श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 13

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा | असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे || १३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
आहु
कहते हैं
त्वाम्
आपको
ऋषयः
ऋषि
सर्वे
सभी
देवर्षि
देवर्षि
नारद
नारद
तथा
तथा
असित
असित
देवल
देवल
व्यास
व्यास
स्वयम्
स्वयं
च
और
एव
ही
ब्रवीषि
कहते हैं
मे
मुझसे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

सभी ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास भी आपको ऐसा ही कहते हैं, और अब स्वयं आप भी मुझसे यही कह रहे हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Arjuna supports his declaration of Krishna's divinity by citing the testimony of great sages and authorities. Narada, Asita, Devala, and Vyasa — all have confirmed the same truth. Now Krishna Himself has revealed it directly to Arjuna, confirming the一致 of all authentic spiritual authorities.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अर्जुन कहते हैं: "सभी ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास भी आपको ऐसा ही कहते हैं, और अब स्वयं आप भी मुझसे यही कह रहे हैं।"

Arjuna validates his understanding by pointing to the agreement between the teachings of the ancient sages and Krishna's own revelation. This establishes the consistency of spiritual truth across different times and teachers.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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श्लोक 13/42 31% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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