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नन्द के आनंद भयो – कृष्ण भजन (Nand Ke Anand Bhayo) | Nand Ghar Anand Bhayo Lyrics

274 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 नन्द के आनंद भयो – कृष्ण भजन

(Nand Ke Anand Bhayo) – Nand Ghar Anand Bhayo

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, जन्मोत्सव भजन
📍 स्थान: गोकुल, ब्रज

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ आनंद उमंग भयो…॥

॥ अंतरा १ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा २ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ३ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ४ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ५ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ६ ॥

पूनम के चाँद जैसी, शोभी है बाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ७ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ८ ॥

भक्तो के आनंदकंद, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो यशोदा लाल की, जय हो गोपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ९ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा १० ॥

आनंद से बोलो सब, जय हो बृज लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो बृज लाल की, पावन प्रतिपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ११ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ बृज में आनंद भयो…॥

🎵 कृष्ण जन्मोत्सव भजन | नन्द गाँव का आनंद

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह उल्लासपूर्ण भजन नन्द के घर कृष्ण के जन्म की खुशी में गाया जाता है। "नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की" – नन्द के घर आनंद हुआ है, कन्हैया लाल की जय हो।

"आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की" – आनंद और उमंग छा गया है, नन्दलाल की जय हो। "बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की" – ब्रज में आनंद हुआ है, यशोदा के लाल की जय हो।

"हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की" – हाथी, घोड़ा, पालकी (ऐश्वर्य के प्रतीक) के साथ कन्हैया लाल की जय हो। यह शोभायात्रा का वर्णन है।

"कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की" – करोड़ों ब्रह्माण्डों के स्वामी (कृष्ण) की जय हो। यह बताता है कि नन्द के इस बालक में सारे ब्रह्माण्ड का अधिपति निवास करता है।

"गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की" – वे गाय चराने आए हैं, पशुपालक (गोपाल) की जय हो। "पूनम के चाँद जैसी, शोभी है बाल की" – पूर्णिमा के चाँद के समान इस बालक की शोभा है।

"भक्तो के आनंदकंद, जय यशोदा लाल की" – भक्तों के आनंद के कंद (मूल), यशोदा के लाल की जय। "जय हो बृज लाल की, पावन प्रतिपाल की" – ब्रज के लाल की जय, जो पावन (पवित्र) की रक्षा करते हैं।

यह भजन कृष्ण के जन्मोत्सव पर गाया जाने वाला एक पारंपरिक भजन है, जिसमें नन्द-यशोदा, गोकुल-बृज सबके आनंद का वर्णन है। यह भक्तों को भी उस आनंद में शामिल होने का आह्वान करता है।

📖 भजन का महत्व

नन्द के आनंद भयो भजन कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। यह उस आनंद और उल्लास का वर्णन करता है जो नन्द के घर कृष्ण के जन्म पर हुआ था।

इस भजन में बार-बार "जय कन्हिया लाल की" का उद्घोष है। यह एक सामूहिक उद्घोष है, जैसे कोई समूह कीर्तन कर रहा हो और सब मिलकर जय-जयकार कर रहे हों।

"हाथी घोडा पालकी" – यह राजसी ठाठ-बाठ के प्रतीक हैं, जो कृष्ण के दिव्य स्वरूप और ऐश्वर्य को दर्शाते हैं। वे भले ही गोकुल के ग्वाले लगते हों, पर वास्तव में वे करोड़ों ब्रह्माण्डों के स्वामी हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎉 आनंद और उमंग का प्रतीक

यह भजन पूरी तरह से आनंद और उमंग से भरा हुआ है। हर पंक्ति में "आनंद" और "जय" शब्द आते हैं, जो उत्सव के माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना देते हैं।

🌍 ब्रह्मांडीय स्वामी

"कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति" – यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि यह नंदलाल केवल गोकुल के ग्वाले नहीं हैं, बल्कि सारे ब्रह्मांड के स्वामी हैं। फिर भी वे अपने भक्तों के बीच सहज भाव से विहार करते हैं।

🎯 संदेश : जब कृष्ण का जन्म होता है, तो केवल नन्द के घर ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रज में, गोकुल में, और हर भक्त के हृदय में आनंद छा जाता है। वे भक्तों के आनंदकंद हैं। आइए, हम सब मिलकर उनके इस आनंदोत्सव में शामिल हों और जय-जयकार करें।

॥ नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ॥
श्रेणियां: Holi Geet

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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