श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 10

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 100 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् | ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते || १०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
तेषाम्
उनको
सतत-युक्तानाम्
निरन्तर युक्त (लगे हुए)
भजताम्
भजने वालों को
प्रीति-पूर्वकम्
प्रीतिपूर्वक
ददामि
देता हूँ
बुद्धि-योगम्
बुद्धि-योग
तम्
वह
येन
जिससे
माम्
मुझको
उपयान्ति
प्राप्त होते हैं
ते
वे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

उन निरन्तर मुझमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं वह बुद्धियोग प्रदान करता हूँ, जिससे वे मुझको प्राप्त होते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna promises special divine grace to His loving devotees. To those who worship Him constantly with love, He grants "buddhi yoga" — the divine wisdom and inner guidance that leads them ultimately to Him. This is not intellectual knowledge but spiritual illumination.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरन्तर मुझमें लगे रहते हैं और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग प्रदान करता हूँ, जिससे वे मुझे प्राप्त हो जाते हैं।

The Lord assures His devotees of His direct guidance. When one worships with sincerity and love, the Lord Himself bestows the wisdom and inner discrimination that leads to ultimate union with Him.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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