श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 11

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः | नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता || ११||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
तेषाम्
उनके
एव
ही
अनुकम्पा-अर्थम्
अनुकम्पा के लिए
अहम्
मैं
अज्ञान-जम्
अज्ञान से उत्पन्न
तमः
अंधकार
नाशयामि
नष्ट करता हूँ
आत्म-भाव-स्थ
उनके हृदय में स्थित
ज्ञान-दीपेन
ज्ञान के दीपक से
भास्वता
प्रकाशमान।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

उन भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए मैं स्वयं उनके हृदय में स्थित होकर उनके अज्ञानजनित अंधकार को ज्ञान के प्रकाशमान दीपक द्वारा नष्ट कर देता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

This verse beautifully describes the Lord's compassion. He personally dwells in the hearts of His devotees and, out of His grace, illuminates their consciousness with the light of knowledge, dispelling the darkness of ignorance. This is the culmination of the devotee's journey — direct divine intervention for spiritual enlightenment.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: "उन भक्तों पर विशेष अनुग्रह करने के लिए मैं स्वयं उनके हृदय में स्थित होकर उनके अज्ञान से उत्पन्न अंधकार को ज्ञान के प्रकाशमान दीपक द्वारा नष्ट कर देता हूँ।"

The Lord's compassion knows no bounds. He not only guides His devotees externally but also illuminates their hearts from within. This inner enlightenment dispels all ignorance and reveals the ultimate truth directly to the sincere seeker.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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श्लोक 11/42 26% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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