श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 14

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव | न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः || १४||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

17 पद
सर्वम्
सब
एतत्
यह
ऋतम्
सत्य
मन्ये
मानता हूँ
यत्
जो
माम्
मुझसे
वदसि
कहते हो
केशव
हे केशव
न
नहीं
हि
ही
ते
आपकी
भगवन्
हे भगवन्
व्यक्तिम्
प्रकट स्वरूप को
विदु
जानते हैं
देवा
देवता
न
न
दानवाः
दानव।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे केशव! आप मुझसे जो कुछ कहते हैं, वह सब मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्! आपके प्रकट स्वरूप को न तो देवता जानते हैं और न दानव ही।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Arjuna expresses his complete faith in Krishna's words. He acknowledges that the divine nature of the Lord is incomprehensible even to celestial beings and demons. Only by Krishna's grace can one understand His true manifestation.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अर्जुन कहते हैं: "हे केशव! आप मुझसे जो कुछ कहते हैं, वह सब मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्! आपके प्रकट स्वरूप को न तो देवता जानते हैं और न दानव ही।"

Arjuna's faith is not blind but based on the realization of Krishna's divine nature. He understands that the Lord's true manifestation is beyond the comprehension of even the highest celestial beings, accessible only through divine grace.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 14 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 14/42 33% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!