ण तक पहुँचने का मार्ग है और उनके साथ होली खेलने की अभिलाषा को पूरा करता है।

होली का उल्लास: होली के अवसर पर गाए जाने वाले इस भजन में रंग-गुलाल, उमंग और उत्साह का भाव है। "बिहारी जी को रंग लगाऊँगी" पंक्ति इस उल्लास को और बढ़ाती है।

परिक्रमा की भावना: "परि, क्रमा, करके आऊँगी" पंक्ति ब्रज मंडल की परिक्रमा के महत्व को दर्शाती है। भक्त ब्रज की यात्रा करके ही कान्हा के साथ होली खेलना चाहता है।

अनिल रामूर्ति द्वारा अपलोड: यह भजन भोपाल निवासी अनिल रामूर्ति द्वारा साझा किया गया है, जो ब्रज भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

💖 ब्रज की होली का उल्लास

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि सच्चे भक्त की अभिलाषा होती है कि वह ब्रज के सभी पवित्र स्थानों की यात्रा करे और वहाँ राधा-कृष्ण के साथ होली के उल्लास में सम्मिलित हो। "राधे राधे" का नाम जपते हुए वह इस भावना को साकार करता है।

✨ भक्ति और उत्सव का संगम

मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी केवल एक होली भजन नहीं, बल्कि भक्ति और उत्सव के अद्भुत संगम का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि भगवान के प्रति प्रेम को उत्सव के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है और होली जैसे पर्व पर यह भाव और अधिक प्रबल हो जाता है।

🙏 राधे राधे !! ब्रज की होली की जय !! श्री राधा-कृष्ण की जय !!

॥ ब्रज होली भजन ॥
॥ मैं तो राधे राधे बोलूँगी, कान्हा संग होली खेलूँगी ।।

Uploader: Anil Ramurthy, Bhopal

श्रेणियां: krishna Shri Krishna

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });